मध्यप्रदेश के शहडोल जिले के विचारपुर ग्राम में मिनी ब्राजील के नाम से फेमस विचारपुर गांव को आखिरकार वह मिल ही गया जिसके लिए वहां के खिलाड़ी कब से मांग कर रहे थे। कहते है प्रतिभा जब किसी खिलाड़ी के अंदर होती है तो कोई भी रास्ता उसके लिए बड़ा साबित नहीं होता है वह उस रास्ते को अपने मेहनत से सफल बना ही लेता है। जब भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी यहां 2024 में आए थे तब उन्होंने इस जगह को मिनी ब्राजील कहा था। वो जब विदेश गए थे और एक प्लेटफार्म में इंटरव्यू दे रहे थे तब भी उन्होंने MP के विचारपुर का जिक्र किया था और इसे मिनी ब्राजील का नाम दिया था।
यहां तक जब हर रविवार वो अपने मन की बात करते है तो एक बार अपने मन की बात कार्यक्रम में उन्होंने मिली ब्राजील का जिक्र बहुत अच्छे से किया था। उन्होंने बताया था कि कैसे एक छोटे से गांव से निकलकर खिलाड़ी फुटबॉल की दुनिया में अपना लोहा मनवा रहे है। बात तब अटकी जब खिलाड़ियों ने पूछे जाने के बाद बताया कि उनके पास talent तो है लेकिन सुविधाएं नहीं है जिसके कारण वह पीछे जा रहे है। पर्याप्त मात्रा में खेल उपकरण न होना, ग्राउंड न होना, चेंजिंग room न होना और प्रैक्टिस के लिए अलग से नेट न होना जैसी कमियों को उन्होंने उजागर किया था।
देर आए दुरुस्त आए
मप्र के खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने जब 5 करोड़ का बजट पारित किया तब उन्होंने विचारपुर के खिलाड़ियों पर भरोसा जताया कि यहां के खिलाड़ी अब देश नहीं विदेश में भी अपना परचम लहराएंगे। लगातार जिला शहडोल के स्थानीय नेताओं का मुख्यमंत्री तक बात पहुंचाना आखिरकार सफल रहा। जिला शहडोल के स्थानीय नेता और आमजन बताते है कि विचारपुर ग्राम के हर घर से कोई न कोई खिलाड़ी फुटबॉल खेलता है जो उस ग्राम को और खास बताता है। पीढ़ियां गुजर गई लेकिन फुटबॉल खेलने का जज्बा आज भी वही का वही है।
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खिलाड़ियों की ट्रेनिंग
मप्र के मुख्यमंत्री और खेल मंत्री ने यहां के कुछ खिलाड़ियों को जर्मनी अच्छी ट्रेनिंग के किया भेजा था जिससे चयनित खिलाड़ी जर्मनी गए और फुटबॉल की बारीकियां अच्छे से सीखी। जितना भी खर्चा हुआ वह सब मध्यप्रदेश सरकार ने उठाया। जर्मनी के कोच ने भी विचारपुर के खिलाड़ियों की खूब प्रशंसा की और कहा कि अगर इन खिलाड़ियों को सही प्लेटफॉर्म मिलता रहे तो एक दिन यह खिलाड़ी फुटबॉल के क्षेत्र में अग्रणी नाम करेंगे।
सुविधाओं की कमी
भारत के मध्य में स्थित मध्यप्रदेश भारत के दिल की धड़कन कहा जाता है। जिला शहडोल जो कि आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र है जो अपने संस्कृति और कला के लिए जानी जाती है। यहां अन्य खेलो के नाम से खूब विकास हुआ लेकिन फुटबॉल में यह चीज की कमी देखने को मिली। खिलाड़ी रोज सुबह से शाम कड़ी मेहनत करते है उसका परिणाम उनको मिलता भी है लेकिन कुछ मूलभूत सुविधाओं की कमी के कारण थोड़ा उनको अपने कदमों को पीछे करना उड़ता है। अगर फुटबॉल की दुनिया में यह खिलाड़ी अपने प्रतिभा के दम से आगे बढ़ेंगे तो कोई आश्चर्य बिल्कुल ही नहीं होगा। यहां के आम नागरिकों का समर्थन खिलाड़ियों तक समय समय पर पहुंचता रहता है। एक कमी थी एक अच्छे ग्राउंड की जो कि 5 करोड़ रुपए का बजट पारित करने के बाद पूरा आ हो गया है। अब बस आस है कि एक दिन विचारपुर या तो कहे मिली ब्राजील के खिलाड़ी देश विदेश में अपना नाम करेंगे।







