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स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों का आवागमन हुआ शुरू

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों का आवागमन हुआ शुरू
नवजोत कौर सिद्धू
On: अप्रैल 18, 2026 3:24 अपराह्न
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अमेरिका इजरायल का ईरान के साथ युद्ध का असर धीरे धीरे कम होता दिख रहा है। इस्लामाबाद में हुए शांति वार्ता के असफल होने के बाद भी ईरान ने होर्मुज का रास्ता खोल दिया है। यह रास्ता उन जहाजों के लिए खोला गया है जो व्यवसायिक जहाज है और कच्चा तेल लेकर दूसरे देश जाते है। ज्ञात हो कि अमेरिका ने लेबनान पर 10 दिनों का संघर्ष विराम किया है। हालांकि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यह फाइनल नहीं किया है कि लेबनान में 10 दिनों के संघर्ष विराम के बाद भी युद्ध होगा या नहीं। कुछ दिनों पहले अमेरिका के उपराष्ट्रपति पाकिस्तान में ईरान के नेताओं के साथ शान्ति वार्ता के लिए आए थे लेकिन ईरान अमेरिका की शर्तों को मानने से इंकार कर रहा है। 

अमेरिका भी जवाबी कार्यवाही करने को तैयार है। दरअसल अमेरिका चाहता है कि ईरान परमाणु हथियार बनाना पूरी तरीके से बंद कर दे लेकिन ईरान अपने देश की सुरक्षा के लिए इस शर्त को मानने से इंकार कर रहा है। 

कच्चे तेल के दाम में हुआ है भारी इजाफा

होर्मुज का रास्ता बंद होने से सबसे ज्यादा असर उन देशों पर पड़ा है जो ईरान से कच्चे तेल का आयात करते है। ईरान पूरी दुनिया को कुल कच्चे तेल का 20% कच्चा तेल निर्यात करता है। ईरान का यह महत्वपूर्ण व्यवसाय हैं। होर्मुज का रास्ता बंद हो जाने से कई खाड़ी देशों की महंगाई पर असर पड़ा। 

पेट्रोल डीजल के दाम आसमान छूने लगे। सोना चांदी अपने रिकॉर्ड स्तर पर चला गया। LPG की भारी किल्लत देखने को मिली। होर्मुज जलडमरूमंडल से अब सारे जहाज़ कच्चा तेल लेकर अपने राज्यों को जा सकते है। वही संघर्ष विराम के पहले अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को यह धमकी दी थी कि अगर होर्मुज जलडमरूमंडल से कोई भी जहाज निकला तो उसको उड़ा देंगे।

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पाकिस्तान की रणनीति नहीं आई काम

अमेरिका इजरायल का ईरान के साथ युद्ध में पाकिस्तान को जबरदस्त नुकसान पहुंचा। अगर पाकिस्तान ने अमेरिका का साथ दिया तो उससे ईरान नाराज हो जाएगा। ईरान अगर नाराज हो गया तो वह हथियारो का आयात निर्यात बंद कर देगा। कच्चे तेल की सप्लाई भी बंद कर देगा। पाकिस्तान ने अगर ईरान का साथ दिया तो अमेरिका द्वारा पाकिस्तान को दी जाने वाली फंडिंग बंद हो जाएगी। 

पाकिस्तान वैसे भी कर्जे में डूबा हुआ है। अगर ऐसे समय में पाकिस्तान ने अमेरिका का साथ नहीं दिया तो डोनाल्ड ट्रंप पाकिस्तान को अच्छा खासा सबक सिखा सकते है। आसिफ मुनीर जहां अलग कूटनीतिक चाल चल रहे है तो वही शाहनवाज शरीफ भी हाथ से हाथ मिला रहे। आसिफ मुनीर जहां विदेशी खाड़ी देशों की यात्रा कर युद्ध को खत्म करने का प्रयास कर रहे तो वही पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शाहनवाज शरीफ भी इसी रस्ते में चल रहे है। 

ब्रिटेन और रूस का ईरान को सपोर्ट

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कितने बड़े तानाशाह है यह अब पूरी दुनिया देख चुकी है। युद्ध के समय राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ब्रिटेन द्वारा बनाए हुए एयरबेस को इस्तेमाल करने की इजाजत मांगी तो ब्रिटेन ने साफ मना कर दिया । राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ट्वीट करके इस बात की नाराजगी भी व्यक्त की। वही रूस के राष्ट्रपति पुतिन भी अमेरिका का सपोर्ट नहीं कर रहे बल्कि रूस अपने हथियार ईरान को देकर ईरान की सहायता कर रहा। 

दोनों देशों के नेताओं का यह कहना है कि अनैतिक ढंग से अमेरिका ईरान पर राज करना चाहता है जो विश्व के लिए एक खतरा है। चीन भी इस युद्ध में नहीं उतर रहा है। चीन अभी अपने इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ाने में लगा है अगर वह युद्ध में कूदता है तो भारी खर्च की संभावना है। चीन एक समझदार देश है  उसे पता है कि वह युद्ध में गया तो चीन जो तेज गति से अमेरिका को पछाड़ रहा है तो उसमें कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है

Swati Pandey

A versatile writer mainly works on trending news, daily updates from politics, business, crime, current affairs and entertainment.

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