अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) के टैरिफ आयात शुल्क संबंधी फैसलों को रद्द किए जाने और उसके तुरंत बाद ट्रंप द्वारा 10% का नया ग्लोबल टैरिफ लगाने का निर्णय वैश्विक अर्थव्यवस्था और कानून की दृष्टि से एक अत्यंत महत्वपूर्ण घटना है।
डोनाल्ड ट्रंप का नया ग्लोबल टैरिफ (Global Tariff) – सुप्रीम कोर्ट के झटके से नए आर्थिक युद्ध तक
20 फरवरी 2026 को अमेरिकी न्यायिक इतिहास और वैश्विक व्यापार में एक बड़ा मोड़ आया। अमेरिका के उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए व्यापक टैरिफ को असंवैधानिक घोषित करते हुए उसे पूरी तरह से रद्द कर दिया। लेकिन इस हार को स्वीकार करने के बजाय अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने तीन ही घंटों के भीतर Section 122 (Trade Act of 1974) का उपयोग करते हुए पूरी दुनिया पर 10% का नया ‘ग्लोबल बेसलाइन टैरिफ’ लगाने की घोषणा कर दी।
सुप्रीम कोर्ट का फैसला क्या था?
ट्रंप प्रशासन ने 2025 में कार्यभार संभालते ही International Emergency Economic Powers Act (IEEPA) का उपयोग करके कई देशों पर भारी टैरिफ लगा दिए थे। उनका तर्क था कि अमेरिका का बढ़ता व्यापार घाटा एक “राष्ट्रीय आपातकाल” (National Emergency) है।
सुप्रीम कोर्ट ने 6-3 के बहुमत से यह व्यवस्था दी कि-
- संसद की शक्ति – संविधान के अनुसार, टैक्स लगाने और व्यापार को नियंत्रित करने की शक्ति विशेष रूप से कांग्रेस (अमेरिकी संसद) के पास है।
- आपातकालीन शक्तियों का दुरुपयोग – कोर्ट ने कहा कि IEEPA राष्ट्रपति को व्यापारिक वस्तुओं पर अनिश्चितकाल के लिए टैरिफ लगाने का अधिकार नहीं देता।
- ऐतिहासिक मिसाल – मुख्य न्यायाधीश जॉन रॉबर्ट्स ने अपने फैसले में लिखा कि “राष्ट्रपति को केवल शब्दों के आधार पर असीमित शक्तियां नहीं दी जा सकतीं।”
इस फैसले के बाद यह संभावना बन गई कि अमेरिका को कंपनियों से वसूले गए अरबों डॉलर के टैरिफ वापस लौटाने पड़ सकते हैं।
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Donald Trump की तत्काल प्रतिक्रिया: 10% नया ग्लोबल टैरिफ (Global Tariff)
अदालत के फैसले से नाराज ट्रंप ने इसे “देश के लिए अपमानजनक” बताया। उन्होंने तुरंत अपनी कार्यकारी शक्तियों का इस्तेमाल किया और एक नई घोषणा पर हस्ताक्षर किए
- 10% का समान शुल्क- अब अमेरिका आने वाले लगभग हर सामान पर 10% का अतिरिक्त टैक्स लगेगा।
- कानूनी आधार – इस बार ट्रंप ने IEEPA के बजाय Section 122 का सहारा लिया है। यह कानून राष्ट्रपति को 150 दिनों तक के लिए अस्थायी रूप से (अधिकतम 15%) टैरिफ लगाने की अनुमति देता है यदि देश के भुगतान संतुलन (Balance of Payments) में गंभीर समस्या हो।
- प्रभावी तिथि – यह नया टैरिफ 24 फरवरी 2026 से लागू होने जा रहा है।
भारत पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा?
भारत के लिए यह खबर मिली-जुली रही है:
- राहत – पहले भारत पर कुछ वस्तुओं पर 18% या उससे अधिक के ‘रेसिप्रोकल टैरिफ’ लगने की तलवार लटक रही थी। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद वे पुराने भारी टैक्स रद्द हो गए हैं।
- नया बोझ – अब भारत से अमेरिका जाने वाले सभी सामानों पर 10% का फ्लैट टैक्स लगेगा। हालांकि, कुछ रिपोर्टों के अनुसार, भारत और अमेरिका के बीच चल रही व्यापारिक वार्ताओं के कारण भारत को कुछ विशेष छूट मिल सकती है, लेकिन फिलहाल 10% का नियम लागू है।
वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर
ट्रंप के इस कदम से दुनिया भर में खलबली मच गई है:
- महंगाई में वृद्धि – अमेरिका में जो लोग विदेशी सामान खरीदते हैं, उन्हें अब 10% अधिक कीमत चुकानी होगी, जिससे वहां महंगाई बढ़ सकती है।
- रिटेलिएशन (बदला) – यूरोपीय संघ, चीन और अन्य बड़े देश भी अमेरिकी उत्पादों पर जवाबी टैक्स लगा सकते हैं, जिससे एक पूर्ण ‘ग्लोबल ट्रेड वॉर’ छिड़ सकता है।
- शेयर बाजार में अस्थिरता – अनिश्चितता के कारण वैश्विक बाजारों में उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है।
आगे क्या होगा?
ट्रंप का यह नया 10% टैरिफ केवल 150 दिनों के लिए वैध है। इस दौरान ट्रंप प्रशासन कोशिश करेगा कि वे कांग्रेस (संसद) से स्थायी टैरिफ कानूनों को पास करवा लें या अन्य देशों के साथ ऐसी डील करें जो उनके “अमेरिका फर्स्ट” एजेंडे के अनुकूल हो।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने यह तो साफ कर दिया कि राष्ट्रपति की शक्तियां असीमित नहीं हैं, लेकिन ट्रंप के नए आदेश ने यह भी दिखा दिया कि वे अपने व्यापारिक लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए किसी भी कानूनी रास्ते का उपयोग करने से पीछे नहीं हटेंगे। आने वाले कुछ महीने वैश्विक व्यापार के लिए काफी चुनौतीपूर्ण होने वाले हैं।







