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अमेरिका के संसद में H1-B वीजा खत्म करने के लिए बिल पेश 2027 तक समाप्त करने का लक्ष्य

अमेरिका के संसद में H1-B वीजा खत्म करने के लिए बिल पेश, 2027 तक समाप्त करने का लक्ष्य
नवजोत कौर सिद्धू
On: फ़रवरी 11, 2026 2:32 अपराह्न
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अमेरिकी संसद में हाल ही में पेश किया गया EXILE Act (एक्साइल एक्ट) वैश्विक तकनीकी जगत और विशेषकर भारतीय पेशेवरों के लिए एक बड़े झटके की तरह देखा जा रहा है। रिपब्लिकन सांसद ग्रेग स्ट्यूबी (Greg Steube) द्वारा पेश किए गए इस विधेयक का सीधा उद्देश्य अमेरिका के सबसे लोकप्रिय वर्क वीजा, H-1B को साल 2027 तक पूरी तरह समाप्त करना है।

यदि यह बिल कानून बनता है, तो इसका सबसे गंभीर प्रभाव भारत पर पड़ेगा, क्योंकि अमेरिका द्वारा जारी किए जाने वाले कुल H-1B वीजा का लगभग 70% से 75% हिस्सा भारतीय नागरिकों के पास होता है।

H-1B वीजा क्या है? (What is H-1B Visa?)

H-1B वीजा एक नॉन-इमिग्रेंट (गैर-आप्रवासी) वीजा है। यह अमेरिकी कंपनियों को उन विशिष्ट व्यवसायों (Specialty Occupations) में विदेशी कर्मचारियों को नियुक्त करने की अनुमति देता है, जिनमें उच्च तकनीकी या सैद्धांतिक ज्ञान की आवश्यकता होती है।

प्रमुख विशेषताएं

पात्रता-  इसके लिए आवेदन करने वाले व्यक्ति के पास संबंधित क्षेत्र में कम से कम स्नातक (Bachelor’s Degree) या उसके समकक्ष डिग्री होनी चाहिए।

क्षेत्र –  यह मुख्य रूप से आईटी (IT), इंजीनियरिंग, गणित, विज्ञान, चिकित्सा और वित्त जैसे क्षेत्रों के लिए उपयोग किया जाता है।

अवधि – यह वीजा सामान्यत 3 साल के लिए दिया जाता है, जिसे बढ़ाकर 6 साल तक किया जा सकता है।

ड्यूअल इंटेंट (Dual Intent) – इस वीजा की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसे रखने वाला व्यक्ति अमेरिका में काम करते हुए स्थायी निवास (Green Card) के लिए भी आवेदन कर सकता है।

नया विधेयक क्या है? (Understanding the EXILE Act)

फ्लोरिडा के सांसद ग्रेग स्ट्यूबी ने “Ending Exploitative Imported Labour Exemptions Act” (EXILE Act) पेश किया है। इस बिल के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं

  • 2027 तक समाप्ति –  बिल का प्रस्ताव है कि ‘इमिग्रेशन एंड नेशनलिटी एक्ट’ में संशोधन करके H-1B वीजा कार्यक्रम को चरणबद्ध तरीके से खत्म किया जाए और 2027 तक नई नियुक्तियों का कोटा शून्य (Zero) कर दिया जाए।
  • अमेरिकी प्राथमिकता –  बिल का तर्क है कि यह प्रोग्राम अमेरिकी नागरिकों (विशेषकर युवाओं) के रोजगार के अवसरों को छीन रहा है।
  • कानूनी आधार – यह बिल सीधे तौर पर उस कानूनी कोटे पर हमला करता है जिसके तहत वर्तमान में हर साल 65,000 (सामान्य) और 20,000 (मास्टर्स डिग्री धारक) वीजा जारी किए जाते हैं।

वीजा को खत्म करने के पीछे के तर्क

अमेरिकी सरकार और इस बिल के समर्थकों का मानना है कि H-1B वीजा कार्यक्रम अब अपने मूल उद्देश्य से भटक गया है। इसके पीछे निम्नलिखित प्रमुख कारण बताए जा रहे हैं|

1. ‘सस्ता श्रम’ बनाम ‘कुशल श्रम’

आलोचकों का कहना है कि अमेरिकी कंपनियां स्थानीय अमेरिकियों को अधिक वेतन देने के बजाय विदेशों से ‘सस्ते’ कर्मचारी लाने के लिए इस वीजा का इस्तेमाल कर रही हैं। इससे अमेरिकी बाजार में वेतन वृद्धि रुक गई है।

