पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के लिए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने अपनी चुनावी बिसात बिछाना शुरू कर दिया है। 19 मार्च 2026 को भाजपा ने उम्मीदवारों की दूसरी सूची जारी की जिसमें 111 निर्वाचन क्षेत्रों के लिए नामों की घोषणा की गई है। इससे पहले पार्टी 144 उम्मीदवारों की पहली सूची जारी कर चुकी थी।
भाजपा की दूसरी सूची – मुख्य आकर्षण (111 उम्मीदवार)
भाजपा की इस दूसरी सूची में अनुभव और नए चेहरों का मिश्रण देखने को मिल रहा है। पार्टी ने कई दिग्गजों को मैदान में उतारा है
- अर्जुन सिंह – पूर्व सांसद अर्जुन सिंह को नोआपाड़ा विधानसभा सीट से उम्मीदवार बनाया गया है। वह बैरकपुर क्षेत्र के कद्दावर नेता माने जाते हैं।
- रूपा गांगुली – पूर्व राज्यसभा सांसद और प्रसिद्ध अभिनेत्री रूपा गांगुली को सोनारपुर दक्षिण से टिकट दिया गया है।
- रेखा पात्रा – संदेशखाली आंदोलन का प्रमुख चेहरा रहीं रेखा पात्रा को हिंगलगंज से उम्मीदवार बनाया गया है।
- निशिथ प्रमाणिक – पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री निशिथ प्रमाणिक को माथाभांगा निर्वाचन क्षेत्र से मैदान में उतारा गया है।
- अधिकारी परिवार का दबदबा – शुभेंदु अधिकारी के छोटे भाई को भी इस सूची में स्थान मिला है जिससे दक्षिण बंगाल में ‘अधिकारी प्रभाव’ को मजबूत करने की कोशिश की गई है।
- अन्य प्रमुख नाम – चोपड़ा से शंकर अधिकारी और टॉलीगंज जैसी हाई-प्रोफाइल सीट से पापिया अधिकारी को टिकट दिया गया है।
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पहली और दूसरी सूची का समीकरण
भाजपा अब तक राज्य की कुल 294 सीटों में से अधिकांश पर उम्मीदवारों की घोषणा कर चुकी है।
- पहली सूची (144 नाम) – इसमें शुभेंदु अधिकारी (भवानीपुर – ममता बनर्जी के खिलाफ संभावित) और दिलीप घोष (खड़गपुर सदर) जैसे बड़े नाम शामिल थे।
- दूसरी सूची (111 नाम) – इस सूची के साथ भाजपा ने लगभग 255 सीटों पर अपने योद्धा तय कर लिए हैं।
| प्रमुख उम्मीदवार | निर्वाचन क्षेत्र | पहचान/विशेषता |
| अर्जुन सिंह | नोआपाड़ा | पूर्व सांसद, उत्तर 24 परगना के मजबूत नेता |
| रूपा गांगुली | सोनारपुर दक्षिण | पूर्व सांसद एवं अभिनेत्री |
| निशिथ प्रमाणिक | माथाभांगा | पूर्व केंद्रीय मंत्री |
| रेखा पात्रा | हिंगलगंज | संदेशखाली विरोध प्रदर्शन का चेहरा |
| नीरज तमांग जिम्बा | दार्जिलिंग | गोरखा |
पश्चिम बंगाल चुनाव 2026 – कार्यक्रम (Schedule)
चुनाव आयोग ने इस बार बंगाल में चरणों की संख्या को पिछले चुनावों (8 चरण) की तुलना में घटाकर केवल दो चरणों में समेट दिया है।
- प्रथम चरण (152 सीटें) – 23 अप्रैल, 2026
- द्वितीय चरण (142 सीटें) – 29 अप्रैल, 2026
- परिणाम (Result) – 4 मई, 2026
महत्वपूर्ण तिथियाँ
- अधिसूचना जारी – 30 मार्च (चरण 1) / 2 अप्रैल (चरण 2)
- नामांकन की अंतिम तिथि – 6 अप्रैल / 9 अप्रैल
- नाम वापसी – 9 अप्रैल / 13 अप्रैल
भाजपा की चुनावी रणनीति और मुद्दे
इस बार भाजपा “सोनार बांग्ला” के संकल्प के साथ-साथ निम्नलिखित प्रमुख मुद्दों पर ध्यान केंद्रित कर रही है
- भ्रष्टाचार और कट-मनी- पार्टी टीएमसी के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों को मुख्य हथियार बना रही है।
- महिला सुरक्षा – संदेशखाली की घटना के बाद रेखा पात्रा जैसी महिलाओं को टिकट देकर भाजपा महिला सुरक्षा के मुद्दे को भुनाना चाहती है।
