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अमेरिकी कंपनियों की ‘धमकी’ ‘US लौटो वरना जाएगी जॉब’

अमेरिकी कंपनियों की 'धमकी' 'US लौटो वरना जाएगी जॉब'
नवजोत कौर सिद्धू
On: जनवरी 16, 2026 4:04 अपराह्न
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ऐसे बहुत से भारतीय है जो US जैसे तमाम देशों में कार्यरत है, लेकिन हाल ही नें अमरिका द्वारा नीति में किये बदलाव के बाद अब यहां काम करनें वालों कि मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही है। तो पहले आपको बताते हैं कि H-1B Visa क्या है और क्यों महत्वपूर्ण है। दरअसल H-1B वीज़ा एक नॉन-इमिग्रेंट वर्क वीज़ा है, जिसके ज़रिए अमेरिकी कंपनियाँ विदेशी कुशल कर्मियों को अस्थायी रूप से नौकरी पर रख सकती हैं। खासकर इंजीनियरिंग, आईटी,  अनुसंधान और तकनीकी क्षेत्रों में यह वीज़ा बेहद लोकप्रिय है। 

हर साल लगभग 85 हजार H-1B वीज़ा जारी किए जाते हैं, जिनमें भारत के नागरिकों का हिस्सा अधिकतम यानें कि लगभग 70 प्रतिशत तक होता है। लेकिन 2025-26 में नीति में आए बदलावों और इमिग्रेशन प्रक्रियाओं में देरी के कारण H-1B वीज़ा धारकों के लिए मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं, और अब कई भारतीय पेशेवर “फंसे” हुए हैं। जिससे उनके रोजगार हल्का जोखिम में है।

भारत में फंसे H-1B वर्कर्स,  अमेरिका लौटने या नौकरी खोने का दबाव

वीज़ा अप्रूवल और स्टैम्पिंग में देरी

दिसंबर 2025 से अमेरिकी दूतावास ने वीज़ा जारी करने की प्रक्रिया में सोशल मीडिया चेकिंग लागू कर दी है, जिससे H-1B वीज़ा अपॉइंटमेंट बहुत पीछे की तारीखों (मार्च-अप्रैल 2026) तक स्थगित हो गई है। इसके कारण हजारों H-1B धारक अपने वीज़ा रिन्यूअल के लिए भारत आ चुके हैं लेकिन अब फंस गए हैं। 

कंपनियों का दबाव, वापस आओ या नौकरी खो दो

कुछ अमेरिकी कंपनियाँ विशेषकर मध्यम और छोटी कंपनियाँ / स्टार्टअप्स अब इन कर्मचारियों पर दबाव बना रही हैं कि वह जल्द से अमेरिका लौटें, नहीं तो उन्हें नौकरी से निकाल दिया जाएगा। यह स्थिति उन लोगों के लिए भारी चिंता का कारण बन गई है जो परिवार और जीवन की स्थिरता के लिए संघर्ष कर रहे हैं। 

कर्ज, टैक्स जोखिम के साथ नौकरी का ख़तरा

H-1B धारक अगर 182 दिनों से अधिक भारत में रुके रहते हैं, तो उन्हें अमेरिकी इनकम टैक्स नियमों के तहत भी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है, और कंपनियाँ वीज़ा प्रक्रिया में देरी के कारण कर्मचारियों को नौकरी से निकालने या चेतावनी देने लगी हैं। 

H-1B प्रोसेसिंग में देरी और सोशल मीडिया जांच

वीज़ा अपॉइंटमेंट रद्द और पोस्टपोन

दूतावासों ने दिसंबर 2025 के आसपास कई H-1B वर्कर्स के वीज़ा इंटरव्यू ख़त्म कर दिए, या उन्हें महीनों बाद की तारीखों पर पुनर्निर्धारित कर दिया। इससे वे अपने कार्यस्थल अमेरिका नहीं पहुँच पा रहे हैं और उनकी करियर योजनाएँ रुक गई हैं। 

सोशल मीडिया निगरानी की नई नीति

संयुक्त राज्य ने वीज़ा जारी करते समय आवेदकों के सोशल मीडिया प्रोफाइल की जांच भी शुरू कर दी है, जिससे कई H-1B अभियार्थी समस्या में पड़ गए हैं। नियुक्तियों में देरी, अतिरिक्त सुरक्षा जांच और प्रक्रिया के लम्बे समय तक चलने जैसे परिणाम सामने आए हैं। 

