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दक्षिण दिल्ली के साकेत में दर्दनाक हादसा –  पांच मंजिला इमारत ढहने से मचा हड़कंप मलबे में दबे कई लोग राहत और बचाव कार्य युद्धस्तर पर जारी

दक्षिण दिल्ली के साकेत में दर्दनाक हादसा -  पांच मंजिला इमारत ढहने से मचा हड़कंप मलबे में दबे कई लोग राहत और बचाव कार्य युद्धस्तर पर जारी
नवजोत कौर सिद्धू
On: मई 31, 2026 1:05 अपराह्न
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नई दिल्ली | राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली का पॉश और व्यस्त इलाका साकेत उस वक्त दहल उठा जब अचानक एक पांच मंजिला आवासीय इमारत ताश के पत्तों की तरह ढह गई। इस भीषण हादसे के बाद इलाके में चीख-पुकार मच गई। मलबे के नीचे कई लोगों के दबे होने की आशंका है जिन्हें बाहर निकालने के लिए युद्ध स्तर पर राहत और बचाव कार्य (Rescue Operation) चलाया जा रहा है। स्थानीय प्रशासन, पुलिस, दमकल विभाग (Fire Department) और एनडीआरएफ (NDRF) की टीमें मौके पर मौजूद हैं। अब तक कई लोगों को सुरक्षित बाहर निकालकर नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है।

​कैसे और कब हुआ हादसा?

​चश्मदीदों के मुताबिक यह हादसा शनिवार की शाम को हुआ  जब लोग अपने रोजमर्रा के कम से लौटे थे और घरों में मौजूद थे। अचानक एक जोरदार धमाके जैसी आवाज हुई और देखते ही देखते पूरी पांच मंजिला इमारत जमींदोज हो गई। इमारत के गिरते ही चारों तरफ धूल का गुबार छा गया जिससे कुछ समय के लिए आस-पास देखना भी मुश्किल हो गया।

​स्थानीय निवासियों ने तुरंत इसकी सूचना पुलिस और दमकल विभाग को दी। सूचना मिलते ही राहत दल की गाड़ियां और एम्बुलेंस मौके पर पहुंच गईं। शुरुआती जांच में सामने आया है कि इमारत काफी पुरानी थी हालांकि हादसे के सटीक कारणों का पता विस्तृत जांच के बाद ही चल पाएगा।

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​राहत और बचाव कार्य –  युद्ध स्तर पर जुटी टीमें

​हादसे की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने तुरंत एनडीआरएफ (National Disaster Response Force) को सूचित किया। वर्तमान में बचाव कार्य बेहद संवेदनशीलता के साथ चलाया जा रहा है क्योंकि मलबा संकरी गली में फैला हुआ है जिससे भारी मशीनरी जैसे जेसीबी (JCB) और क्रेन को मौके पर पहुंचाने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

  • मैन्युअल रेस्क्यू –  मलबे के नीचे जिंदगियों को बचाने के लिए कटर और खोजी कुत्तों (Sniffer Dogs) की मदद ली जा रही है।
  • सुरक्षित निकाले गए लोग –  अब तक की जानकारी के अनुसार मलबे से कई लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है। मलबे से निकलते ही उन्हें प्राथमिक उपचार देकर तुरंत एम्बुलेंस के जरिए साकेत के मैक्स अस्पताल और एम्स (AIIMS) ट्रॉमा सेंटर भेजा गया है।
  • घायलों की स्थिति –  डॉक्टरों के अनुसार बचाए गए लोगों में से कुछ को गंभीर चोटें आई हैं जबकि कुछ को प्राथमिक उपचार के बाद खतरे से बाहर बताया गया है।

​हादसे के मुख्य कारण (संभावित)

​यद्यपि दिल्ली पुलिस और नगर निगम (MCD) ने इस मामले की जांच शुरू कर दी है लेकिन प्राथमिक तौर पर इस हादसे के पीछे निम्नलिखित मुख्य कारण माने जा रहे हैं

संभावित कारणविवरण
जर्जर ढांचाइमारत काफी पुरानी थी और इसके रखरखाव (Maintenance) पर लंबे समय से ध्यान नहीं दिया गया था।
अवैध निर्माणशुरुआती इनपुट के अनुसार, पांच मंजिला इमारत में तय मानकों से अधिक निर्माण या बेसमेंट में कुछ छेड़छाड़ की आशंका जताई जा रही है।
सीपेज (नमी)दिल्ली में हाल ही में हुई मौसमी शादियों या ड्रेनेज सिस्टम की खराबी के कारण नींव में पानी का रिसाव होना भी एक वजह हो सकता है।

