मुंबई। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और युद्ध के हालातों का असर अब भारतीय अर्थव्यवस्था पर भी साफ दिखने लगा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की आसमान छूती कीमतों और डॉलर के मुकाबले रुपये पर बनते दबाव के बीच केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने देशवासियों से एक बेहद महत्वपूर्ण अपील की है। उन्होंने साफ कहा कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए इस समय देश को तीन खास चीजों पर सबसे ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है, जिन्हें हम फ्यूल (ईंधन), फर्टिलाइजर (खाद) और फॉरेक्स (विदेशी मुद्रा) कह सकते हैं।
वित्त मंत्री ने आगाह किया कि अगर समय रहते इन मोर्चों पर सावधानी नहीं बरती गई, तो आने वाले दिनों में देश के सामने बड़ी आर्थिक चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं।मुंबई में सिडबी के एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि जिस तेजी से बदल रहे हैं, उसमें भारत को बहुत संभलकर कदम रखना होगा। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उस हालिया अपील का भी पुरजोर समर्थन किया, जिसमें देश की जनता से ईंधन की बर्बादी रोकने और जरूरत से ज्यादा सोना नहीं खरीदने का आग्रह किया गया था। उन्होंने कहा कि सरकार का मकसद देश में कोई डर या घबराहट पैदा करना नहीं है, बल्कि आने वाले संकट के प्रति लोगों को समय रहते सावधान करना है ।
तेल की कीमतों से बढ़ी चिंता
पश्चिम एशिया के संकट ने वैश्विक तेल बाजार में भारी खलबली मचा दी है। भारत अपनी जरूरत का तकरीबन अस्सी फीसदी से ज्यादा कच्चा तेल विदेशों से खरीदता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में होने वाली जरा सी भी बढ़ोतरी सीधे देश के आयात बिल को भारी भरकम बना देती है। घरेलू बाजार में भी इसका असर अब धीरे-धीरे दिखने लगा है और देश के कई शहरों में पेट्रोल और डीजल की कीमतें ऊपर भागने लगी हैं।आर्थिक जानकारों का मानना है कि यदि कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक इसी तरह ऊंचे स्तर पर बनी रहीं, तो इसका सीधा असर माल ढुलाई और परिवहन पर पड़ेगा। इससे आम आदमी की जेब पर महंगाई की मार और ज्यादा बढ़ सकती है।
सरकार के लिए इस समय सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वह घरेलू बाजार में तेल की कीमतों को नियंत्रण में रखे ताकि आम जनता को इस वैश्विक उठापटक का सीधा नुकसान न उठाना पड़े और बाजार में जरूरी चीजों के दाम न बढ़ें।
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सोने के आयात और विदेशी मुद्रा पर पैनी नजर
कच्चे तेल के बाद भारत के खजाने पर सबसे बड़ा बोझ सोने का आयात डालता है। वित्त मंत्री ने इस बात को विशेष रूप से रेखांकित किया कि भारी मात्रा में सोना बाहर से मंगाने के कारण देश का कीमती विदेशी मुद्रा भंडार तेजी से खर्च होता है। लिहाजा, मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए उन्होंने जनता को भरोसा दिलाया कि देश का विदेशी मुद्रा भंडार वर्तमान में काफी मजबूत स्थिति में है और हमारी आर्थिक बुनियादी स्थिति पूरी तरह सुरक्षित है, लेकिन संकट के समय एहतियात बरतना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी बन जाती है। विदेशी मुद्रा को बचाना इस समय देश के व्यापक आर्थिक हितों की रक्षा के लिए बेहद जरूरी है और इसमें आम नागरिकों का सहयोग बहुत मायने रखता है।देशहित में यही बेहतर होगा कि लोग निवेश या शादियों के इस मौसम में जरूरत के मुताबिक ही सोने की खरीदारी करें और अनावश्यक खर्चों से बचें।
छोटे उद्योगों को संकट से बचाने की तैयारी
वैश्विक उथल-पुथल के बीच देश के छोटे और मझोले उद्योगों को लेकर भी सरकार पूरी तरह गंभीर नजर आ रही है। वित्त मंत्री ने इस बात को स्वीकार किया कि किसी भी अंतरराष्ट्रीय संकट की सबसे पहली और सीधी मार छोटे कारोबारियों पर ही पड़ती है, क्योंकि उनके पास बड़े कॉरपोरेट घरानों की तरह वित्तीय बैकअप या बड़ा फंड नहीं होता है।सरकार एमएसएमई क्षेत्र को भारतीय अर्थव्यवस्था की असली रीढ़ मानती है, जो देश में करोड़ों लोगों को रोजगार देता है। इसलिए, छोटे उद्योगों को इस मंदी और वैश्विक संकट के असर से बचाने के लिए सरकार विशेष आर्थिक मदद, आसान शर्तों पर लोन और नीतिगत राहत देने की एक व्यापक कार्ययोजना पर काम कर रही है।
महंगाई के मुद्दे पर सियासत भी गरमाई
एक तरफ जहां सरकार बाजार को संभालने और सावधानी बरतने की बात कह रही है, वहीं विपक्ष ने महंगाई और ईंधन की बढ़ती कीमतों को लेकर केंद्र सरकार पर तीखे हमले शुरू कर दिए हैं। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि आम जनता पहले ही कमरतोड़ महंगाई और बेरोजगारी से त्रस्त है, ऐसे में पेट्रोल-डीजल के बढ़ते दाम उनकी बची-खुची मुश्किलें भी और ज्यादा बढ़ा देंगे। विपक्ष का आरोप है कि सरकार वैश्विक संकट का बहाना बनाकर अपनी आर्थिक नाकामियों को छुपाने की कोशिश कर रही है।
इसी बीच केंद्र सरकार ने साफ किया है कि यह संकट किसी एक देश का पैदा किया हुआ नहीं है, बल्कि पूरी दुनिया इस समय अनिश्चितता के दौर से गुजर रही है। सरकार का दावा है कि देश के भीतर ईंधन या किसी भी अन्य जरूरी सामान की किल्लत बिल्कुल नहीं होने दी जाएगी। सरकार हर मोर्चे पर नजर बनाए हुए है और स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है, इसलिए आम जनता को घबराने की कोई जरूरत नहीं है।







