अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चले आ रहे भू-राजनीतिक (geopolitical) तनाव के खत्म होने की खबरों ने वैश्विक वित्तीय बाजारों सहित भारतीय शेयर बाजार (Dalal Street) में जबरदस्त उत्साह का संचार किया है। जिनेवा में आगामी दिनों में होने वाले इस ऐतिहासिक समझौते की रूपरेखा तैयार होने की खबर जैसे ही सोमवार को बाजार में आई भारतीय शेयर बाजार खुलते ही रॉकेट बन गया।
सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ही प्रमुख सूचकांकों (indices) ने आज शुरुआती कारोबार में ही लंबी छलांग लगाई। बीएसई सेंसेक्स (BSE Sensex) 1100 से अधिक अंकों की भारी तेजी के साथ 76,635 अंक के स्तर पर कारोबार करता देखा गया। वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी (NSE Nifty) भी लगभग 330 अंकों की बढ़त लेकर 23,950 अंक के बेहद मजबूत स्तर पर पहुंच गया। इस जादुई तेजी ने निवेशकों की संपत्ति में लाखों करोड़ रुपये का इजाफा कर दिया है।
बाजार में इस ऐतिहासिक तेजी के मुख्य कारण
भारतीय बाजार की इस चौतरफा तेजी के पीछे मुख्य रूप से वैश्विक परिस्थितियों में आया सकारात्मक बदलाव है। प्रमुख कारणों को नीचे दिए गए बिंदुओं के माध्यम से समझा जा सकता है
RBI के फैसले के बाद शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव- सेंसेक्स और निफ्टी में आई गिरावट
कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में भारी गिरावट
भारत अपनी जरूरत का लगभग 80-85% कच्चा तेल विदेशों से आयात (import) करता है। अमेरिका-ईरान समझौते की खबरों के बाद ब्रेंट क्रूड की कीमतों में 4% से अधिक की बड़ी गिरावट दर्ज की गई जिससे यह 84 डॉलर प्रति बैरल के पास आ गया। कच्चा तेल सस्ता होने से भारत का चालू खाता घाटा (Current Account Deficit) कम होता है और घरेलू स्तर पर महंगाई की चिंताएं दूर होती हैं जो सीधे तौर पर कॉर्पोरेट मुनाफे को बढ़ावा देती हैं।
हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) का फिर से खुलना
वैश्विक व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जाने वाले इस समुद्री रास्ते के पूरी तरह सुरक्षित और सुचारू होने की उम्मीद बढ़ गई है। इससे वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) में आ रही बाधाएं दूर होंगी जिससे भारतीय निर्यातकों और लॉजिस्टिक्स कंपनियों को सीधा फायदा मिलेगा।
वैश्विक बाजारों से मिले सकारात्मक संकेत
अमेरिका-ईरान के बीच युद्ध की आशंका टलने से न केवल भारत बल्कि पूरे एशिया-पैसिफिक क्षेत्र के बाजारों में दिवाली जैसा माहौल रहा। जापान का निक्केई (Nikkei) और दक्षिण कोरिया का कोस्पी (Kospi) भी 3 से 4% की भारी बढ़त के साथ कारोबार कर रहे थे जिसने घरेलू संस्थागत और विदेशी निवेशकों के हौसलों को सातवें आसमान पर पहुंचा दिया।
आज के टॉप गेनर्स और टॉप लूजर्स (Top Gainers & Top Losers)
बाजार में आई इस सुनामी जैसी तेजी के बीच कुछ दिग्गज कंपनियों के शेयरों ने शानदार प्रदर्शन किया तो वहीं कुछ पर मामूली दबाव भी देखा गया।
टॉप गेनर्स कंपनियां (Top Gainers)
- रिलायंस इंडस्ट्रीज (RIL)- जियो प्लेटफॉर्म्स द्वारा वैश्विक पेटेंट फाइलिंग में टॉप-20 में जगह बनाने और कच्चे तेल के मार्जिन में सुधार की उम्मीद से शेयर में सबसे ज्यादा रौनक रही।
- एचडीएफसी बैंक (HDFC Bank) और आईसीआईसीआई बैंक (ICICI Bank)- बैंकिंग क्षेत्र के इन दिग्गजों ने बाजार को ऊपर खींचने में सबसे बड़ी भूमिका निभाई।
- महिंद्रा एंड महिंद्रा (M&M)- ऑटो सेक्टर में मजबूत मांग के चलते निवेशकों ने इसमें जमकर लिवाली की।
- लार्सन एंड टुब्रो (L&T)- वैश्विक स्तर पर बुनियादी ढांचे (infrastructure) के काम तेज होने की उम्मीद से इस शेयर को पंख लग गए।
टॉप लूजर्स कंपनियां (Top Losers)
चूंकि आज बाजार में चौतरफा खरीदारी (broad-based buying) का माहौल है इसलिए नुकसान में रहने वाले शेयरों की संख्या बेहद सीमित है। फिर भी कुछ सेक्टर्स में मामूली मुनाफावसूली देखी गई-
- डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज (Dr. Reddy’s)- फार्मा सेक्टर में सुरक्षात्मक दांव (defensive bets) से पैसा निकलकर सेक्टोरल रोटेशन के कारण इसमें मामूली गिरावट रही।
- गोल्ड लोन कंपनियां- वैश्विक तनाव कम होने से सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की कीमतों में गिरावट आई, जिसका असर मणप्पुरम और मुथूट जैसी कंपनियों पर हल्का सा दिखा।
किस सेक्टर में देखी गई सबसे ज्यादा खरीदारी?
आज के कारोबार में निवेशकों का पसंदीदा दांव हाई-बीटा (high-beta) और सीधे तौर पर अर्थव्यवस्था से जुड़े सेक्टर्स पर रहा।
| सेक्टर (Sector) | खरीदारी का मुख्य कारण |
| ऑटो और मैन्युफैक्चरिंग | कच्चा तेल और कमोडिटी की कीमतें घटने से इन कंपनियों की इनपुट कॉस्ट (लागत) कम होगी, जिससे इनका मार्जिन बढ़ेगा। |
| बैंकिंग और वित्तीय सेवाएं (Bank Nifty) | बाजार में लिक्विडिटी (नकदी) बढ़ने और भारतीय अर्थव्यवस्था की विकास दर मजबूत रहने के भरोसे से बैंकिंग स्टॉक्स में बंपर वॉल्यूम देखा गया। |
| ऊर्जा और तेल-गैस (Energy & Oil) | ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) को कच्चा तेल सस्ता होने का सीधा फायदा मिलने की उम्मीद में सबसे ज्यादा खरीदारी इसी पॉकेट में हुई। |
अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता और कूटनीतिक जीत ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को एक बड़ी अनिश्चितता से बाहर निकाल लिया है। भारतीय बाजार ने इस खबर का स्वागत रिकॉर्ड बढ़त के साथ किया है। कच्चे तेल के मोर्चे पर राहत और डॉलर इंडेक्स के कमजोर होने से भारतीय रुपया मजबूत हुआ है जिससे आने वाले दिनों में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) की तरफ से भारतीय बाजारों में पूंजी का प्रवाह (capital inflow) और तेज होने की पूरी संभावना है।
नोट- शेयर बाजार में निवेश भू-राजनीतिक हालातों, वैश्विक संकेतों और बाजार के जोखिमों के अधीन है। हालांकि वर्तमान सेंटीमेंट बेहद सकारात्मक हैं लेकिन निवेशकों को किसी भी शेयर में पैसा लगाने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श अवश्य लेना चाहिए।







