डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ग्रीनलैंड को खरीदने की इच्छा और उसके समर्थन में अमेरिकी रिपब्लिकन सांसदों द्वारा केक काटने की घटना अमेरिकी राजनीति के सबसे दिलचस्प और चर्चा का विषय रहे अध्यायों में से एक है।
ग्रीनलैंड खरीदने का विचार – पृष्ठभूमि
डोनाल्ड ट्रंप ने पहली बार 2019 में सार्वजनिक रूप से ग्रीनलैंड (जो डेनमार्क का एक स्वायत्त हिस्सा है) को खरीदने में दिलचस्पी दिखाई थी। उन्होंने इसे “एक विशाल रियल एस्टेट डील” करार दिया था। हालांकि शुरुआत में इसे एक मजाक समझा गया, लेकिन ट्रंप इस पर गंभीर थे। उनका तर्क था कि ग्रीनलैंड की भू-राजनीतिक स्थिति (Geopolitical Position) और वहां मौजूद प्राकृतिक संसाधन अमेरिका के लिए रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
रिपब्लिकन सांसदों का समर्थन और ‘केक समारोह’
जब ट्रंप ने इस विचार को आगे बढ़ाया, तो वाशिंगटन में रिपब्लिकन पार्टी के कई सांसदों ने उनके इस साहसिक दृष्टिकोण का समर्थन किया। सांसदों के एक समूह ने ट्रंप के इस विचार के प्रति एकजुटता दिखाने के लिए एक प्रतीकात्मक जश्न मनाया।
- केक का स्वरूप – सांसदों ने ग्रीनलैंड के मानचित्र के आकार का एक बड़ा केक तैयार करवाया। इस केक की खास बात यह थी कि इसे अमेरिकी झंडे के रंगों (लाल, सफेद और नीला) से सजाया गया था, जो इस बात का प्रतीक था कि ग्रीनलैंड को अमेरिका का हिस्सा बनते देखना चाहते हैं।
- सांसदों का तर्क – इन सांसदों का मानना था कि आर्कटिक क्षेत्र में रूस और चीन के बढ़ते प्रभाव को रोकने के लिए ग्रीनलैंड पर अमेरिकी नियंत्रण आवश्यक है।
प्रमुख समर्थक सांसद
- इस विचार को मुख्य रूप से उन सांसदों ने हवा दी जो ट्रंप की “अमेरिका फर्स्ट” नीति के कट्टर समर्थक थे। इनमें शामिल थे
- टॉम कॉटन (Tom Cotton) – अरकंसास के सीनेटर, जिन्होंने खुलकर कहा था कि ग्रीनलैंड की खरीद अमेरिका के हित में है।
- माइक गैलाघेर (Mike Gallagher)- इन्होंने भी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से इसे एक मास्टरस्ट्रोक बताया था।
सांसद ट्रंप को क्या मानते हैं?
केक काटने वाले और इस विचार का समर्थन करने वाले सांसद ट्रंप को केवल एक राजनेता नहीं, बल्कि एक “विजनरी लीडर” (दूरदर्शी नेता) मानते हैं। उनके अनुसार-
- वे ट्रंप को एक ऐसा व्यक्ति मानते हैं जो लीक से हटकर सोचता है।
- उनके लिए ट्रंप एक “डील मेकर” हैं जो अमेरिका की सीमाओं और प्रभाव को बढ़ाने का साहस रखते हैं।
- इन सांसदों का मानना है कि ट्रंप का यह कदम 1867 में अलास्का की खरीद जैसा ऐतिहासिक हो सकता है।
दूसरे देशों और विरोधियों को दिया क्या संदेश
केक काटकर और जश्न मनाकर रिपब्लिकन सांसदों ने दुनिया को कुछ कड़े संदेश देने की कोशिश की:
- डेनमार्क को संदेश – यह एक तरह का मनोवैज्ञानिक दबाव था कि अमेरिका इस प्रस्ताव को लेकर गंभीर है।
- चीन और रूस को चेतावनी – अमेरिका आर्कटिक क्षेत्र में अपनी उपस्थिति मजबूत करने के लिए किसी भी हद तक जा सकता है।
- विरोधियों (डेमोक्रेट्स) को चिढ़ाना – रिपब्लिकन ने यह दिखाकर कि वे ट्रंप के “अजीब” लगने वाले विचारों के साथ भी मजबूती से खड़े हैं, अपनी एकजुटता का प्रदर्शन किया।
ट्रंप के हौसले और वर्तमान स्थिति
इस समर्थन ने ट्रंप के आत्मविश्वास को काफी बढ़ा दिया था।
- उत्साह – सांसदों के इस समर्थन से ट्रंप को लगा कि उनकी पार्टी उनके सबसे विवादास्पद विचारों के पीछे भी खड़ी है।
- राजनयिक तनाव – हालांकि डेनमार्क ने स्पष्ट कर दिया कि “ग्रीनलैंड बिकाऊ नहीं है,” लेकिन ट्रंप ने इसके बाद अपनी डेनमार्क यात्रा तक रद्द कर दी थी।
- राजनीतिक लाभ – ट्रंप के समर्थकों के बीच यह संदेश गया कि वे एक ऐसे राष्ट्रपति हैं जो अमेरिका को बड़ा और शक्तिशाली बनाने के लिए कुछ भी कर सकते हैं।
ग्रीनलैंड के आकार का केक काटना महज एक जश्न नहीं था, बल्कि यह अमेरिकी राष्ट्रवाद और विस्तारवादी सोच का एक प्रदर्शन था। हालांकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसकी आलोचना हुई, लेकिन घरेलू राजनीति में इसने ट्रंप की छवि को एक साहसी निर्णय लेने वाले नेता के रूप में पुख्ता किया







