डेलीबार्ता, विशेष।26 जनवरी 2026 को देश अपना 77वां गणतंत्र दिवस मनाएगा। इस मौके पर कर्तव्य पथ पर होने वाली भव्य परेड में एक ऐसा नाम शामिल होगा, जो आज देशभर की बेटियों के लिए प्रेरणा बन चुका है। इंडियन एयर फोर्स की फ्लाइट लेफ्टिनेंट अक्षिता धनखड़ राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के साथ राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा फहराएंगी। यह गौरवपूर्ण जिम्मेदारी मिलते ही अक्षिता का नाम पूरे देश में चर्चा का विषय बन गया है।
अक्षिता की यह उपलब्धि केवल व्यक्तिगत सफलता नहीं, बल्कि यह उस बदलाव की कहानी है, जिसमें भारत की बेटियां सैन्य शक्ति में बराबरी से भागीदारी निभा रही हैं। गांव की छोटी गलियों से निकलकर देश के सबसे बड़े राष्ट्रीय मंच तक पहुंचने का उनका सफर संघर्ष, अनुशासन और दृढ़ संकल्प की मिसाल है।
गांव की मिट्टी में पला देशसेवा का सपना
अक्षिता धनखड़ हरियाणा के कासानी गांव की रहने वाली हैं। साधारण परिवार में जन्मी अक्षिता का बचपन भी आम ग्रामीण बच्चों की तरह ही बीता, लेकिन उनके सपने असाधारण थे। बचपन से ही गणतंत्र दिवस परेड उनके लिए खास हुआ करती थी। इसकी सबसे बड़ी वजह उनके पिता थे।
अक्षिता के पिता सेना से जुड़े रहे हैं। जब भी वह वर्दी पहनकर परेड में शामिल होते, तो छोटी अक्षिता उन्हें गर्व से देखती थीं। उसी पल उनके मन में भी वर्दी पहनकर देशसेवा करने का सपना जन्म लेता गया। वह बताती हैं कि पिता की वर्दी, अनुशासन और राष्ट्र के प्रति समर्पण ने उन्हें भीतर तक प्रेरित किया।
बचपन में परेड देख बोया था सपनों का बीज
हर साल 26 जनवरी को टीवी पर परेड देखना अक्षिता के लिए उत्सव जैसा होता था। वह कहती हैं कि उस समय उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि एक दिन वह खुद कर्तव्य पथ पर होंगी और राष्ट्रपति के साथ तिरंगा फहराएंगी। लेकिन सपने देखने के साथ-साथ उन्हें पूरा करने के लिए उन्होंने मेहनत को अपना हथियार बनाया।
गांव के स्कूल से शुरुआती पढ़ाई करने के बाद अक्षिता ने पढ़ाई के साथ-साथ खुद को मानसिक और शारीरिक रूप से मजबूत बनाने पर भी ध्यान दिया। उन्हें पता था कि सैन्य सेवा केवल नौकरी नहीं, बल्कि जीवनशैली होती है।
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दिल्ली यूनिवर्सिटी से उच्च शिक्षा, NCC से मिला आत्मविश्वास
अक्षिता ने दिल्ली यूनिवर्सिटी के प्रतिष्ठित श्री गुरु तेग बहादुर खालसा कॉलेज से स्नातक की पढ़ाई की। कॉलेज के दिनों में उन्होंने नेशनल कैडेट कोर (NCC) जॉइन किया। यही वह दौर था, जिसने उनके सपनों को स्पष्ट दिशा दी।
एनसीसी की ट्रेनिंग ने अक्षिता को अनुशासन, नेतृत्व क्षमता, टीमवर्क और जिम्मेदारी का महत्व सिखाया। परेड, ड्रिल, कैंप और फील्ड ट्रेनिंग के दौरान उन्होंने खुद को हर चुनौती के लिए तैयार किया। एनसीसी के अनुभव ने उन्हें यह विश्वास दिलाया कि वह इंडियन एयर फोर्स का हिस्सा बन सकती हैं।
AFCAT परीक्षा से शुरू हुआ एयर फोर्स तक का सफर
कॉलेज की पढ़ाई पूरी करने के बाद अक्षिता ने एयर फोर्स कॉमन एडमिशन टेस्ट (AFCAT) देने का निर्णय लिया। यह परीक्षा इंडियन एयर फोर्स में अधिकारी बनने के लिए एक महत्वपूर्ण पड़ाव होती है।
कड़ी तैयारी और आत्मविश्वास के बल पर अक्षिता ने AFCAT परीक्षा सफलतापूर्वक पास की। इसके बाद मैसूर स्थित एयर फोर्स सिलेक्शन बोर्ड (AFSB) में उनका इंटरव्यू और टेस्ट हुआ, जहां उन्हें रिकमेंडेशन मिला। यह उनके जीवन का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ।
