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स्विट्जरलैंड के दावोस में WEF के वार्षिक सम्मेलन में ट्रंप ने ग्रीनलैंड को अमेरिका का हिस्सा बताया 

स्विट्जरलैंड के दावोस में WEF के वार्षिक सम्मेलन में ट्रंप ने ग्रीनलैंड को अमेरिका का हिस्सा बताया 
नवजोत कौर सिद्धू
On: जनवरी 22, 2026 2:45 अपराह्न
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विश्व आर्थिक मंच (WEF) की दावोस में आयोजित वार्षिक बैठक हमेशा से वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था का केंद्र रही है। डोनाल्ड ट्रंप का इसमें शामिल होना और ग्रीनलैंड जैसे रणनीतिक द्वीप पर टिप्पणी करना अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में एक बड़ा मोड़ था।

विश्व आर्थिक मंच (WEF) और दावोस – यह सम्मेलन कहाँ और क्यों होता है?

विश्व आर्थिक मंच (World Economic Forum) एक गैर-लाभकारी संस्था है, जिसका मुख्यालय जिनेवा, स्विट्जरलैंड में है। इसकी वार्षिक बैठक हर साल जनवरी के अंत में दावोस (Davos) में होती है।

  • स्थान –  दावोस, स्विट्जरलैंड के आल्प्स पहाड़ों में स्थित एक छोटा सा कस्बा है। यह अपनी ऊंचाई और शांति के लिए जाना जाता है, जो इसे दुनिया के सबसे शक्तिशाली नेताओं की गुप्त और खुली वार्ताओं के लिए सुरक्षित स्थान बनाता है।
  • उद्देश्य – इसे मनाने या आयोजित करने का मुख्य उद्देश्य दुनिया के सामने मौजूद सबसे गंभीर चुनौतियों (जैसे जलवायु परिवर्तन, आर्थिक असमानता, तकनीक और भू-राजनीतिक तनाव) पर चर्चा करना है। इसमें ‘पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप’ पर जोर दिया जाता है।

डोनाल्ड ट्रंप का दावोस भाषण और ग्रीनलैंड का मुद्दा

2020 के दावोस सम्मेलन के दौरान, तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का भाषण काफी चर्चा में रहा। उन्होंने न केवल अमेरिकी अर्थव्यवस्था की प्रशंसा की, बल्कि अपनी उस पुरानी इच्छा को भी दोहराया जिसने पूरी दुनिया को चौंका दिया था ग्रीनलैंड को खरीदना।

उन्होंने ग्रीनलैंड को अमेरिका का हिस्सा क्यों बताया?

ट्रंप ने ग्रीनलैंड को “अमेरिका का हिस्सा” सीधे तौर पर भौगोलिक रूप से नहीं, बल्कि अपनी रणनीतिक आकांक्षा (Strategic Ambition) के तौर पर पेश किया। उन्होंने इसे एक “विशाल रियल एस्टेट सौदा” माना। उनके ऐसा कहने के पीछे मुख्य कारण थे|

  • प्राकृतिक संसाधन – ग्रीनलैंड में कोयला, जस्ता, तांबा, लोहा और दुर्लभ खनिज (Rare Earth Materials) का भंडार है।
  • आर्कटिक पर नियंत्रण – जैसे-जैसे ग्लोबल वार्मिंग से बर्फ पिघल रही है, नए शिपिंग रूट खुल रहे हैं। ट्रंप चाहते थे कि अमेरिका आर्कटिक क्षेत्र में रूस और चीन के बढ़ते प्रभाव को रोकने के लिए ग्रीनलैंड पर नियंत्रण रखे।
  • सुरक्षा (Thule Air Base) – अमेरिका का वहां पहले से ही एक बड़ा सैन्य अड्डा है।

 “बल का इस्तेमाल नहीं करेंगे” का गहरा अर्थ

ट्रंप ने अपने बयानों में स्पष्ट किया कि वे ग्रीनलैंड को “सौदे” के माध्यम से चाहते हैं, युद्ध के माध्यम से नहीं।

