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ग्रीनलैंड को पाने के लिए अमेरिका का नया प्लान हर ग्रीनलैंड नागरिक को दिया पैसों का ऑफर

ग्रीनलैंड को पाने के लिए अमेरिका का नया प्लान
नवजोत कौर सिद्धू
On: जनवरी 9, 2026 7:07 अपराह्न
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ग्रीनलैंड को लेकर डोनाल्ड ट्रंप की हालिया चर्चाएं पूरी दुनिया में सुर्खियां बटोर रही हैं। क्योंकि हालिया रिपोर्ट्स जनवरी 2026 के अनुसार ट्रंप प्रशासन ने ग्रीनलैंड को अमेरिका का हिस्सा बनाने के लिए एक नया और चौंकाने वाला कैश ऑफर तैयार किया है।

ग्रीनलैंड नागरिक के लिए ऑफर –  कितना पैसा और किसने कहा?

हालिया रिपोर्ट्स और अंतरराष्ट्रीय मीडिया जैसे रॉयटर्स और अन्य समाचार एजेंसियां के अनुसार राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के करीबियों और व्हाइट हाउस के सलाहकारों ने ग्रीनलैंड के नागरिकों को लुभाने के लिए सीधे नकद भुगतान (Direct Cash Payment) का प्रस्ताव तैयार किया है।

कितना पैसा –  चर्चा के अनुसार ग्रीनलैंड के प्रत्येक नागरिक को $10,000 से $100,000 लगभग 8.5 लाख से 85 लाख रुपये तक की एकमुश्त राशि देने का विचार है।

किसने कहा –  व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने पुष्टि की है कि ट्रंप और उनकी राष्ट्रीय सुरक्षा टीम ग्रीनलैंड के अधिग्रहण के विकल्पों पर सक्रिय रूप से चर्चा कर रही है। इसके अलावा विदेश मंत्री मार्को रुबियो भी इस मामले में राजनयिक स्तर पर सक्रिय हैं।

लक्ष्य – ग्रीनलैंड की कुल जनसंख्या लगभग 57,000 है। इस भारी-भरकम राशि के जरिए अमेरिका वहां के स्थानीय लोगों का समर्थन हासिल करना चाहता है ताकि वे डेनमार्क से अलग होकर अमेरिका के साथ जुड़ने (Secession) के लिए तैयार हो जाएं।

क्यों खरीदना चाहते हैं ट्रंप ग्रीनलैंड को –डोनाल्ड ट्रंप इसे केवल एक रियल एस्टेट डील नहीं मानते बल्कि उनके लिए यह राष्ट्रीय सुरक्षा की अनिवार्यता है। इसके मुख्य कारण निम्नलिखित हैं- 

सामरिक और सैन्य महत्व (Geopolitical Strategy)-ग्रीनलैंड की भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि यह उत्तरी ध्रुव (Arctic) के पास अमेरिका यूरोप और रूस के बीच एक महत्वपूर्ण बफर जोन का काम करता है। अमेरिका का पिटुफ़िक स्पेस बेस (Pituffik Space Base) पहले से ही वहां मौजूद है जो मिसाइल चेतावनी प्रणाली के लिए महत्वपूर्ण है।

दुर्लभ खनिज संसाधन (Natural Resources)-ग्रीनलैंड की बर्फ के नीचे रेयर अर्थ एलिमेंट्स (Rare Earth Elements) जैसे नियोडिमियम के विशाल भंडार हैं। ये खनिज इलेक्ट्रिक वाहनों पवन टरबाइन और आधुनिक हथियार प्रणालियों के लिए अनिवार्य हैं। वर्तमान में इन पर चीन का एकाधिकार है जिसे ट्रंप खत्म करना चाहते हैं।

रूस और चीन का मुकाबला-रूस आर्कटिक क्षेत्र में अपनी सैन्य शक्ति बढ़ा रहा है, और चीन खुद को नियर-आर्कटिक स्टेट घोषित कर वहां पैर पसारने की कोशिश कर रहा है। ट्रंप का मानना है कि यदि अमेरिका ने ग्रीनलैंड पर नियंत्रण नहीं किया तो यह सुरक्षा का ब्लैक होल बन जाएगा।

नए व्यापार मार्ग (Shipping Routes)-ग्लोबल वार्मिंग के कारण बर्फ पिघल रही है जिससे आर्कटिक में नए समुद्री रास्ते खुल रहे हैं। ये रास्ते एशिया से यूरोप की दूरी को काफी कम कर सकते हैं। ग्रीनलैंड पर कब्जा होने का मतलब है इन रास्तों पर अमेरिका का दबदबा।

क्या बिक सकता है कोई देश

इतिहास में अमेरिका ने पहले भी जमीनें खरीदी हैं- 

  • लुइसियाना परचेज (1803) – फ्रांस से खरीदा।
  • अलास्का (1867) – रूस से $7.2 मिलियन में खरीदा।
  • वर्जिन आइलैंड्स (1917) –  डेनमार्क से ही $25 मिलियन में खरीदा।

हालांकि 21वीं सदी में अंतरराष्ट्रीय कानून आत्मनिर्णय के अधिकार (Right to Self-Determination) पर आधारित हैं। ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री जेन्स-फ्रेडरिक नील्सन ने स्पष्ट कर दिया है कि ग्रीनलैंड बिकाऊ नहीं है।डेनमार्क ने भी इस विचार को हास्यास्पद बताया है।

विवाद और वर्तमान स्थिति 

ट्रंप प्रशासन ने यह भी संकेत दिया है कि अगर कूटनीति काम नहीं करती तो वे सैन्य विकल्प पर भी विचार कर सकते हैं, जिससे नाटो (NATO) देशों के बीच तनाव बढ़ गया है। ग्रीनलैंड के लोग अपनी संस्कृति और स्वायत्तता को लेकर काफी संवेदनशील हैं और ताज़ा सर्वेक्षणों के अनुसार 85% नागरिक अमेरिका का हिस्सा बनने के खिलाफ हैं।

Swati Pandey

A versatile writer mainly works on trending news, daily updates from politics, business, crime, current affairs and entertainment.

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