- सीएए (CAA) और नागरिकता – मतुआ समुदाय और शरणार्थी वोटों को साधने के लिए सीएए का कार्यान्वयन एक बड़ा मुद्दा है।
- रोजगार और पलायन – बंगाल से युवाओं के पलायन और उद्योगों की कमी को भाजपा अपने घोषणापत्र में प्राथमिकता दे रही है।
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पश्चिम बंगाल के चुनाव मे भाजपा के प्रदर्शन
शुरुआती दौर और संघर्ष (1952 – 2011)
आजादी के बाद कई दशकों तक जनसंघ और बाद में भाजपा का बंगाल में प्रभाव बहुत कम रहा।
- 1952-1990 के दशक तक – भाजपा (या जनसंघ) राज्य में अपनी उपस्थिति दर्ज कराने के लिए संघर्ष करती रही। वाम मोर्चा और कांग्रेस के द्विध्रुवीय मुकाबले में भाजपा की भूमिका नगण्य थी।
- 2011 विधानसभा चुनाव – जब ममता बनर्जी ने 34 साल के वाम शासन को उखाड़ फेंका तब भाजपा का वोट शेयर मात्र 4% के करीब था और उसे 0 सीटें मिली थीं।
उभार का समय (2014 – 2019)
भाजपा के प्रदर्शन में असली उछाल 2014 के लोकसभा चुनाव के बाद देखा गया।
- 2014 लोकसभा चुनाव – भाजपा ने 2 सीटें जीतीं और उसका वोट शेयर बढ़कर लगभग 17% हो गया।
- 2016 विधानसभा चुनाव – भाजपा ने पहली बार विधानसभा में 3 सीटें जीतीं और वोट शेयर 10.16% रहा। हालांकि सीटें कम थीं लेकिन यह भविष्य के विस्तार का संकेत था।
- 2019 लोकसभा चुनाव – यह भाजपा के लिए ‘टर्निंग पॉइंट’ साबित हुआ। पार्टी ने राज्य की 42 सीटों में से 18 सीटें जीतकर सबको चौंका दिया और उसका वोट शेयर छलांग लगाकर 40.2% तक पहुँच गया।
2021 विधानसभा चुनाव – मुख्य विपक्षी दल के रूप में स्थापना
2021 का चुनाव भाजपा के लिए अब तक का सबसे सफल विधानसभा चुनाव रहा जिसमें वह सीधे सत्ता की लड़ाई में उतरी।
- सीटें – भाजपा ने 2016 की 3 सीटों के मुकाबले 77 सीटें जीतीं।
- वोट शेयर – पार्टी को कुल 38.15% वोट मिले।
- मुख्य उपलब्धि – भाजपा राज्य विधानसभा में मुख्य विपक्षी दल बनी। सुवेंदु अधिकारी ने नंदीग्राम सीट से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को हराया जो पार्टी के लिए एक बड़ी प्रतीकात्मक जीत थी।
- क्षेत्रवार प्रदर्शन – उत्तर बंगाल (North Bengal) और जंगलमहल के आदिवासी इलाकों में भाजपा का प्रदर्शन बहुत मजबूत रहा।
विधानसभा चुनावों में भाजपा का प्रदर्शन (तुलनात्मक चार्ट)
| चुनाव वर्ष | सीटें जीतीं | वोट शेयर (%) | स्थिति |
| 2011 | 0 | ~4.0% | अन्य |
| 2016 | 3 | 10.16% | उभरती पार्टी |
| 2021 | 77 | 38.15% | मुख्य विपक्षी दल |
वर्तमान स्थिति (2026 के संदर्भ में)
2021 के बाद हुए कुछ उपचुनावों और दलबदल के कारण विधानसभा में भाजपा की मौजूदा संख्या में उतार-चढ़ाव आया है। वर्तमान में मार्च 2026 के आंकड़ों के अनुसार भाजपा 2026 के आगामी चुनावों के लिए खुद को एक मजबूत विकल्प के रूप में पेश कर रही है, जहां वह 2021 की अपनी कमियों को दूर कर सत्ता तक पहुँचने का लक्ष्य रख रही है।
राजनीतिक विश्लेषण – क्या है चुनौती?
भाजपा के लिए दूसरी सूची में अर्जुन सिंह और रूपा गांगुली जैसे चेहरों को उतारना यह दर्शाता है कि पार्टी सेलिब्रिटी पावर और स्थानीय बाहुबल दोनों का उपयोग करना चाहती है। हालाँकि टीएमसी के मजबूत कैडर और ममता बनर्जी की “लोकप्रिय योजनाओं” जैसे लक्ष्मी भंडार का मुकाबला करना भाजपा के लिए बड़ी चुनौती होगी।
दो चरणों में चुनाव होने के कारण सुरक्षा बलों की तैनाती और हिंसा मुक्त मतदान सुनिश्चित करना चुनाव आयोग और प्रशासन के लिए सबसे बड़ी परीक्षा होगी।







