पिछले कुछ समय से लगातार नई ऊंचाइयों को छू रहे घरेलू और अंतरराष्ट्रीय सराफा बाज़ारों (Bullion Markets) में अचानक आए भारी बिकवाली के दबाव ने निवेशकों को चौंका दिया है। पिछले सप्ताह भारतीय बाजारों में सोने और चांदी की कीमतों में ऐतिहासिक गिरावट दर्ज की गई। इस गिरावट के दौरान 10 ग्राम सोने की कीमत में लगभग ₹5,500 तक की बड़ी कटौती देखी गई जबकि औद्योगिक मांग और निवेश के लिए पसंदीदा मानी जाने वाली चांदी में प्रति किलोग्राम ₹13,000 से अधिक की रिकॉर्ड कमी आई।
इस अप्रत्याशित गिरावट ने जहां एक तरफ आम उपभोक्ताओं और शादी-ब्याह के लिए खरीदारी करने वालों को राहत दी है वहीं दूसरी तरफ निवेशकों के मन में यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर सुरक्षित निवेश माने जाने वाले इन कीमती धातुओं में इतनी बड़ी गिरावट क्यों आई।
आइए विस्तार से समझते हैं कि घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में आई इस रिकॉर्ड गिरावट के मुख्य कारण क्या हैं और बाजार के जानकारों का इस पर क्या रुख है।
सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट के 5 मुख्य कारण
वैश्विक और घरेलू सराफा बाज़ारों में आई इस भारी गिरावट के पीछे कोई एक वजह नहीं बल्कि कई बड़े आर्थिक और भू-राजनीतिक कारक एक साथ जिम्मेदार रहे हैं। मुख्य कारणों का विस्तृत विवरण निम्नलिखित है
भारतीय सराफा बाजार में अप्रैल 2026 ऐतिहासिक हलचल – सोने और चांदी की कीमतों में भारी गिरावट
क - अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ‘हॉकिश’ नीति और ब्याज दरें बढ़ने की आशंका
सराफा बाज़ार में गिरावट का सबसे बड़ा और मुख्य कारण अमेरिकी केंद्रीय बैंक (US Federal Reserve) की मौद्रिक नीति को लेकर बदली उम्मीदें हैं। हाल ही में आए अमेरिका के मजबूत लेबर मार्केट डेटा (Non-farm Payrolls) और आर्थिक आंकड़ों के बाद यह संभावना बढ़ गई है कि फेडरल रिजर्व आने वाले समय में ब्याज दरों में कटौती करने के बजाय उन्हें लंबे समय तक उच्च स्तर पर रख सकता है या फिर दिसंबर तक ब्याज दरों में बढ़ोतरी भी कर सकता है। चूंकि सोने पर कोई निश्चित ब्याज या लाभांश (Yield) नहीं मिलता इसलिए ब्याज दरें बढ़ने की आशंका से निवेशक सोने से पैसा निकालकर सरकारी बॉन्ड (Treasury Bonds) जैसे ब्याज देने वाले साधनों में लगाने लगते हैं।
ख – अमेरिकी डॉलर इंडेक्स और बॉन्ड यील्ड में जोरदार उछाल
वैश्विक बाजार में जब भी अमेरिकी डॉलर मजबूत होता है तब अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर में ट्रेड होने वाली कमोडिटीज जैसे सोने और चांदी की कीमतें नीचे आती हैं। मजबूत डॉलर के कारण अन्य मुद्राओं जैसे भारतीय रुपया का उपयोग करने वाले खरीदारों के लिए सोना खरीदना महंगा हो जाता है जिससे वैश्विक मांग में कमी आती है। पिछले सप्ताह अमेरिकी डॉलर इंडेक्स दो महीने के उच्च स्तर पर पहुंच गया और अमेरिकी 10-वर्षीय ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड भी बढ़कर 4.5% के पार निकल गई। इस दोहरे दबाव के कारण निवेशकों ने सोने-चांदी में जमकर मुनाफावसूली की।
ग – कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और मुद्रास्फीति की चिंता
