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विदेशी मुद्रा भंडार में फिर आया उछाल 682.32 अरब डॉलर पर पहुंचा देश का खजाना

विदेशी मुद्रा भंडार में फिर आया उछाल 682.32 अरब डॉलर पर पहुंचा देश का खजाना
नवजोत कौर सिद्धू
On: जून 8, 2026 1:11 अपराह्न
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नई दिल्ली। दुनिया भर के बाजारों में मची उथल-पुथल और आर्थिक मोर्चे पर जारी अनिश्चितता के बीच भारत के लिए एक बहुत अच्छी और राहत देने वाली खबर आई है। पिछले दो हफ्तों से देश के विदेशी मुद्रा भंडार में जो गिरावट देखने को मिल रही थी, उस पर अब ब्रेक लग गया है। भारतीय रिजर्व बैंक की तरफ से जारी ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, 29 मई को समाप्त हुए सप्ताह में देश का विदेशी मुद्रा भंडार 93.8 करोड़ डॉलर की छलांग लगाकर 682.32 अरब डॉलर के स्तर पर जा पहुंचा है। इस सुधार को भारतीय अर्थव्यवस्था की सेहत और साख के लिहाज से एक बड़ा और सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों में आई तेजी बनी टर्निंग पॉइंट

अगर रिज़र्व बैंक के आंकड़ों को थोड़ा बारीक नजरिए से देखें, तो साफ समझ आता है कि इस बार विदेशी मुद्रा भंडार को बढ़ाने में सबसे बड़ा हाथ विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों में आई मजबूती का रहा है। मालूम हो कि विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियां ही किसी भी देश के कुल भंडार का सबसे बड़ा हिस्सा होती हैं। इसके भीतर अमेरिकी डॉलर के अलावा दुनिया की अन्य प्रमुख अंतरराष्ट्रीय मुद्राएं जैसे यूरो, ब्रिटिश पाउंड और जापानी येन में रखी गई संपत्तियां शामिल होती हैं।बाजार के जानकारों और आर्थिक विश्लेषकों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय करेंसी मार्केट में हाल ही में हुए बदलावों और भारतीय बाजारों में विदेशी निवेशकों के दोबारा लौटते भरोसे के चलते इन संपत्तियों के मूल्य में यह उछाल देखने को मिला है। इसी का सीधा फायदा देश के कुल खजाने की बढ़ोतरी के रूप में सामने आया है, जिसने पिछले दो हफ्तों के घाटे की भरपाई कर दी।

सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव से स्वर्ण भंडार पर पड़ा हल्का असर

एक तरफ जहां विदेशी करेंसी से जुड़ी संपत्तियों में मजबूती आई, वहीं दूसरी तरफ रिजर्व बैंक की तिजोरी के कुछ अन्य हिस्सों में आंशिक कमी भी दर्ज की गई है। इस दौरान विशेष रूप से भारत के स्वर्ण भंडार के कुल मूल्य में मामूली गिरावट देखी गई। आर्थिक विश्लेषकों के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय सराफा बाजार में सोने की कीमतों में लगातार हो रहे उतार-चढ़ाव के कारण इसके कुल मूल्यांकन पर थोड़ा असर पड़ा है।हालांकि, राहत की बात यह रही कि सोने के मूल्य में हुई इस मामूली कमी का कुल भंडार पर कोई बड़ा या नकारात्मक असर नहीं पड़ा। विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों में हुई दमदार बढ़ोतरी ने इस कमी को पूरी तरह से दबा दिया और देश के कुल विदेशी मुद्रा भंडार को 682.32 अरब डॉलर के एक बेहद मजबूत और सुरक्षित स्तर पर लाकर खड़ा कर दिया।

वैश्विक तनाव के बीच ढाल बना भारत का सुरक्षित खजाना

वर्तमान में दुनिया के कई हिस्सों में गंभीर भू-राजनीतिक तनाव और युद्ध जैसी स्थितियां बनी हुई हैं। इसके साथ ही वैश्विक व्यापारिक नीतियां भी अनिश्चितताओं से घिरी हैं और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय बाजारों में लगातार उथल-पुथल मची है। ऐसे चुनौतीपूर्ण समय में भी भारत का विदेशी मुद्रा भंडार लगातार मजबूत स्थिति में बना हुआ है। बड़े अर्थशास्त्रियों का मानना है कि यह मजबूत वित्तीय बैकअप भारत को किसी भी तरह के बाहरी आर्थिक झटकों या वैश्विक मंदी के खतरों का डटकर सामना करने की ताकत देता है।इसके अलावा, जब किसी देश का विदेशी मुद्रा भंडार इस तरह के संतोषजनक स्तर पर होता है, तो अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उसकी रेटिंग सुधरती है और विदेशी कंपनियों का भरोसा भी देश पर कई गुना बढ़ जाता है। 

रुपये को टूटने से बचाने में रिजर्व बैंक को मिलेगी अतिरिक्त ताकत

विदेशी मुद्रा भंडार का एक सबसे व्यावहारिक और सीधा फायदा घरेलू मुद्रा यानी रुपये की कीमत को संभालने में होता है। वैश्विक उतार-चढ़ाव या डॉलर की मजबूती के चलते जब भी रुपये पर दबाव बढ़ता है और उसमें बड़ी गिरावट की आशंका होती है, तब केंद्रीय बैंक अपने इसी भंडार के दम पर विदेशी मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप करता है। वह खुले बाजार में डॉलर बेचकर स्थिति को नियंत्रित करता है ताकि रुपये की वैल्यू ज्यादा न गिरे।पिछले कुछ समय से वैश्विक परिस्थितियों और कच्चे तेल की कीमतों के कारण रुपये पर लगातार दबाव देखा गया है। ऐसे समय में विदेशी मुद्रा भंडार में दर्ज की गई यह ताजा बढ़ोतरी आरबीआई को बाजार में दखल देने के लिए अतिरिक्त संसाधन और ताकत प्रदान करेगी। इससे रुपये में होने वाले अत्यधिक उतार-चढ़ाव को रोकने और उसे एक दायरे में स्थिर रखने में मदद मिलेगी।

आने वाले दिनों में और बेहतर सुधार की उम्मीदें बरकरार

आर्थिक मामलों के जानकारों को उम्मीद है कि यदि देश में विदेशी निवेश का यह प्रवाह इसी तरह बना रहता है, आगामी तिमाहियों में देश के निर्यात क्षेत्र में सुधार होता है और वैश्विक परिस्थितियां बहुत ज्यादा प्रतिकूल नहीं होती हैं, तो आने वाले महीनों में विदेशी मुद्रा भंडार के नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने की पूरी संभावना है।भारत इस समय दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती हुई प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शीर्ष पर बना हुआ है। ऐसे में, यह मजबूत होता विदेशी मुद्रा भंडार देश की आर्थिक विकास दर को रफ्तार देने और घरेलू स्तर पर औद्योगिक गतिविधियों को नई ऊर्जा प्रदान करने में एक अहम और दूरगामी भूमिका निभाएगा।

Dr Pankaj Sharma

fitness coach and writer mainly work on sports, fitness, Religious, foreign news, and technology

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