व्यापारभारतविदेशी समाचारखेलजीवन शैलीराजनीतिधर्मभौगोलिकसेलिब्रेटीज़शिक्षास्वास्थ्य

उन्नाव दुष्कर्म मामला: कुलदीप सेंगर को झटका, सजा निलंबन के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाएगा CBI

पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर
नवजोत कौर सिद्धू
On: दिसम्बर 25, 2025 12:51 अपराह्न
Follow Us:

उन्नाव दुष्कर्म मामले में भारतीय जनता पार्टी के पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ती नजर आ रही हैं। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने संकेत दिए हैं कि वह इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा कुलदीप सेंगर की उम्रकैद की सजा निलंबित किए जाने के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देगी। CBI का कहना है कि यह मामला “अत्यंत जघन्य” अपराध से जुड़ा है और पीड़िता को न्याय दिलाने के लिए सजा का निलंबन जनहित के खिलाफ है।

पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर

क्या है पूरा मामला

उन्नाव जिले का यह मामला वर्ष 2017 का है, जब एक नाबालिग लड़की ने तत्कालीन विधायक कुलदीप सेंगर पर दुष्कर्म का आरोप लगाया था। शुरुआत में स्थानीय स्तर पर पुलिस और प्रशासन की भूमिका पर गंभीर सवाल उठे। पीड़िता और उसके परिवार को लगातार धमकियां मिलने, आरोपियों को संरक्षण मिलने और जांच में ढिलाई के आरोपों के बीच यह मामला देशभर में सुर्खियों में आ गया।

बाद में सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप पर इस मामले की जांच CBI को सौंपी गई। जांच के बाद CBI ने कुलदीप सेंगर के खिलाफ पुख्ता सबूत पेश किए। दिल्ली की एक विशेष अदालत ने वर्ष 2019 में सेंगर को दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई। अदालत ने इसे समाज को झकझोर देने वाला अपराध बताया था।

हाईकोर्ट का आदेश और विवाद

हाल ही में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कुलदीप सेंगर की उम्रकैद की सजा को निलंबित करने का आदेश दिया। इस आदेश के बाद यह मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया। हाईकोर्ट के आदेश को लेकर यह तर्क दिया गया कि आरोपी लंबे समय से जेल में है और उसकी अपील लंबित है, इसलिए सजा निलंबन पर विचार किया गया।

हालांकि, इस फैसले पर पीड़िता पक्ष और CBI दोनों ने कड़ी आपत्ति जताई। CBI का कहना है कि ऐसे मामलों में सजा निलंबन से गलत संदेश जाता है और पीड़ितों के मन में न्याय व्यवस्था के प्रति भरोसा कमजोर होता है।

सुप्रीम कोर्ट का रुख

CBI अब सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने की तैयारी में है। एजेंसी का कहना है कि यह सिर्फ एक व्यक्ति की सजा का मामला नहीं, बल्कि महिलाओं और नाबालिगों के खिलाफ अपराधों में न्याय की मिसाल से जुड़ा हुआ विषय है। CBI यह भी दलील देगी कि कुलदीप सेंगर एक प्रभावशाली व्यक्ति रहा है और सजा निलंबन से गवाहों व पीड़िता की सुरक्षा पर खतरा बढ़ सकता है।

सूत्रों के अनुसार, CBI सुप्रीम कोर्ट में यह मांग करेगी कि हाईकोर्ट के सजा निलंबन आदेश पर रोक लगाई जाए और कुलदीप सेंगर को जेल में ही रखा जाए, जब तक कि उसकी अपील पर अंतिम फैसला न हो जाए।

Also read – डेविस कप 2025 फाइनल: इटली ने स्पेन को हराकर रचा इतिहास, लगातार तीसरी बार बना चैंपियन

पीड़िता पक्ष की प्रतिक्रिया

पीड़िता के परिवार ने हाईकोर्ट के आदेश पर गहरी नाराजगी जताई है। परिवार का कहना है कि उन्हें एक बार फिर डर और असुरक्षा का माहौल महसूस हो रहा है। उनका आरोप है कि आरोपी पक्ष के प्रभाव के कारण न्याय की राह बार-बार कठिन बन रही है। पीड़िता के वकीलों ने भी सुप्रीम कोर्ट में CBI के कदम का समर्थन किया है।

राजनीतिक और सामाजिक असर

उन्नाव दुष्कर्म मामला सिर्फ एक कानूनी केस नहीं रहा, बल्कि यह राजनीतिक और सामाजिक बहस का भी केंद्र रहा है। विपक्षी दलों ने इस फैसले को लेकर सरकार और न्याय व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। वहीं, सामाजिक संगठनों और महिला अधिकार समूहों ने सजा निलंबन को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कड़ी आलोचना की है।

सुप्रीम कोर्ट तय करेगा आगे की दिशा

अब सबकी नजरें सुप्रीम कोर्ट पर टिकी हैं। यदि CBI की याचिका पर शीर्ष अदालत तुरंत सुनवाई करती है और हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगाती है, तो कुलदीप सेंगर की रिहाई पर विराम लग सकता है। दूसरी ओर, यह मामला एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर रहा है कि क्या जघन्य अपराधों में दोषी ठहराए गए लोगों को सजा निलंबन जैसी राहत मिलनी चाहिए।

उन्नाव दुष्कर्म मामला न्याय व्यवस्था की परीक्षा का प्रतीक बन चुका है। सुप्रीम कोर्ट का फैसला न केवल इस केस की दिशा तय करेगा, बल्कि भविष्य में ऐसे मामलों में न्यायिक दृष्टिकोण की भी मिसाल बनेगा।

Dr Pankaj Sharma

fitness coach and writer mainly work on sports, fitness, Religious, foreign news, and technology

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now

Leave a Comment