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हॉर्मुज़ में उलझा ईरान- खुद बिछाई समुद्री सुरंगें अब बन रहीं सबसे बड़ी चुनौती दुनिया की तेल सप्लाई पर खतरा

हॉर्मुज़ में उलझा ईरान- खुद बिछाई समुद्री सुरंगें अब बन रहीं सबसे बड़ी चुनौती दुनिया की तेल सप्लाई पर खतरा
नवजोत कौर सिद्धू
On: अप्रैल 12, 2026 7:45 अपराह्न
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तेहरान । खाड़ी के उबलते पानी में इस वक्त एक अजीब सी दहशत है। दुनिया का सबसे अहम समुद्री रास्ता ‘स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज़’ आज एक ऐसी पहेली बन चुका है, जिसका हल खुद इसे बनाने वाले ईरान के पास भी नहीं है। असल में, तनाव के दौरान ईरान ने दुश्मनों को रोकने के लिए समंदर के नीचे बारूदी सुरंगों (Sea Mines) का जो जाल बिछाया था, अब वह उसके लिए ही जी का जंजाल बन गया है। आलम यह है कि खुद ईरान को भी नहीं पता कि ये ‘साइलेंट किलर’ इस वक्त लहरों के नीचे कहाँ छिपे हैं,कहते हैं कि गुस्से और जल्दबाजी में लिया गया फैसला अक्सर उल्टा पड़ता है। ईरान के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। 

जब तनाव चरम पर था, तो ईरान को लगा कि अगर दुश्मन के जहाजों को रोकना है, तो समंदर के रास्ते में बारूद बिछाना ही सबसे अच्छा तरीका है। आनन-फानन में छोटी-छोटी नावों के जरिए सैकड़ों सुरंगें पानी में डाल दी गईं।दिक्कत यह हुई कि यह काम इतनी हड़बड़ी में किया गया कि इसका कोई नक्शा या रिकॉर्ड ही नहीं रखा गया। अब समंदर की लहरों और करंट ने उन सुरंगों को उनकी जगह से हिलाकर इधर-उधर फैला दिया है। आज ईरान की हालत उस इंसान जैसी है जिसने अपने ही बेडरूम में अंधेरे में सुइयां बिखेर दी हों और अब उसे खुद बिस्तर तक जाने में डर लग रहा हो।

जहाजों के लिए बना डर का रास्ता

हॉर्मुज़ का यह रास्ता दुनिया के लिए कितना जरूरी है, इसका अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि दुनिया का लगभग 25% तेल यहीं से होकर गुज़रता है।जहाज चलाने वाले क्रू मेंबर्स के लिए यह रास्ता अब किसी डरावने सपने जैसा है। बीमा कंपनियों ने इस रास्ते से गुजरने का खर्चा इतना बढ़ा दिया है कि कई कंपनियों ने अपने जहाज यहाँ भेजने ही बंद कर दिए हैं। वे या तो कहीं दूर लंगर डालकर खड़े हैं या फिर बहुत लंबा चक्कर काटकर जाने की सोच रहे हैं।

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अमेरिका की बढ़ती सक्रियता

इस पूरे हंगामे के बीच अमेरिका ने भी अपनी एंट्री मार ली है। अमेरिकी नौसेना के जहाज और रोबोट अब हॉर्मुज़ में उन सुरंगों को खोजने का काम कर रहे हैं। अमेरिका दुनिया को यह दिखाना चाहता है कि वह व्यापार के रास्तों को बचाने वाला ‘रखवाला’ है।दूसरी तरफ, पर्दे के पीछे बातचीत भी चल रही है। अमेरिका कह रहा है कि जब तक ईरान इन सुरंगों को साफ करने में मदद नहीं करता और रास्ता सुरक्षित नहीं होता, तब तक उस पर लगी पाबंदियों में ढील नहीं दी जाएगी। ईरान अब एक अजीब धर्मसंकट में है—अगर वह अपनी गलती मानता है तो उसकी सैन्य ताकत पर सवाल उठेंगे, और अगर नहीं मानता तो वह खुद अपना व्यापार नहीं कर पाएगा।

भारत पर इसका क्या असर होगा?

भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर तेल इन्हीं खाड़ी देशों से मंगाता है। अगर हॉर्मुज़ का रास्ता बंद रहता है या वहाँ खतरा बना रहता है, तो तेल की सप्लाई कम हो जाएगी।

जब सप्लाई कम होगी, तो पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ेंगे। इसका सीधा असर ट्रांसपोर्ट पर पड़ेगा और सब्जियां, फल और हर जरूरी चीज महंगी हो जाएगी। इसलिए भारत की नजरें भी इस वक्त हॉर्मुज़ की लहरों पर टिकी हैं।

सुरंगों को हटाना क्यों है इतना मुश्किल?

कई लोग सोच रहे होंगे कि अगर पता चल गया है कि सुरंगें हैं, तो उन्हें हटा क्यों नहीं देते? असल में समंदर के नीचे यह काम बहुत पेचीदा है। हॉर्मुज़ का पानी काफी मटमैला है, जहाँ नीचे कुछ भी साफ नहीं दिखता।

ऊपर से ये सुरंगें अब अपनी जगह से खिसक चुकी हैं। कई सुरंगें तो ऐसी हैं जो जहाज के लोहे की तरफ चुंबक की तरह खिंची चली आती हैं या इंजन की आवाज सुनकर फट जाती हैं। इन्हें बिना धमाके के बाहर निकालना दुनिया के सबसे बड़े एक्सपर्ट्स के लिए भी पसीने छुड़ाने वाला काम है।

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क्या सीजफायर से बात बनेगी?

भले ही ईरान और उसके विरोधियों के बीच फिलहाल गोलीबारी रुकी हुई है, लेकिन हॉर्मुज़ का संकट खत्म नहीं हुआ है। जानकारों का कहना है कि कागजों पर शांति होना अलग बात है और समंदर को सुरक्षित करना अलग। जब तक एक-एक सुरंग का पता नहीं चल जाता, तब तक कोई भी बड़ा जहाज इस रास्ते पर दांव लगाने को तैयार नहीं होगा। ईरान ने कुछ दूसरे बंदरगाहों का नाम लिया है, लेकिन वे इतने छोटे हैं कि हॉर्मुज़ की जगह नहीं ले सकते।

हॉर्मुज़ का यह संकट ईरान के लिए एक बड़ा सबक है। एक छोटी सी रणनीतिक चूक ने आज पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को खतरे में डाल दिया है। ईरान अब कोशिश कर रहा है कि किसी तरह इस मुसीबत से बाहर निकले और दुनिया को भरोसा दिलाए कि वह एक जिम्मेदार देश है।लेकिन तब तक, हॉर्मुज़ से गुजरने वाला हर जहाज एक अनिश्चित सफर पर है। आने वाले कुछ हफ्ते बहुत अहम हैं। अगर रास्ता जल्द साफ नहीं हुआ, तो दुनिया को एक नई आर्थिक मंदी का सामना करना पड़ सकता है। यह देखना दिलचस्प होगा कि ईरान इस ‘सेल्फ-मेड’ मुसीबत से कैसे पार पाता है।

Swati Pandey

A versatile writer mainly works on trending news, daily updates from politics, business, crime, current affairs and entertainment.

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