जनवरी 2026 के ताजा घटनाक्रमों के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर “अधिकतम दबाव” (Maximum Pressure) की नीति को एक नए और आक्रामक स्तर पर पहुंचा दिया है। ट्रंप ने हाल ही में घोषणा की है कि अमेरिका एक और विशाल जंगी बेड़ा (Armada) ईरान की ओर भेज रहा है। यह कदम ईरान में चल रहे आंतरिक विरोध प्रदर्शनों पर वहां की सरकार द्वारा की गई कठोर कार्रवाई और परमाणु कार्यक्रम को लेकर बढ़ते तनाव के बीच उठाया गया है।
ट्रंप का बयान – “एक और सुंदर जंगी बेड़ा बढ़ रहा है”
राष्ट्रपति ट्रंप ने 27 जनवरी 2026 को अमेरिका के आयोवा (Iowa) में एक रैली के दौरान वैश्विक मीडिया का ध्यान इस ओर खींचा। उन्होंने कहा-
“अभी इस वक्त एक और ‘सुंदर’ जंगी बेड़ा (Beautiful Armada) ईरान की ओर बढ़ रहा है। मैं चाहता हूँ कि वे (ईरान) एक समझौता करें। उन्हें पहले ही समझौता कर लेना चाहिए था, तो आज उनके पास एक बेहतर देश होता।”
ट्रंप ने इससे पहले एयर फ़ोर्स वन पर पत्रकारों से बात करते हुए ईरान की स्थिति को “अस्थिर” बताया था और कहा था कि अमेरिका वहां की हर हलचल पर पैनी नजर रख रहा है। उनका यह बयान सीधे तौर पर ईरान को यह संदेश है कि यदि उसने अपनी नीतियों में बदलाव नहीं किया, तो सैन्य विकल्प मेज पर हैं।
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पहले जंगी बेड़ा की पूरी जानकारी (USS Abraham Lincoln)
ट्रंप ने जिस “दूसरे” बेड़ा की बात की है, उससे पहले ही एक विशाल सैन्य बेड़ा इस क्षेत्र में पहुंच चुका है|
- नाम – यूएसएस अब्राहम लिंकन (USS Abraham Lincoln – CVN 72) कैरियर स्ट्राइक ग्रुप।
- पहुँच – यह बेड़ा 26 जनवरी 2026 को मध्य-पूर्व (Middle East) के पानी में, विशेष रूप से हिंद महासागर और ओमान की खाड़ी के पास तैनात हो गया।
- ताकत- इसमें F-35C लाइटनिंग II और F/A-18 सुपर हॉर्नेट जैसे आधुनिकतम लड़ाकू विमानों के कई स्क्वाड्रन शामिल हैं।
इसके साथ तीन गाइडेड-मिसाइल विध्वंसक (Destroyers) हैं, जो सैकड़ों टोमाहॉक (Tomahawk) क्रूज मिसाइलों से लैस हैं। इस पूरे स्ट्राइक ग्रुप में लगभग 5,700 से अधिक अमेरिकी सैनिक तैनात हैं।
मिशन – अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, इसका उद्देश्य क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखना और ईरान को किसी भी दुस्साहस से रोकना है।
ईरान में दहशत और तनाव का कारण
ट्रंप की इस सैन्य घेराबंदी से ईरान में काफी बेचैनी है। इसके प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं:
- जून 2025 का हमला (Operation Midnight Hammer) – ट्रंप ने दावा किया कि जून 2025 में अमेरिका ने ‘ऑपरेशन मिडनाइट हैमर’ के जरिए ईरान की परमाणु क्षमताओं को काफी नुकसान पहुँचाया था। अब दूसरे बेड़े का आना ईरान को किसी बड़े हमले का संकेत लग रहा है।
- आंतरिक विद्रोह – ईरान में आर्थिक तंगी और सरकार विरोधी प्रदर्शनों के कारण स्थिति खराब है। कार्यकर्ताओं का दावा है कि सरकारी कार्रवाई में अब तक 5,000 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं। ट्रंप ने चेतावनी दी है कि यदि प्रदर्शनकारियों को फांसी दी गई, तो अमेरिका चुप नहीं बैठेगा।
- आर्थिक घेराबंदी – ट्रंप प्रशासन ने उन देशों और कंपनियों पर 25% टैरिफ लगाने का प्रस्ताव दिया है जो ईरान के साथ व्यापार करते हैं। यह ईरान की अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ने वाला कदम है।
- सैन्य अभ्यास – अमेरिका ने इस क्षेत्र में बहु-दिवसीय हवाई सैन्य अभ्यास (Aerial Drills) भी शुरू किए हैं, जिसे ईरान “युद्ध की तैयारी” मान रहा है।
ईरान की प्रतिक्रिया और ‘ऑल-आउट वॉर’ की चेतावनी
ईरान ने इन धमकियों के आगे झुकने के बजाय कड़ा रुख अपनाया है|
- रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) के कमांडरों ने चेतावनी दी है कि यदि किसी पड़ोसी देश ने अपनी जमीन या हवाई क्षेत्र का उपयोग ईरान पर हमले के लिए करने दिया, तो उसे भी “शत्रु” माना जाएगा।
- ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन ने कहा है कि अमेरिका की ये धमकियां क्षेत्र में केवल अस्थिरता पैदा करेंगी।
- तेहरान के प्रमुख चौराहों पर नए होर्डिंग लगाए गए हैं जिनमें अमेरिकी जंगी जहाजों को नष्ट होते हुए दिखाया गया है और लिखा है “जो हवा बोएगा, वही तूफान काटेगा।”
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आगे क्या हो सकता है?
विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप इन बेड़ों का उपयोग केवल डराने के लिए नहीं, बल्कि बातचीत की मेज पर ईरान को अपनी शर्तों पर लाने के लिए कर रहे हैं। हालांकि, ईरान ने भी अपनी मिसाइल यूनिट्स को हाई अलर्ट पर रखा है। अगर गलती से भी किसी पक्ष ने “गलत अनुमान” लगाया, तो यह स्थिति एक पूर्ण युद्ध (All-out War) में बदल सकती है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति और अर्थव्यवस्था पर भारी असर पड़ेगा।







