यमन के हूथी और सोमालीलैंड का नया विवाद -यमन के हूथी Houthi आंदोलन जिसे अंसार अल्लाह के नाम से भी जाना जाता है और सोमालीलैंड के हालिया घटनाक्रमों के बीच का संबंध वैश्विक समुद्री सुरक्षा के लिए एक नया मोर्चा खोल सकता है।
लाल सागर में बढ़ता भू-राजनीतिक संकट
लाल सागर और अदन की खाड़ी का क्षेत्र सदियों से वैश्विक व्यापार का केंद्र रहा है। हाल के महीनों में यमन के हूथी विद्रोहियों ने इज़राइल-हमास संघर्ष को आधार बनाकर इस क्षेत्र में जहाजों पर हमले तेज कर दिए हैं। लेकिन अब इस विवाद में एक नया मोड़ आया है|
सोमालीलैंड
सोमालीलैंड द्वारा खुद को एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में स्थापित करने की कोशिशों और इथियोपिया के साथ उसके हालिया समझौतों ने हूथियों को एक नया मुद्दा दे दिया है।
हूथी नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि सोमालीलैंड इज़राइल या पश्चिमी शक्तियों के साथ मिलकर कोई रणनीतिक कदम उठाता है तो उसके गंभीर परिणाम होंगे।
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क्या है सोमालीलैंड का मुद्दा
सोमालीलैंड हॉर्न ऑफ अफ्रीका का एक क्षेत्र है जिसने 1991 में सोमालिया से अपनी स्वतंत्रता की घोषणा की थी। हालांकि इसके पास अपनी सरकार मुद्रा और सेना है, लेकिन इसे अभी तक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पूर्ण मान्यता नहीं मिली है।
हालिया विवाद का कारण- इथियोपिया के साथ समझौता
जनवरी 2024 में सोमालीलैंड ने इथियोपिया के साथ एक समझौता ज्ञापन MoU पर हस्ताक्षर किए। इसके तहत इथियोपिया को लाल सागर में 20 किलोमीटर के तट का उपयोग करने और वहां एक नौसैनिक अड्डा बनाने की अनुमति दी गई। इसके बदले में इथियोपिया ने सोमालीलैंड को एक संप्रभु राष्ट्र के रूप में मान्यता देने का संकेत दिया।
- क्षेत्रीय तनाव-सोमालिया ने इसे अपनी संप्रभुता का उल्लंघन बताया। यहीं से हूथियों की एंट्री होती है जो खुद को इस क्षेत्र में इस्लामी हितों का रक्षक बताते हैं।
- हूथी नेता की धमकी-हूथी समूह के शीर्ष नेता अब्दुल-मलिक अल-हूथी ने अपने हालिया भाषणों में सोमालीलैंड के घटनाक्रमों पर कड़ा रुख अपनाया है।
इज़राइल के साथ संबंध की आशंका
हूथियों का मानना है कि सोमालीलैंड का नया बंदरगाह समझौता भविष्य में इज़राइल या अमेरिका को इस क्षेत्र में सैन्य उपस्थिति दर्ज कराने का मौका दे सकता है।
रणनीतिक घेराबंदी-हूथी नेता ने चेतावनी दी है कि यदि सोमालीलैंड के बंदरगाहों का उपयोग इज़राइल को रसद पहुँचाने या हूथियों के खिलाफ सैन्य अभियान चलाने के लिए किया गया तो वे उन बंदरगाहों और वहां आने वाले जहाजों को निशाना बनाएंगे।
धार्मिक और क्षेत्रीय नैरेटिव-हूथियों ने सोमालीलैंड के नेतृत्व को मुस्लिम हितों के खिलाफ जाने वाला बताया है ताकि वे अफ्रीकी तट पर भी अपना प्रभाव और समर्थ जुटा सकें।
इज़राइल हूथी और सोमालीलैंड का त्रिकोण
