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UAE ने पाकिस्तानियों को VISA देना रोका: बढ़ते अपराध, भीख मंगवाने वाले रैकेट और सुरक्षा चिंताओं के बाद बड़ा कदम

यूएई ने पाकिस्तानियों को वीजा देना रोका
नवजोत कौर सिद्धू
On: नवम्बर 28, 2025 3:58 अपराह्न
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साधारण पासपोर्ट धारकों पर पूरी तरह प्रतिबंध, वर्क वीजा भी कठोर जांच के बाद ही—पाकिस्तान की सरकार चिंतित, गल्फ देशों में रोजगार पर गहरा असर

यूएई ने पाकिस्तानियों को वीजा देना रोका

दुबई । संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने पाकिस्तान के आम नागरिकों को जारी किए जाने वाले वीजा को अनिश्चितकाल के लिए निलंबित कर दिया है। पाकिस्तान सरकार से जुड़े सूत्रों के अनुसार यह निर्णय सीधे तौर पर देश के उन नागरिकों से जुड़ी बढ़ती शिकायतों के बाद लिया गया है, जो विजिट वीजा पर यूएई पहुंचकर न सिर्फ अवैध गतिविधियों में शामिल पाए गए, बल्कि स्थानीय लोगों और प्रवासियों की सुरक्षा के लिए भी खतरा बनने लगे।

यूएई प्रशासन का कहना है कि उनका उद्देश्य किसी एक देश को निशाना बनाना नहीं है, बल्कि सुरक्षा और सामाजिक व्यवस्था को बनाए रखना है। लेकिन इसका सबसे बड़ा प्रभाव पाकिस्तान पर पड़ा है, क्योंकि खाड़ी देशों में काम करने वाले पाकिस्तानी नागरिकों की संख्या लाखों में है और उनकी विदेशी आय पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण स्थान रखती है।

भीख मांगने वाले गिरोहों का खुलासा—“वर्क वीजा नहीं, विजिट वीजा लेकर आ जाते हैं”

यूएई की सुरक्षा एजेंसियों ने पिछले कुछ महीनों में कई ऐसे मामलों का खुलासा किया, जिनमें पाकिस्तानी नागरिकों को विजिट वीजा पर आकर मस्जिदों, बाजारों और पर्यटक स्थलों पर भीख मांगते पाया गया। कुछ मामलों में ये लोग संगठित रैकेट के हिस्से के रूप में पकड़े गए, जो पाकिस्तान से गरीबों को लालच देकर यूएई भेजते थे और वहां उनसे अवैध कमाई करवाते थे।

दुबई पुलिस के एक अधिकारी के अनुसार—“विजिट वीजा का उद्देश्य पर्यटन और छोटे व्यक्तिगत काम होते हैं, न कि रोजगार या सार्वजनिक स्थानों पर अव्यवस्था। पाकिस्तान से ऐसी शिकायतें लगातार बढ़ रही थीं।”

अवैध गतिविधियों में बढ़ोतरी—नकली दस्तावेज़, छोटे अपराध और ठगी शामिल

सूत्र बताते हैं कि पिछले एक साल में यूएई पुलिस ने पाकिस्तानियों को शामिल करते हुए कई मामलों का भंडाफोड़ किया—छोटे पैमाने की चोरी,पर्यटकों को ठगने के प्रयास,

नकली दस्तावेज़ों से नौकरी पाने की कोशिश,पासपोर्ट और आईडी में हेरफेर,अवैध समूहों के लिए धन जुटाने का संदेह शामिल हैं। इन मामलों ने यूएई की सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क कर दिया और अंततः सामान्य पासपोर्ट धारकों के लिए वीजा रोकने का निर्णय लिया गया।

एक बार वीजा प्रतिबंध लग जाए तो हटना मुश्किल,यूएई अधिकारियों की साफ चेतावनी

यूएई के प्रशासनिक अधिकारियों के मुताबिक, वीजा प्रतिबंध सामान्य प्रक्रिया नहीं है। यह तब लगाया जाता है जब लगातार चेतावनियों के बावजूद स्थिति में सुधार नहीं होता।

एक अधिकारी ने कहा— “जब किसी देश के खिलाफ वीजा प्रतिबंध लगाया जाता है, तो इसे हटाना बेहद कठिन हो जाता है। यह पूरी इमीग्रेशन सुरक्षा रणनीति का हिस्सा है।” यानी कि पाकिस्तान को यूएई का यह निर्णय लंबे समय तक झेलना पड़ सकता है।

पाकिस्तान सरकार चुप, दूतावास सिर्फ ‘औपचारिक बयान’ तक सीमित

इस बड़े फैसले पर पाकिस्तान सरकार का आधिकारिक रुख अभी तक अस्पष्ट है। विदेश मंत्रालय ने केवल इतना कहा है कि “हम स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और यूएई अधिकारियों से लगातार संपर्क में हैं।”

दूसरी ओर यूएई स्थित पाकिस्तानी दूतावास ने भी खुलकर कोई बयान नहीं दिया, लेकिन जानकारी के मुताबिक वे लगातार यूएई इमीग्रेशन विभाग के संपर्क में हैं। हालांकि पाकिस्तान में विपक्षी दल सरकार पर आरोप लगा रहे हैं कि वह प्रवासी मजदूरों की समस्याओं को गंभीरता से नहीं ले रही।

यूएई का संदेश स्पष्ट—“सुरक्षा पहले, राष्ट्रीय हित सर्वोपरि”

यूएई सरकार ने इस मुद्दे पर साफ कहा है कि—“हम किसी भी देश के नागरिक के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन हमारे देश की सुरक्षा, कानून और सामाजिक संतुलन से समझौता नहीं किया जा सकता।” यह बयान बताता है कि यूएई ने व्यापक समीक्षा के बाद ही यह कठोर निर्णय लिया है।

क्या यह निर्णय स्थायी है..? विशेषज्ञों की राय

इमीग्रेशन विशेषज्ञों के अनुसार यह प्रतिबंध तुरंत नहीं हटने वाला दिखता है।यूएई अपनी जनसंख्या और सुरक्षा नीति को बेहद कड़ाई से लागू करता है।अवैध गतिविधियों में पकड़े गए लोगों की संख्या बढ़ रही थी।

पाकिस्तानी प्रशासन सही जवाब या समाधान देने में विफल रहा और वही

गल्फ देशों की सुरक्षा नीति में आजकल ज़ीरो टॉलरेंस अपनाया जा रहा है।

कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि पाकिस्तान को मजबूत सिस्टम लाकर यूएई को विश्वास दिलाना होगा कि वह इस स्थिति में सुधार कर सकता है।

नतीजा—यूएई का निर्णय पाकिस्तान के लिए बड़ी कूटनीतिक परीक्षा

यूएई द्वारा वीजा प्रतिबंध लगाए जाने से पाकिस्तान की विदेश नीति पर सवाल उठे हैं। प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा और भविष्य खतरे में है और इससे पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर सीधा दबाव पड़ेगा। पाकिस्तान के आंतरिक प्रशासनिक ढांचे पर गंभीर प्रश्न खड़े हुए हैं।  अगर पाकिस्तान इस मुद्दे को गंभीरता से नहीं संभालता, तो इसके परिणाम दीर्घकालिक हो सकते हैं।

Pradeep Pandey

A versatile writer mainly works on politics, business, crime, current affairs and entertainment.

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