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ग्रीनलैंड पर कब्जे के विरोध करने पर ट्रम्प ने यूरोपीय देशों को टैरिफ लगाने की दी चेतावनी

ग्रीनलैंड पर कब्जे के विरोध करने पर ट्रम्प ने यूरोपीय देशों को टैरिफ लगाने की दी चेतावनी
नवजोत कौर सिद्धू
On: जनवरी 17, 2026 4:14 अपराह्न
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जनवरी 2026 में अमेरिका और यूरोपीय देशों के बीच ‘ग्रीनलैंड’ (Greenland) को लेकर उपजा तनाव एक गंभीर अंतरराष्ट्रीय संकट का रूप ले चुका है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ग्रीनलैंड पर अमेरिकी नियंत्रण की अपनी योजना का विरोध करने वाले यूरोपीय देशों पर भारी टैरिफ (Tariffs) लगाने की चेतावनी दी है।

ग्रीनलैंड विवाद की पृष्ठभूमि: ट्रंप क्यों करना चाहते हैं कब्जा?

राष्ट्रपति ट्रंप ने ग्रीनलैंड को अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक अनिवार्य “संपत्ति” घोषित किया है। उनके इस दावे के पीछे मुख्य रूप से तीन बड़े कारण हैं|

  • चीन और रूस का डर –  ट्रंप का दावा है कि अगर अमेरिका ने ग्रीनलैंड पर नियंत्रण नहीं किया, तो रूस या चीन वहां अपना सैन्य आधार बना लेंगे। उन्होंने इसे अमेरिकी सुरक्षा में एक “बड़ा छेद” (Big Hole) बताया है।
  • रणनीतिक स्थिति – ग्रीनलैंड आर्कटिक महासागर और उत्तरी अटलांटिक के बीच स्थित है। यह भविष्य के समुद्री व्यापारिक मार्गों (जो जलवायु परिवर्तन के कारण खुल रहे हैं) पर नियंत्रण के लिए सबसे महत्वपूर्ण स्थान है।
  • प्राकृतिक संसाधन –  ग्रीनलैंड ‘रेयर अर्थ मिनरल्स’ (Rare Earth Minerals) का भंडार है। ये खनिज स्मार्टफोन, इलेक्ट्रिक कारों और मिसाइल प्रणालियों के लिए आवश्यक हैं। वर्तमान में इन पर चीन का एकाधिकार है, जिसे ट्रंप तोड़ना चाहते हैं।

कौन से देश कर रहे हैं विरोध और किस प्रकार?

यूरोपीय देशों ने ट्रंप की इस योजना को “संप्रभुता का उल्लंघन” और “औपनिवेशिक सोच” करार दिया है।

विरोध करने वाले प्रमुख देश-

  • डेनमार्क (Denmark) –  ग्रीनलैंड डेनमार्क के साम्राज्य का हिस्सा है। डेनमार्क ने स्पष्ट कर दिया है कि “ग्रीनलैंड बिकाऊ नहीं है।”
  • ग्रीनलैंड (Greenland) – वहां की स्थानीय सरकार ने कहा है कि उनका भविष्य वहां के लोग तय करेंगे, वाशिंगटन नहीं।
  • फ्रांस और जर्मनी –  इन दोनों देशों ने इस मुद्दे पर डेनमार्क का कड़ा समर्थन किया है।
  • यूनाइटेड किंगडम (UK), इटली और नीदरलैंड –  इन देशों ने भी साझा बयान जारी कर अमेरिकी दबाव की निंदा की है।

विरोध का स्वरूप

  • कूटनीतिक विरोध –  डेनमार्क और ग्रीनलैंड के विदेश मंत्रियों ने व्हाइट हाउस में मुलाकात की, लेकिन बातचीत “मौलिक असहमति” के साथ समाप्त हुई।
  • सैन्य बल का प्रदर्शन – तनाव बढ़ने पर फ्रांस, जर्मनी, स्वीडन और नॉर्वे ने ग्रीनलैंड में अपनी सेनाओं (Boots on ground) की तैनाती की है ताकि अमेरिकी अतिक्रमण को रोका जा सके। यह नाटो (NATO) के भीतर एक अभूतपूर्व सैन्य दरार को दर्शाता है।

ट्रंप की टैरिफ चेतावनी –  कितने और कैसे?