यह विवाद केवल क्षेत्रीय नहीं बल्कि वैश्विक है। इसके पीछे तीन मुख्य रणनीतिक कारण हैं-
बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य (Bab al-Mandab Strait)
यह एक संकरा रास्ता है जो लाल सागर को अदन की खाड़ी से जोड़ता है। दुनिया का लगभग 12-15% समुद्री व्यापार यहीं से गुजरता है। हूथी यमन की ओर से इस रास्ते को नियंत्रित करने की कोशिश कर रहे हैं जबकि सोमालीलैंड का तट इसके ठीक सामने अफ्रीका की तरफ पड़ता है।
इज़राइल की समुद्री सुरक्षा
इज़राइल के लिए ईलात Eilat बंदरगाह तक पहुंचने का एकमात्र रास्ता लाल सागर है। हूथियों ने पहले ही इस रास्ते में इज़राइली जहाजों पर मिसाइल हमले किए हैं। अगर सोमालीलैंड में कोई इज़राइल-समर्थक आधार बनता है तो यह हूथियों के लिए बड़ी चुनौती होगी।
ईरान का प्रभाव
हूथियों को ईरान का समर्थन प्राप्त है। सोमालीलैंड को लेकर दी गई धमकी को ईरान के उस व्यापक मिशन का हिस्सा माना जा रहा है| जिसमें वह लाल सागर और हिंद महासागर के बीच पश्चिमी प्रभाव को कम करना चाहता है।
- वैश्विक व्यापार और सुरक्षा पर प्रभाव – यदि हूथी समूह सोमालीलैंड के आसपास के पानी में अपनी गतिविधियों का विस्तार करता है तो इसके गंभीर परिणाम होंगे|
- शिपिंग लागत में वृद्धि – जहाजों को अफ्रीका के दक्षिण केप ऑफ गुड होप से होकर जाना पड़ेगा जिससे समय और ईंधन का खर्च बढ़ेगा।
- बीमा दरों में उछाल – इस क्षेत्र से गुजरने वाले जहाजों के लिए युद्ध जोखिम बीमा War Risk Insurance की कीमतें आसमान छूने लगेंगी
- सैन्य टकराव की संभावना- अमेरिका और ब्रिटेन पहले ही प्रोस्पेरिटी गार्जियन Operation Prosperity Guardian के तहत हूथियों पर हमले कर रहे हैं। सोमालीलैंड का मुद्दा इस आग में घी डालने का काम कर सकता है।
सोमालीलैंड की प्रतिक्रिया
सोमालीलैंड की सरकार ने स्पष्ट किया है कि वह अपनी आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए स्वतंत्र निर्णय लेने का अधिकार रखती है। उन्होंने हूथियों की धमकियों को आतंकवादी बयानबाजी करार दिया है और कहा है कि वे अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ मिलकर समुद्री डकैती और आतंकवाद के खिलाफ लड़ने को तैयार हैं।
क्या होगा आगे
यमन के हूथी समूह द्वारा सोमालीलैंड को दी गई धमकी यह दर्शाती है कि मध्य-पूर्व का संघर्ष अब अफ्रीका के तटों तक फैल रहा है। यह स्थिति केवल यमन या सोमालीलैंड तक सीमित नहीं है बल्कि इसमें इज़राइल इथियोपिया सोमालिया अमेरिका और ईरान जैसे कई खिलाड़ी शामिल हैं।
भविष्य में यदि सोमालीलैंड अपनी स्वतंत्रता की दिशा में आगे बढ़ता है और पश्चिमी शक्तियों के साथ रक्षा सहयोग करता है तो लाल सागर का क्षेत्र एक और लंबे युद्ध का गवाह बन सकता है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए चुनौती यह है कि वे समुद्री व्यापार की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए इस जटिल राजनीतिक विवाद का शांतिपूर्ण समाधान कैसे निकालते हैं।







