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ग्रीनलैंड पर ट्रंप की यू-टर्न नीति यूरोप को राहत टैरिफ की धमकी वापस ग्रीनलैंड की चाह अब भी कायम

ग्रीनलैंड पर ट्रंप की यू-टर्न नीति यूरोप को राहत टैरिफ की धमकी वापस ग्रीनलैंड की चाह अब भी कायम
नवजोत कौर सिद्धू
On: जनवरी 22, 2026 3:26 अपराह्न
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डोलीबार्ता।अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ग्रीनलैंड को लेकर यूरोपीय देशों पर टैरिफ लगाने की धमकी वापस लेकर अंतरराष्ट्रीय राजनीति में एक बड़ा संदेश दिया है। ट्रंप ने साफ शब्दों में कहा कि अब वे डेनमार्क समेत किसी भी यूरोपीय देश पर ग्रीनलैंड के मुद्दे को लेकर कोई टैरिफ नहीं लगाएंगे। इस फैसले को यूरोप के लिए राहत के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि हाल के दिनों में ट्रंप के बयानों से अमेरिका-यूरोप संबंधों में तनाव की आशंका बढ़ गई थी।

हालांकि, टैरिफ की धमकी वापस लेने के बावजूद ट्रंप की ग्रीनलैंड को लेकर इच्छा जस की तस बनी हुई है। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य ग्रीनलैंड को हासिल करना है पूरा अधिकार, मालिकाना हक और नियंत्रण के साथ लेकिन इसके लिए वे सैन्य बल का प्रयोग नहीं करेंगे।

दावोस से सोशल मीडिया तक, ट्रंप का बदला हुआ रुख

ट्रंप ने बुधवार को सोशल मीडिया के जरिए यह घोषणा की। इससे पहले उन्होंने स्विट्जरलैंड के दावोस में चल रहे वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में अपने भाषण के दौरान भी ग्रीनलैंड को लेकर अपने रुख पर बात की थी। दावोस में ट्रंप ने कहा कि वे ग्रीनलैंड पर कब्जा करने के लिए सैन्य ताकत के इस्तेमाल की बात से पीछे हट रहे हैं। यह बयान ऐसे समय आया जब वैश्विक मंच पर अमेरिकी विस्तारवादी नीति को लेकर सवाल उठ रहे थे।

ट्रंप ने अपने भाषण में यह भी जोड़ा कि वे किसी टकराव के पक्ष में नहीं हैं, लेकिन अमेरिका के राष्ट्रीय हितों को सर्वोपरि मानते हैं। उनके मुताबिक, ग्रीनलैंड रणनीतिक रूप से बेहद अहम है और आने वाले समय में इसकी अहमियत और बढ़ने वाली है।

ग्रीनलैंड क्यों अहम? ट्रंप की दलीलें

ट्रंप ने ग्रीनलैंड को लेकर कई बार विवादित बयान दिए हैं। उन्होंने कहा कि भले ही यह इलाका ठंडा हो और वहां रहना आसान न हो, लेकिन अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए यह बेहद जरूरी है। ट्रंप का मानना है कि आर्कटिक क्षेत्र भविष्य में वैश्विक राजनीति और सुरक्षा के लिहाज से निर्णायक भूमिका निभाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका ने द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान और उसके बाद यूरोप को बचाने में अहम भूमिका निभाई। उनके शब्दों में, “दशकों से हमने यूरोप को जो दिया है, उसके मुकाबले यह बहुत छोटी मांग है।” इस बयान को यूरोपीय देशों ने अमेरिका के दबाव की राजनीति के रूप में देखा है।

नाटो और यूरोप पर तीखा हमला

अपने भाषण में ट्रंप ने नाटो और यूरोपीय देशों पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि नाटो को अमेरिका के विस्तारवादी इरादों में बाधा नहीं डालनी चाहिए। ट्रंप ने चेतावनी देते हुए कहा कि अमेरिका अपने हितों को सबसे ऊपर रखेगा और अगर वह चाहे तो ताकत के बल पर भी अपने लक्ष्य हासिल कर सकता है।

हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि वे ऐसा नहीं करना चाहते। “अगर मैं ज्यादा ताकत और बल का इस्तेमाल करूं तो हमें कोई रोक नहीं सकता, लेकिन मुझे इसकी जरूरत नहीं है,” ट्रंप ने कहा। यह बयान जहां एक ओर आक्रामक लहजे को दर्शाता है, वहीं दूसरी ओर कूटनीतिक संतुलन बनाने की कोशिश भी करता है।

धमकी वापस, लेकिन संदेश साफ

कुल मिलाकर, ट्रंप ने यूरोपीय देशों पर टैरिफ लगाने की धमकी फिलहाल वापस ले ली है और सैन्य कार्रवाई से भी पीछे हटने की बात कही है। लेकिन ग्रीनलैंड पर मालिकाना हक पाने की इच्छा उन्होंने खुले तौर पर दोहराई है। अंतरराष्ट्रीय मंच पर किसी अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा किसी दूसरे देश के इलाके को लेकर इतनी स्पष्ट भाषा में बात करना अपने आप में असाधारण माना जा रहा है।

Swati Pandey

A versatile writer mainly works on trending news, daily updates from politics, business, crime, current affairs and entertainment.

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