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में आपूर्ति बाधित होने की आशंका के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं। तेल की बढ़ती कीमतों ने वैश्विक स्तर पर मुद्रास्फीति (Inflation) के दोबारा उभरने का डर पैदा कर दिया है। इसी महंगाई को नियंत्रित करने के लिए केंद्रीय बैंकों द्वारा सख्त रुख अपनाने की आशंका ने सराफा बाज़ार पर बिकवाली का भारी दबाव बनाया।
घ – निवेशकों द्वारा ‘मार्जिन कॉल’ और लिक्विडेशन (बिकवाली)
अंतरराष्ट्रीय बाजारों में हुई उथल-पुथल के कारण कई बड़े संस्थागत निवेशकों (Institutional Investors) को अन्य वित्तीय परिसंपत्तियों (Asset Classes) में हुए नुकसान की भरपाई या मार्जिन आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए नकदी की जरूरत थी। ऐसे में निवेशकों ने अपने मुनाफे वाले सोने और चांदी के बड़े पोर्टफोलियो को बेचकर नकदी जुटाई (Margin Liquidation) जिससे बाजार में अचानक भारी मात्रा में बिकवाली आ गई।
ङ – तकनीकी स्तरों का टूटना (Technical Breakdown)
वैश्विक कमोडिटी बाजारों में स्पॉट गोल्ड और स्पॉट सिल्वर ने अपने कई महत्वपूर्ण सपोर्ट लेवल्स जैसे 200-डे मूविंग एवरेज को नीचे की ओर तोड़ दिया। तकनीकी विश्लेषकों और एल्गोरिथमिक ट्रेडिंग सिस्टम्स ने इन स्तरों के टूटते ही ऑटोमैटिक बिकवाली (Stop-Loss Trigger) शुरू कर दी जिसने सोने और चांदी की कीमतों की गिरावट की रफ्तार को और अधिक तेज कर दिया।
Gold-Silver Prices- मार्च 2026 के आखिरी हफ्ते में भारतीय सराफा बाजार म
भारतीय बाजारों पर असर और वर्तमान स्थिति
इस वैश्विक उथल-पुथल का सीधा असर भारतीय वायदा बाजार (MCX) और हाजिर बाजारों में देखने को मिला
- सोना (Gold)- भारतीय सराफा बाज़ार में शुद्ध 24 कैरेट सोने की कीमतें जो हाल ही में अपने सर्वोच्च शिखर पर थीं तेजी से गिरकर ₹1,49,000 प्रति 10 ग्राम के दायरे में आ गईं। 10 ग्राम सोने में करीब ₹5,500 तक की साप्ताहिक गिरावट दर्ज की गई।
- चांदी (Silver)- चांदी में सोने की तुलना में और भी अधिक अस्थिरता देखी गई। चांदी की कीमतें प्रति किलोग्राम ₹13,000 से अधिक टूटकर ₹2,40,000 के आसपास कारोबार करती देखी गईं।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि अल्पकालिक (Short-term) रूप से बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है लेकिन लंबी अवधि के लिए केंद्रीय बैंकों द्वारा की जा रही सोने की भौतिक खरीदारी और वैश्विक अनिश्चितता जैसे मजबूत कारक अभी भी सोने को नीचे के स्तरों पर सपोर्ट प्रदान करेंगे।
घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सोने-चांदी की कीमतों में आई यह भारी गिरावट मुख्य रूप से अमेरिकी फेडरल रिजर्व की सख्त नीतियों, मजबूत डॉलर, बढ़ती बॉन्ड यील्ड और वैश्विक स्तर पर मची उठापटक के कारण बड़े निवेशकों द्वारा की गई भारी मुनाफावसूली का परिणाम है। हालांकि यह ऐतिहासिक गिरावट अल्पावधि के लिए बाजार सुधार (Market Correction) का हिस्सा है जो नए खरीदारों और दीर्घकालिक निवेशकों के लिए निचले स्तरों पर खरीदारी का एक बेहतरीन अवसर भी साबित हो सकती है।