ट्रंप ने कहा है कि जो देश ग्रीनलैंड के मुद्दे पर अमेरिका का साथ नहीं देंगे, उन पर “दंड के रूप में” आर्थिक टैरिफ लगाए जाएंगे।

  • टैरिफ की दर – ट्रंप ने 25% तक के टैरिफ लगाने का संकेत दिया है। उन्होंने फ्रांस और जर्मनी को दी गई पिछली चेतावनियों का हवाला देते हुए कहा कि वह इसे फिर से दोहरा सकते हैं।
  • कैसे लगेंगे टैरिफ – राष्ट्रपति International Emergency Economic Powers Act (IEEPA) का उपयोग कर सकते हैं, जिससे उन्हें कांग्रेस की मंजूरी के बिना भी व्यापारिक प्रतिबंध लगाने की शक्ति मिलती है।

यूरोपीय अर्थव्यवस्था पर असर और होने वाली हानि

यदि अमेरिका 25% टैरिफ लागू करता है, तो यूरोप के लिए इसके परिणाम विनाशकारी हो सकते हैं-

क्षेत्रसंभावित प्रभाव 
ऑटोमोबाइलजर्मनी की कार कंपनियों (BMW, VW) के निर्यात पर भारी चोट पड़ेगी। 
फार्मास्युटिकल दवाओं की कीमतों में उछाल आएगा, जिससे स्वास्थ्य सेवाएं महंगी होंगी। 
कृषि उत्पाद यूरोपीय वाइन, पनीर और लग्जरी उत्पादों का अमेरिकी बाजार खत्म हो जाएगा। 

आर्थिक स्थिति कैसे होगी डंवाडोल?

  • मुद्रास्फीति (Inflation) – टैरिफ के कारण आयातित सामान महंगा हो जाएगा, जिससे यूरोप और अमेरिका दोनों में महंगाई बढ़ेगी।
  • स्टॉक मार्केट में गिरावट –  अनिश्चितता के कारण निवेशकों का भरोसा टूटेगा, जिससे वैश्विक शेयर बाजारों में भारी गिरावट आ सकती है।
  • यूरो की कमजोरी –  डॉलर के मुकाबले यूरो का मूल्य गिर सकता है, जिससे यूरोपीय देशों की क्रय शक्ति कम होगी।

किस वर्ग को होगा नुकसान और अमेरिका को क्या फायदा?

नुकसान झेलने वाले वर्ग-

  • आम उपभोक्ता –  सामान की कीमतें बढ़ने से सबसे ज्यादा चोट मध्यम और निम्न वर्ग की जेब पर पड़ेगी।
  • व्यापारी और निर्यातक-  करोड़ों डॉलर का व्यापार ठप होने से कई उद्योग बंद हो सकते हैं।
  • नौकरीपेशा लोग – व्यापार घटने से छंटनी की संभावना बढ़ेगी, खासकर विनिर्माण क्षेत्र में।

अमेरिका को संभावित फायदा

  • संसाधनों पर कब्जा –  यदि ट्रंप सफल होते हैं, तो अमेरिका को भविष्य की ऊर्जा और खनिजों का विशाल भंडार मिल जाएगा।
  • रक्षा लाभ – आर्कटिक क्षेत्र में रूस की सैन्य गतिविधियों पर नजर रखने के लिए अमेरिका को सबसे मजबूत चौकी मिल जाएगी।
  • राजस्व – टैरिफ से अमेरिकी सरकार को अरबों डॉलर का कर प्राप्त होगा (हालांकि यह घरेलू उपभोक्ताओं के लिए सामान महंगा कर देगा)।

ग्रीनलैंड को लेकर ट्रंप की यह ‘आर्थिक युद्ध’ की नीति ट्रांस-अटलांटिक संबंधों (US-Europe) को सबसे निचले स्तर पर ले आई है। जहां ट्रंप इसे ‘अमेरिका फर्स्ट’ और ‘राष्ट्रीय सुरक्षा’ का मुद्दा मान रहे हैं, वहीं यूरोप इसे वैश्विक व्यवस्था के लिए खतरा मान रहा है। यदि यह गतिरोध सैन्य टकराव या पूर्ण आर्थिक युद्ध में बदलता है, तो 2026 वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए एक काला वर्ष साबित हो सकता है।

Swati Pandey

A versatile writer mainly works on trending news, daily updates from politics, business, crime, current affairs and entertainment.

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