2023 में मिला फ्लाइंग ऑफिसर का कमीशन
सभी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद 2023 में अक्षिता धनखड़ को इंडियन एयर फोर्स में फ्लाइंग ऑफिसर के तौर पर कमीशन मिला। यह वह पल था, जब बचपन में देखा गया सपना पहली बार वास्तविकता में बदला।
वर्दी पहनते समय उन्हें अपने पिता की याद आई और परिवार की आंखों में गर्व के आंसू थे। अक्षिता बताती हैं कि यह उपलब्धि केवल उनकी नहीं, बल्कि उनके माता-पिता, शिक्षकों और उन सभी लोगों की है, जिन्होंने उन पर विश्वास किया।
मेहनत और नेतृत्व से मिला प्रमोशन
एयर फोर्स में सेवा के दौरान अक्षिता ने अपनी जिम्मेदारियों को पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ निभाया। उनके काम, अनुशासन और नेतृत्व क्षमता को देखते हुए उन्हें मेरिट के आधार पर प्रमोशन मिला।
वह फ्लाइट लेफ्टिनेंट के पद पर पदोन्नत हुईं। वर्तमान में अक्षिता इंडियन एयर फोर्स की एडमिनिस्ट्रेशन ब्रांच में कार्यरत हैं, जहां वह ऑपरेशनल और प्रशासनिक जिम्मेदारियों को संभालती हैं। उनका कार्यक्षेत्र बेहद महत्वपूर्ण और चुनौतीपूर्ण है।
77वें गणतंत्र दिवस परेड के लिए चयन
अक्षिता धनखड़ का नाम देशभर में तब चर्चा में आया, जब यह घोषणा हुई कि वह 26 जनवरी 2026 को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के साथ राष्ट्रीय ध्वज फहराएंगी। यह जिम्मेदारी केवल चुनिंदा अधिकारियों को ही दी जाती है और इसके लिए कठोर चयन प्रक्रिया होती है।
इस चयन में अक्षिता की प्रोफेशनल एक्सीलेंस, अनुशासन और नेतृत्व भूमिका को आधार बनाया गया। उनके लिए यह न सिर्फ सम्मान है, बल्कि देश के प्रति उनके योगदान की मान्यता भी है।
परिवार और गांव में जश्न का माहौल
अक्षिता के चयन की खबर मिलते ही उनके गांव कासानी में खुशी की लहर दौड़ गई। परिवार, रिश्तेदार और ग्रामीणों ने इसे पूरे गांव की उपलब्धि बताया। उनके माता-पिता कहते हैं कि बेटी ने देश का नाम रोशन कर दिया।
गांव की बेटियों के लिए अक्षिता रोल मॉडल बन चुकी हैं। आज कई लड़कियां उन्हें देखकर एयर फोर्स, आर्मी और नेवी में जाने का सपना देख रही हैं।
महिला सशक्तिकरण की मजबूत मिसाल
अक्षिता धनखड़ की सफलता भारत में बदलते सामाजिक नजरिए को भी दर्शाती है। आज बेटियां सीमाओं की सुरक्षा से लेकर प्रशासनिक जिम्मेदारियों तक हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं।
उनकी कहानी यह साबित करती है कि सही अवसर, परिवार का समर्थन और खुद पर विश्वास हो तो कोई भी मंजिल दूर नहीं।
अक्षिता का संदेश युवाओं के नाम
अक्षिता कहती हैं कि सपने देखने से ज्यादा जरूरी है उनके लिए मेहनत करना। असफलताओं से डरने की बजाय उनसे सीख लेनी चाहिए। वह युवाओं, खासकर लड़कियों से कहती हैं कि समाज की सीमाओं से ऊपर उठकर अपने लक्ष्य तय करें।
राष्ट्र के लिए गर्व का क्षण
26 जनवरी 2026 को जब राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के साथ फ्लाइट लेफ्टिनेंट अक्षिता धनखड़ तिरंगा फहराएंगी, तो वह पल केवल उनके परिवार के लिए नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए गर्व का होगा।
गांव की गलियों से निकलकर राष्ट्र की शान बनने तक का यह सफर आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा।







