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ट्रंप का विरोधाभास: एक ड्रग को बताया ‘सामूहिक विनाश का हथियार’, तो गांजे पर दिखाई नरमी

ट्रंप का विरोधाभास एक ड्रग को बताया ‘सामूहिक विनाश का हथियार
नवजोत कौर सिद्धू
On: दिसम्बर 16, 2025 6:41 अपराह्न
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अमेरिकी राजनीति में बयान अक्सर नीतियों से ज्यादा चर्चा बटोरते हैं, और डोनाल्ड ट्रंप के ड्रग्स को लेकर दिए गए बयान इसका ताजा उदाहरण हैं। एक तरफ ट्रंप ने एक खतरनाक सिंथेटिक ड्रग को “सामूहिक विनाश का हथियार” तक घोषित कर दिया, वहीं दूसरी ओर गांजे यानी मारिजुआना को लेकर उनका रुख अपेक्षाकृत नरम और सहानुभूतिपूर्ण दिखाई दिया। इस विरोधाभास ने न सिर्फ अमेरिका में, बल्कि वैश्विक स्तर पर ड्रग नीति, सार्वजनिक स्वास्थ्य और राजनीति के रिश्ते पर नई बहस छेड़ दी है।

ट्रंप का विरोधाभास एक ड्रग को बताया ‘सामूहिक विनाश का हथियार

‘सामूहिक विनाश का हथियार’ कहकर किस ड्रग पर निशाना?

ट्रंप ने जिस ड्रग को “सामूहिक विनाश का हथियार” कहा, वह फेंटेनिल जैसे अत्यधिक शक्तिशाली ओपिओइड ड्रग्स की श्रेणी में आता है। उनका तर्क था कि यह ड्रग हथियारों से भी ज्यादा खतरनाक है, क्योंकि यह बिना गोली चले हजारों जिंदगियां खत्म कर रहा है। ट्रंप के मुताबिक, ड्रग ओवरडोज से होने वाली मौतें किसी युद्ध से कम नहीं हैं, और इसलिए इसे राष्ट्रीय सुरक्षा के नजरिए से देखा जाना चाहिए।

ड्रग संकट को राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़ने की रणनीति

ट्रंप लंबे समय से ड्रग संकट को सिर्फ स्वास्थ्य समस्या नहीं, बल्कि सुरक्षा संकट के रूप में पेश करते रहे हैं। उनके अनुसार, अवैध ड्रग्स की तस्करी सीमाओं को कमजोर करती है, अपराध बढ़ाती है और समाज की उत्पादक शक्ति को नष्ट करती है। इसी संदर्भ में उन्होंने कड़े कानून, सख्त सजा और सीमा नियंत्रण को समाधान के रूप में आगे बढ़ाया। “सामूहिक विनाश का हथियार” जैसी भाषा इसी रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है।

गांजे पर बदला-बदला सा रुख

दिलचस्प बात यह है कि इसी ट्रंप ने गांजे को लेकर अपेक्षाकृत नरम रुख अपनाया। उन्होंने कई बार कहा कि मारिजुआना के इस्तेमाल को लेकर राज्यों को अपने फैसले खुद करने चाहिए। मेडिकल गांजे के उपयोग पर भी उन्होंने खुलकर विरोध नहीं किया। कुछ मौकों पर तो उन्होंने यह तक कहा कि मारिजुआना को लेकर अत्यधिक सख्ती ने लोगों की जिंदगी बेवजह खराब की है।

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गांजा: अपराध या सामाजिक स्वीकृति?

ट्रंप का यह रुख ऐसे समय में आया जब अमेरिका के कई राज्यों में गांजा कानूनी या अर्ध-कानूनी हो चुका है। बड़ी संख्या में लोग इसे शराब की तरह एक नियंत्रित पदार्थ मानने लगे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, ट्रंप इस सामाजिक बदलाव को नजरअंदाज नहीं कर सकते थे। युवा वोटर्स और उदार विचारधारा वाले मतदाताओं में गांजे के प्रति सहानुभूति को देखते हुए उनका यह नरम रुख एक व्यावहारिक राजनीतिक कदम भी माना जा रहा है।

आलोचकों का सवाल: दोहरा मापदंड क्यों?

ट्रंप के आलोचक इस पूरे मामले को दोहरे मापदंड के रूप में देखते हैं। उनका सवाल है कि अगर ड्रग्स समाज को नष्ट करते हैं, तो फिर गांजा अलग कैसे हो गया? आलोचकों के मुताबिक, ड्रग नीति भावनाओं और राजनीति से नहीं, बल्कि वैज्ञानिक और सार्वजनिक स्वास्थ्य के आधार पर तय होनी चाहिए। वे यह भी कहते हैं कि किसी ड्रग को “सामूहिक विनाश का हथियार” कहना डर पैदा करने वाली भाषा है, जो समस्या के समाधान के बजाय उसे और जटिल बना सकती है।

समर्थकों का तर्क: खतरे के स्तर में फर्क

ट्रंप समर्थक इस आलोचना को खारिज करते हैं। उनका कहना है कि सभी ड्रग्स एक जैसे नहीं होते। फेंटेनिल जैसे सिंथेटिक ड्रग्स की थोड़ी सी मात्रा भी जानलेवा हो सकती है, जबकि गांजे का प्रभाव और जोखिम अपेक्षाकृत कम माना जाता है। समर्थकों के अनुसार, ट्रंप का रुख खतरे के स्तर के हिसाब से अलग-अलग ड्रग्स को देखने का प्रयास है, न कि कोई विरोधाभास।

ड्रग नीति बनाम राजनीतिक संदेश

विशेषज्ञ मानते हैं कि ट्रंप के बयान ड्रग नीति से ज्यादा राजनीतिक संदेश हैं। “सामूहिक विनाश का हथियार” जैसी शब्दावली आम जनता में गुस्सा और चिंता पैदा करती है, जिससे सख्त कदमों के लिए समर्थन जुटाया जा सके। वहीं गांजे पर नरमी दिखाकर वे यह संदेश देना चाहते हैं कि वे हर मामले में कठोर नहीं हैं और सामाजिक बदलाव को समझते हैं।

सार्वजनिक स्वास्थ्य का नजरिया कहां?

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि ड्रग संकट को केवल कानून-व्यवस्था या सुरक्षा के नजरिए से देखना अधूरा है। नशे की लत एक बीमारी है, और इसके लिए इलाज, पुनर्वास और जागरूकता जरूरी है। उनका तर्क है कि डराने वाली भाषा से लोग मदद मांगने से और भी डर सकते हैं। इस संदर्भ में ट्रंप का आक्रामक बयानबाजी वाला रुख सवालों के घेरे में आता है।

राजनीति, वोट बैंक और ड्रग्स

ट्रंप की ड्रग्स पर नीति को उनके चुनावी गणित से अलग करके नहीं देखा जा सकता। कठोर बयान उनके परंपरागत समर्थकों को मजबूत संदेश देते हैं, जबकि गांजे पर नरमी युवाओं और उदार मतदाताओं को आकर्षित करने की कोशिश मानी जाती है। यही कारण है कि कई विश्लेषक इसे नीति से ज्यादा रणनीति करार देते हैं।

Dr Pankaj Sharma

fitness coach and writer mainly work on sports, fitness, Religious, foreign news, and technology

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