प्रशासन और सरकार की प्रतिक्रिया

​घटना की जानकारी मिलते ही स्थानीय विधायक, सांसद और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे। दिल्ली सरकार ने हादसे पर गहरा दुख व्यक्त किया है और अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि मलबे में दबे अंतिम व्यक्ति को निकालने तक रेस्क्यू ऑपरेशन को बिना रुके जारी रखा जाए।

मुख्यमंत्री का बयान – “साकेत में हुआ यह हादसा बेहद दुखद है। राहत और बचाव कार्य पर हमारी पैनी नजर है। घायलों को मुफ्त और बेहतरीन इलाज मुहैया कराने के निर्देश दिए गए हैं। इस लापरवाही के लिए जो भी जिम्मेदार होगा उसके खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।”

​प्रशासन ने सुरक्षा के लिहाज से आस-पास की दो-तीन इमारतों को भी खाली करा लिया है ताकि यदि इस हादसे के प्रभाव से उनमें कोई दरार आई हो तो किसी अन्य जान-माल के नुकसान से बचा जा सके।

​अवैध और जर्जर निर्माण –  दिल्ली की एक पुरानी समस्या

​साकेत की यह घटना कोई पहली बार नहीं है। दिल्ली के कई संकरे और घने बसे इलाकों जैसे लक्ष्मी नगर, शाहदरा, भजनपुरा और दक्षिण दिल्ली के कुछ हिस्से में अवैध रूप से बिना किसी आर्किटेक्ट या नक्शे के बहुमंजिला इमारतें खड़ी कर दी जाती हैं।

  • कमजोर नींव पर भारी ढांचा –  अक्सर तीन मंजिला की अनुमति वाले प्लॉट पर बिल्डर लालच में आकर पांच या छह मंजिलें बना देते हैं।
  • मटेरियल की खराब गुणवत्ता –  निर्माण के समय घटिया सामग्री (सीमेंट और सरिए) का उपयोग इन इमारतों की उम्र को आधा कर देता है।
  • प्रशासनिक अनदेखी –  स्थानीय नगर निगम के स्तर पर समय रहते ऐसी जर्जर इमारतों को नोटिस न देना या उन पर कार्रवाई न करना भी एक बड़ी चूक है।

​आगे की राह और सबक

​साकेत के इस हादसे ने एक बार फिर दिल्ली एनसीआर में रह रहे लाखों लोगों की सुरक्षा पर सवालिया निशान लगा दिया है। भविष्य में ऐसे हादसों को रोकने के लिए निम्नलिखित कदम उठाने अत्यंत अनिवार्य हैं

  • स्ट्रक्चरल ऑडिट (Structural Audit) –  दिल्ली के सभी इलाकों में 20-30 साल पुरानी इमारतों का अनिवार्य स्ट्रक्चरल ऑडिट होना चाहिए ताकि कमजोर ढांचों को समय रहते चिन्हित किया जा सके।
  • बिल्डरों पर सख्त कार्रवाई – अवैध रूप से अतिरिक्त मंजिलों का निर्माण करने वाले बिल्डरों और ठेकेदारों पर गैर-जमानती धाराओं के तहत केस दर्ज होना चाहिए।
  • जन जागरूकता –  नागरिकों को भी खुद जागरूक होना होगा। यदि आपके आस-पास किसी इमारत में खतरनाक दरारें दिखती हैं तो इसकी शिकायत तुरंत स्थानीय प्रशासन या निगम को करें।

​साकेत में चल रहा रेस्क्यू ऑपरेशन इस समय प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। पूरा देश मलबे में दबे लोगों की सलामती की दुआ कर रहा है। यह हादसा हमें यह चेतावनी देता है कि चंद पैसों के लालच में नियमों को ताक पर रखकर बनाई गई इमारतें किसी भी दिन इंसानी जिंदगियों के लिए कब्रगाह बन सकती हैं। उम्मीद है कि प्रशासन इस घटना से सबक लेकर दिल्ली की अन्य जर्जर और अवैध इमारतों के खिलाफ एक बड़ा अभियान चलाएगा।

Swati Pandey

A versatile writer mainly works on trending news, daily updates from politics, business, crime, current affairs and entertainment.

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