वाशिंगटन/नई दिल्ली। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वाशिंगटन स्थित व्हाइट हाउस में 23 दिसंबर 2025 को पत्रकारों से बातचीत के दौरान एक बार फिर यह सनसनीखेज दावा किया कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच संभावित परमाणु युद्ध को रोकने में निर्णायक भूमिका निभाई थी। ट्रंप के इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नई बहस छिड़ गई है, वहीं भारत में भी इस दावे को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।

ट्रंप ने कहा कि मई 2025 में भारत और पाकिस्तान के बीच हालात इतने बिगड़ गए थे कि दोनों परमाणु संपन्न देशों के बीच युद्ध परमाणु टकराव में बदल सकता था। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका के हस्तक्षेप और उनके व्यक्तिगत प्रयासों से यह संकट टल गया और करोड़ों लोगों की जान बची।
व्हाइट हाउस में क्या बोले ट्रंप
23 दिसंबर को व्हाइट हाउस में मीडिया ब्रीफिंग के दौरान ट्रंप ने कहा,
“भारत और पाकिस्तान के बीच हालात बेहद खतरनाक हो चुके थे। विमान गिराए जा रहे थे, तनाव लगातार बढ़ रहा था। यह एक संभावित परमाणु युद्ध था, लेकिन हमने उसे रोक दिया।”
ट्रंप ने यह भी कहा कि उन्होंने दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में कई बड़े संघर्षों को सुलझाने में भूमिका निभाई है और भारत-पाकिस्तान का मामला उनमें से एक है। उन्होंने इसे अपनी विदेश नीति की बड़ी उपलब्धियों में गिनाया।
मई 2025 का भारत-पाकिस्तान तनाव
गौरतलब है कि मई 2025 के पहले और दूसरे सप्ताह में भारत और पाकिस्तान के बीच सीमा पर तनाव अपने चरम पर पहुंच गया था। दोनों देशों के बीच कुछ दिनों तक सैन्य टकराव की स्थिति बनी रही। ड्रोन, मिसाइल और हवाई गतिविधियों की खबरों ने पूरे क्षेत्र को अलर्ट पर ला दिया था।
हालांकि, 10 मई 2025 को दोनों देशों के बीच संघर्षविराम की घोषणा हुई। इसके बाद हालात धीरे-धीरे सामान्य हुए। भारत ने उसी समय स्पष्ट किया था कि यह फैसला दोनों देशों की सेनाओं के बीच सीधे संवाद के जरिए हुआ और इसमें किसी तीसरे देश की मध्यस्थता नहीं थी।
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भारत का रुख: दावे को किया खारिज
ट्रंप के इस ताजा बयान पर भारत सरकार की ओर से अब तक कोई नई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन भारत पहले भी ऐसे दावों को सिरे से खारिज करता रहा है। भारत का स्पष्ट और दो-टूक रुख रहा है कि भारत-पाकिस्तान के बीच किसी भी मुद्दे पर तीसरे पक्ष की मध्यस्थता स्वीकार नहीं की जाती।
विदेश मंत्रालय और शीर्ष नेतृत्व पहले ही कह चुका है कि संघर्षविराम का निर्णय द्विपक्षीय सैन्य बातचीत का नतीजा था। भारत का मानना है कि इस तरह के दावे वास्तविक घटनाओं को तोड़-मरोड़ कर पेश करते हैं।
पाकिस्तान की चुप्पी
पाकिस्तान की ओर से भी ट्रंप के दावे पर कोई स्पष्ट और आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। हालांकि, उस समय पाकिस्तान की तरफ से यह जरूर कहा गया था कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने दोनों देशों से संयम बरतने की अपील की थी। लेकिन अमेरिका या ट्रंप की निर्णायक मध्यस्थता की बात को पाकिस्तान ने भी खुलकर स्वीकार नहीं किया।
विशेषज्ञों की राय
रणनीतिक और रक्षा मामलों के जानकारों का कहना है कि भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव गंभीर जरूर था, लेकिन उसे सीधे परमाणु युद्ध के स्तर तक पहुंचा हुआ बताना अतिशयोक्ति है। विशेषज्ञों के मुताबिक, दोनों देशों के बीच सैन्य संवाद के चैनल खुले थे और यही संघर्षविराम का मुख्य कारण बने।
राजनीतिक विश्लेषकों का यह भी मानना है कि ट्रंप अक्सर अपनी भूमिका को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करते हैं, खासकर ऐसे मुद्दों पर जिनसे उन्हें वैश्विक स्तर पर एक “संकटमोचक नेता” के रूप में दिखाया जा सके।
पहले भी कर चुके हैं ऐसे दावे
यह पहली बार नहीं है जब ट्रंप ने भारत-पाकिस्तान को लेकर इस तरह का बयान दिया हो। अपने राष्ट्रपति कार्यकाल और उसके बाद भी वे कई बार यह दावा कर चुके हैं कि उन्होंने दोनों देशों के बीच युद्ध टलवाया। हर बार भारत ने इन बयानों को सिरे से खारिज किया है।
अंतरराष्ट्रीय संदर्भ
दक्षिण एशिया में भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव हमेशा से वैश्विक चिंता का विषय रहा है, क्योंकि दोनों देश परमाणु हथियारों से लैस हैं। मई 2025 के तनाव के दौरान संयुक्त राष्ट्र सहित कई देशों ने शांति और संयम की अपील की थी। अंतरराष्ट्रीय समुदाय का रुख यही रहा कि क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखना बेहद जरूरी है।
23 दिसंबर 2025 को व्हाइट हाउस से दिया गया डोनाल्ड ट्रंप का यह बयान एक बार फिर भारत-पाकिस्तान संबंधों और वैश्विक कूटनीति पर बहस का कारण बन गया है। जहां ट्रंप इसे अपनी बड़ी कूटनीतिक सफलता बता रहे हैं, वहीं भारत का रुख साफ है कि संघर्षविराम सीधे द्विपक्षीय प्रयासों का परिणाम था।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे संवेदनशील मुद्दों पर बयानबाजी से ज्यादा जरूरी है कि दोनों देश भविष्य में भी संवाद और समझदारी के रास्ते पर आगे बढ़ें, ताकि दक्षिण एशिया में शांति और स्थिरता बनी रहे।