ट्रंप प्रशासन और H-1B वीज़ा नियमों में कठोरता

$100,000 H-1B फीस प्रस्ताव

2025 में अमेरिकी प्रशासन ने H-1B वीज़ा पर बहुत बड़ा प्रस्ताव रखा है, नये H-1B वीज़ा के लिए $100,000 (लगभग ₹88 लाख) वार्षिक फीस लगाई जाए। इस फैसले को “वीज़ा बम” कहा गया और इससे IT और अन्य तकनीकी कंपनियों में चिंता फैल गई। हालाँकि बाद में प्रशासन ने स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि यह केंद्रित रूप से नए आवेदन पर लागू होगा, और वर्तमान वीज़ा धारकों पर तत्काल प्रभाव नहीं पड़ेगा। 

लॉटरी चुनाव और चयन प्रक्रिया का प्रस्तावित बदलाव

साथ ही, लॉटरी प्रणाली को बदलकर ज्यादा वेतन वाले आवेदकों को प्राथमिकता देने जैसे सुझाव भी दिए गए हैं। यदि लागू होता है, तो इस नीति से भी अनुभवी H-1B प्रोफेशनल्स को फायदा या नुकसान हो सकता है। 

भारतीय IT पेशेवरों पर व्यापक प्रभाव, रोज़गार की अनिश्चितता और वापसी की सोच

एक सर्वे में पाया गया कि अगर Indian H-1B धारकों को मजबूर होकर बाहर जाना पड़े, तो लगभग 45% वापस भारत लौटने को तैयार हैं, जबकि कुछ अन्य देशों में रोजगार तलाशने पर विचार कर रहे हैं। 

नियोक्ता रणनीति में बदलाव

कुछ बड़े नियोक्ता खासकर टैटा Consultancy Services जैसे भी H-1B भर्ती में कटौती की योजना में हैं, ऐसे संकेत मिले हैं कि कंपनियाँ स्थानीय भर्ती और ऑफशोर मॉडल पर ज्यादा निर्भर होंगी। 

नागरिकों के प्रति शत्रुता और सामाजिक प्रतिक्रिया

कुछ रिपोर्टों में अमेरिकी आंतरिक माहौल में भारतीय पेशेवरों के प्रति नकारात्मकता/हेट टिप्पणियों में इज़ाफ़ा भी देखने को मिला है, जो H-1B नीति परिवर्तनों के बाद उभरा है। 

आर्थिक और बाजार प्रभाव

भारतीय IT शेयरों पर असर

H-1B वीज़ा में बदलाव और फीस बढ़ोतरी की खबरों से भारतीय IT शेयरों जैसे TCS, Infosys, HCLTech आदि में गिरावट का असर देखा गया है, क्योंकि निवेशकों ने अमेरिका की नीति कड़ी करने को नकारात्मक संकेत माना। 

टैक्स और जीवन लागत का बदलाव

H-1B धारकों पर टैक्स नियमों का प्रभाव और कम वीज़ा प्रक्रिया समय के कारण कंपनियों को कर्मचारियों की तैनाती और लागत पर पुनर्विचार करना पड़ रहा है।

वीज़ा प्रक्रिया का निराकरण और संभावित राहत

नये USCIS स्पष्टीकरण और राहत

USCIS ने बताया कि $100,000 फीस केवल नए आवेदन पर लगेगी और वर्तमान धारकों पर तत्काल प्रभाव नहीं डालेगी, जिससे कुछ हद तक तनाव कम हुआ है। 

अन्य प्रस्ताव और संभावनाएँ

कुछ प्रस्तावों में H-1B धारकों को नौकरी खोने के बाद 180 दिनों की ग्रेस पीरियड देने का सुझाव भी अब तक चर्चा में रहा है, जिससे उन्हें नया रोजगार ढूंढने में आसानी मिल सकती है (हालांकि यह अभी तक आधिकारिक नहीं हुआ)। 

अमेरिका के H-1B वीज़ा कार्यक्रम पर 2025-26 में आए बदलावों ने न केवल वीज़ा प्रोसेसिंग और नीति ढांचे को प्रभावित किया है, बल्कि हज़ारों भारतीय पेशेवरों के जीवन, करियर और रोजगार स्थिरता को भी चुनौती दी है बल्कि भारत में फंसे H-1B वर्कर्स को अमेरिका लौटने या नौकरी छोड़ने की चेतावनी जैसी खबरें, प्रशासनिक देरी, सोशल मीडिया जांच और फीस परिवर्तन ने एक अनिश्चित माहौल बना दिया है,जहां श्रमिकों और नियोक्ताओं दोनों को नए नियमों के अनुरूप खड़े रहने की ज़रूरत है।

Dr Pankaj Sharma

fitness coach and writer mainly work on sports, fitness, Religious, foreign news, and technology

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