  • व्यापारिक सोच – एक बिजनेसमैन होने के नाते, ट्रंप ने इसे “जमीन की खरीद” (जैसे 1867 में अमेरिका ने रूस से अलास्का खरीदा था) के रूप में देखा।
  • लोकतांत्रिक छवि –  “बल का प्रयोग न करने” का मतलब था कि अमेरिका एक हमलावर देश के रूप में नहीं दिखना चाहता था। वे डेनमार्क को भारी भुगतान या किसी रणनीतिक अदला-बदली का प्रस्ताव दे रहे थे।
  • कूटनीतिक दबाव –  यह कहकर वह डेनमार्क और ग्रीनलैंड की सरकार को यह संदेश दे रहे थे कि हम बातचीत के लिए तैयार हैं, लेकिन हमारी रुचि बहुत गहरी है।

वे दुनिया को क्या साबित करना चाहते थे?

ट्रंप के इस बयान के पीछे कई संदेश छिपे थे- 

  • “America First” की धमक – वे यह दिखाना चाहते थे कि अमेरिका अपनी सीमाओं और प्रभाव को बढ़ाने के लिए कुछ भी कर सकता है।
  • चीन को चेतावनी –  चीन ग्रीनलैंड में बुनियादी ढांचे (Airports) में निवेश करने की कोशिश कर रहा था। ट्रंप ने ग्रीनलैंड पर दावा ठोककर चीन को बता दिया कि यह क्षेत्र अमेरिका के प्रभाव क्षेत्र में है।
  • यूरोप की प्रासंगिकता –  वे यूरोपीय देशों (विशेषकर डेनमार्क) को यह जताना चाहते थे कि अमेरिका के पास आर्थिक शक्ति है और वह वैश्विक मानचित्र को बदलने की क्षमता रखता है।

वैश्विक प्रतिक्रिया –  किस देश ने क्या कहा?

ट्रंप के इस रुख पर दुनिया भर में तीखी प्रतिक्रियाएं हुईं|

पक्ष  प्रतिक्रिया 
डेनमार्कडेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सन ने इसे “बेतुका” (Absurd) बताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि ग्रीनलैंड बिकाऊ नहीं है। 
ग्रीनलैंडग्रीनलैंड की सरकार ने कहा, “हम व्यापार के लिए खुले हैं, लेकिन बिक्री के लिए |
रूस रूस ने इसे अमेरिका की विस्तारवादी नीति और आर्कटिक में अनावश्यक सैन्यीकरण की कोशिश बताया|
चीनीचीनी मीडिया ने इसे अमेरिका की ‘औपनिवेशिक मानसिकता’ का उदाहरण कहा। 
जर्मनी/फ्रांस यूरोपीय संघ के नेताओं ने इसे अंतरराष्ट्रीय संप्रभुता का अपमान माना। 

विश्लेषण

दावोस में ट्रंप का यह बयान केवल एक रीयल एस्टेट डील नहीं थी, बल्कि 21वीं सदी की “नई महान खेल” (New Great Game) की शुरुआत थी। ग्रीनलैंड को लेकर उनकी टिप्पणी ने यह साबित कर दिया कि आने वाले समय में युद्ध केवल सीमाओं के लिए नहीं, बल्कि उन संसाधनों के लिए होंगे जो बर्फ के नीचे दबे हैं।

भले ही डेनमार्क ने इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया, लेकिन ट्रंप ने दुनिया का ध्यान आर्कटिक की ओर खींचने में सफलता हासिल की। आज भी अमेरिका ग्रीनलैंड में अपना वाणिज्य दूतावास (Consulate) खोलकर वहां अपनी पकड़ मजबूत कर रहा है।

Swati Pandey

A versatile writer mainly works on trending news, daily updates from politics, business, crime, current affairs and entertainment.

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