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नाइजीरिया की सेना की बोर्नो राज्य में बोको हराम के खिलाफ बड़ी कार्रवाई 

नाइजीरिया की सेना की बोर्नो राज्य में बोको हराम के खिलाफ बड़ी कार्रवाई 
नवजोत कौर सिद्धू
On: फ़रवरी 2, 2026 11:16 पूर्वाह्न
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नाइजीरियाई सेना ने पूर्वोत्तर बोर्नो राज्य में एक बड़ी सैन्य कार्रवाई को अंजाम देते हुए आतंकी संगठन बोको हराम को एक गहरा जख्म दिया है। इस अभियान में संगठन का एक प्रमुख कमांडर, अबू खालिद, अपने 10 अन्य साथियों के साथ मारा गया है। यह घटना फरवरी 2026 की शुरुआत में हुई है, जो इस क्षेत्र में आतंकवाद के खिलाफ जारी लड़ाई में एक महत्वपूर्ण मोड़ मानी जा रही है

ऑपरेशन का विवरण – कैसे हुई कार्रवाई?

नाइजीरियाई सेना के प्रवक्ता सानी उबा द्वारा जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, यह ऑपरेशन बोर्नो राज्य के कोंडुगा (Konduga) क्षेत्र और मशहूर सांबीसा जंगल (Sambisa Forest) के बाहरी इलाकों में शनिवार रात (1 फरवरी 2026) को अंजाम दिया गया।

  • रणनीति – सेना ने एक सटीक खुफिया जानकारी के आधार पर रात के समय छापेमारी (Night Raid) की।
  • हथियारों की बरामदगी – मुठभेड़ के बाद सेना ने मौके से 5 एके-47 राइफलें, भारी मात्रा में गोला-बारूद, रसद सामग्री (Logistics), साइकिलें और बड़ी मात्रा में दवाइयां बरामद कीं।
  • शून्य हताहत – सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि इस भीषण गोलाबारी में नाइजीरियाई सैनिकों को कोई नुकसान नहीं पहुंचा।

कौन था अबू खालिद? (अबू खालिद समित का इतिहास)

अबू खालिद, जिसे संगठन के भीतर एक रणनीतिकार के रूप में जाना जाता था, बोको हराम की पदानुक्रम (Hierarchy) में बहुत ऊंचा स्थान रखता था।

  • वर्चस्व – वह सांबीसा जंगल क्षेत्र में बोको हराम का ‘सेकंड-इन-कमांड’ माना जाता था। वह केवल एक लड़ाका नहीं, बल्कि एक ऑपरेशंस कमांडर था।
  • भूमिका –  अबू खालिद मुख्य रूप से रसद (Logistics) और नए हमलों की योजना बनाने का काम संभालता था। सांबीसा एक्सिस में होने वाले ज्यादातर हमलों के पीछे उसी का दिमाग होता था।
  • आतंक का चेहरा –  उस पर कई निर्दोष नागरिकों की हत्या, अपहरण और सैन्य चौकियों पर हमले का आरोप था। उसकी मौत को बोको हराम के लिए एक बड़ा ‘लॉजिस्टिकल सेटबैक’ माना जा रहा है।

बोको हराम –  संगठन का संक्षिप्त परिचय

  • बोको हराम (Boko Haram) – आधिकारिक नाम ‘जमात अहलुस सुन्ना लिद्दावती वल-जिहाद’ है।
  • अर्थ – स्थानीय होउसा भाषा में इसका अर्थ है “पश्चिमी शिक्षा हराम (वर्जित) है।”
  • स्थापना – इसकी स्थापना 2002 में मोहम्मद यूसुफ ने की थी। शुरुआत में यह एक धार्मिक आंदोलन था, लेकिन 2009 में यूसुफ की पुलिस हिरासत में मौत के बाद यह एक हिंसक जिहादी गुट में बदल गया।
  • विचारधारा –  यह समूह नाइजीरिया में सख्त शरिया कानून लागू करना चाहता है और पश्चिमी लोकतंत्र व शिक्षा को पूरी तरह नकारता है।

विभाजन – वर्तमान में इसके दो मुख्य गुट हैं

  • JAS –  मूल बोको हराम गुट।
  • ISWAP (Islamic State West Africa Province) –  वह गुट जिसने ISIS के प्रति निष्ठा जताई है।

संघर्ष का मानवीय और सुरक्षा प्रभाव

पिछले 15 वर्षों से जारी इस उग्रवाद ने नाइजीरिया और उसके पड़ोसी देशों (नाइजर, चाड, कैमरून) को बुरी तरह प्रभावित किया है।

प्रभाव का प्रकारअनुमानित आंकड़े 
कुल मौतेंलगभग 35,000 से 40,000 (नागरिक और सैनिक) 
विस्थापन  20 लाख से अधिक लोग बेघर हुए 
मुख्य क्षेत्रबोर्नो, योबे और अदामावा राज्य 

वर्तमान सैन्य रणनीति –  ‘रिएक्टिव’ से ‘प्रोएक्टिव’ की ओर

रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि 2026 में नाइजीरियाई सेना ने अपनी रणनीति बदली है। पहले सेना केवल हमलों का जवाब देती थी (Reactive), लेकिन अब वह उग्रवादियों के सुरक्षित ठिकानों (जैसे सांबीसा और टिम्बकटू ट्रायंगल) में घुसकर हमले कर रही है (Proactive)।

इसमें संयुक्त राज्य अमेरिका और अन्य अंतरराष्ट्रीय सहयोगियों द्वारा दी जा रही खुफिया जानकारी (Intelligence) और ड्रोन निगरानी की भी बड़ी भूमिका रही है। अबू खालिद पर हुआ हमला इसी बदली हुई रणनीति का परिणाम है।

अबू खालिद और उसके साथियों का खात्मा बोर्नो राज्य में शांति बहाली की दिशा में एक सकारात्मक कदम है। हालांकि, बोको हराम जैसे संगठन अक्सर नए कमांडर नियुक्त कर लेते हैं, इसलिए सेना के लिए चुनौती अभी समाप्त नहीं हुई है। वर्तमान में सेना सांबीसा जंगल और मंदारा पहाड़ियों में ‘क्लीयरेंस ऑपरेशन’ जारी रखे हुए है।

Pradeep Pandey

A versatile writer mainly works on politics, business, crime, current affairs and entertainment

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