2. धोखाधड़ी और दुरुपयोग

सांसद स्ट्यूबी के अनुसार, कई बड़ी टेक कंपनियां और “आउटसोर्सिंग एजेंसियां” लॉटरी सिस्टम का दुरुपयोग करती हैं ताकि वे अधिक से अधिक वीजा हासिल कर सकें।

3. राष्ट्रीय सुरक्षा और आत्मनिर्भरता

ट्रंप प्रशासन और उनके समर्थकों का मानना है कि महत्वपूर्ण तकनीकी पदों पर विदेशियों की निर्भरता कम होनी चाहिए। उनका तर्क है कि इससे राष्ट्रीय सुरक्षा मजबूत होगी और अमेरिकी छात्र स्टेम (STEM) क्षेत्रों में आगे आएंगे।

4. $100,000 की नई फीस

हाल ही में एक अन्य प्रस्ताव में H-1B स्पॉन्सरशिप के लिए $100,000 (करीब 83 लाख रुपये) की वार्षिक फीस लगाने की बात भी कही गई है, ताकि कंपनियां विदेशी कर्मचारी रखने से पहले दो बार सोचें।

भारत पर इसका प्रभाव (Impact on India)

H-1B वीजा का खत्म होना भारत के लिए एक आर्थिक और सामाजिक संकट जैसा हो सकता है।

आईटी सेक्टर की रीढ़ पर हमला

भारत का $250 बिलियन से अधिक का आईटी निर्यात काफी हद तक अमेरिकी बाजार पर निर्भर है। टीसीएस (TCS), इंफोसिस (Infosys), और विप्रो (Wipro) जैसी कंपनियों के लिए अपने विशेषज्ञों को ऑन-साइट भेजना असंभव हो जाएगा, जिससे उनकी परिचालन लागत बढ़ जाएगी।

‘रिवर्स ब्रेन ड्रेन’ (Reverse Brain Drain)

यदि 2027 तक यह वीजा खत्म होता है, तो लाखों भारतीय पेशेवरों को स्वदेश लौटना पड़ सकता है। हालांकि यह भारत के लिए ‘टैलेंट पूल’ बढ़ाएगा, लेकिन अचानक इतनी बड़ी संख्या में अनुभवी लोगों के लिए भारत में उपयुक्त रोजगार और वेतन का स्तर बनाए रखना एक चुनौती होगी।

रेमिटेंस (विदेशी मुद्रा) में कमी

भारतीय प्रवासियों द्वारा अमेरिका से भेजा जाने वाला पैसा भारत के विदेशी मुद्रा भंडार का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। वीजा बंद होने से इस आय में भारी गिरावट आएगी।

स्टार्टअप इकोसिस्टम पर असर

अमेरिका में कई भारतीय मूल के उद्यमियों ने स्टार्टअप शुरू किए हैं। वीजा नियमों में सख्ती से नए उद्यमियों के लिए सिलिकॉन वैली के दरवाजे बंद हो सकते हैं।

वर्तमान स्थिति और भविष्य की राह

अभी यह केवल एक विधेयक (Bill) है, इसे कानून (Law) बनने के लिए कई चरणों से गुजरना होगा| इसे अमेरिकी प्रतिनिधि सभा (House of Representatives) में पारित होना होगा।  इसके बाद सीनेट (Senate) की मंजूरी जरूरी है। अंत में, राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद ही यह प्रभावी होगा।

क्या यह वास्तव में खत्म होगा?

विशेषज्ञों का मानना है कि इसे पूरी तरह खत्म करना अमेरिका के लिए भी आत्मघाती हो सकता है। गूगल, माइक्रोसॉफ्ट और एप्पल जैसी दिग्गज कंपनियां बिना विदेशी प्रतिभा के वैश्विक नेतृत्व खो सकती हैं। हालांकि, नियमों को इतना सख्त बनाया जा सकता है कि केवल अति-कुशल (High-Skilled) और बहुत अधिक वेतन पाने वाले लोग ही अमेरिका जा पाएं।

H-1B वीजा के भविष्य पर मंडराते बादल भारतीय युवाओं के लिए “चेतावनी और अवसर” दोनों हैं। एक तरफ जहां विदेश जाने का सपना मुश्किल हो रहा है, वहीं दूसरी तरफ यह भारत को अपनी “ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स” (GCC) को मजबूत करने का मौका दे रहा है।

Pradeep Pandey

A versatile writer mainly works on politics, business, crime, current affairs and entertainment

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