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जुगाड़ से कमाल डीजल और जले हुए आयल से चलने वाली सस्ती भट्टी नें दिखाई नई राह 

जुगाड़ से कमाल डीजल और जले हुए आयल से चलने वाली सस्ती भट्टी नें दिखाई नई राह 
नवजोत कौर सिद्धू
On: मार्च 21, 2026 8:24 अपराह्न
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अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते तनाव और ईंधन संकट का असर अब आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर साफ नजर आने लगा है। खासकर रसोई गैस (LPG) की कमी और बढ़ती कीमतों ने छोटे व्यापारियों और दुकानदारों के सामने गंभीर चुनौती खड़ी कर दी है। ऐसे कठिन समय में मध्यप्रदेश के जबलपुर से एक अनोखी और प्रेरणादायक खबर सामने आई है, जहां एक कारीगर ने अपनी सूझबूझ और जुगाड़ तकनीक से इस समस्या का सस्ता और प्रभावी समाधान खोज निकाला है।

जबलपुर MP के छोटी ओमती इलाके में रहने वाले 38 वर्षीय कारीगर आसिफ खान ने एक ऐसी भट्टी तैयार की है, जो डीजल और जले हुए आयल से चलती है। यह भट्टी न केवल सस्ती है, बल्कि लंबे समय तक उपयोगी भी साबित हो रही है।

आसिफ का नवाचार, 1 घंटे का खर्च महज 30 रुपये

आसिफ के इस नवाचार की खास बात यह है कि यह भट्टी महज 30 रुपये के खर्च में करीब एक घंटे तक आसानी से जल सकती है। यही वजह है कि इस अनोखी भट्टी को देखने और खरीदने के लिए लोगों की भीड़ उनके वर्कशॉप तक पहुंचने लगी है।

दोस्त की परेशानी नें दिखाई राह

आसिफ खान पेशे से इलेक्ट्रिशियन हैं और मोटर वाइंडिंग का काम करते हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने अपने हुनर और मेहनत के दम पर एक ऐसा समाधान तैयार किया, जो आज कई लोगों के लिए मददगार साबित हो रहा है। इस भट्टी को बनाने का विचार उन्हें तब आया, जब उनके एक करीबी दोस्त की बिरयानी की दुकान गैस की कमी के कारण बंद होने की कगार पर पहुंच गई थी। दोस्त की परेशानी ने आसिफ को कुछ नया सोचने के लिए प्रेरित किया।

इंटरनेट से ली मदद और किया जुगाड़ 

आसिफ ने Internet की मदद से जानकारी जुटाई और अपने अनुभव का इस्तेमाल करते हुए एक छोटी भट्टी तैयार की, जो जले हुए आयल से चल सकती थी। शुरुआत में यह एक प्रयोग था, लेकिन जब यह सफल हुआ, तो इसका उपयोग धीरे-धीरे बढ़ने लगा। अब यह भट्टी सिर्फ एक व्यक्ति की मदद तक सीमित नहीं रही, बल्कि कई छोटे व्यापारियों के लिए राहत का जरिया बन गई है।

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जला आयल देगा फ्लेम,खर्च भी कम

इस भट्टी की कार्यप्रणाली भी काफी दिलचस्प है। आसिफ बताते हैं कि इसमें शुरुआत में थोड़ी मात्रा में डीजल का उपयोग करके आग जलाई जाती है। इसके बाद जला हुआ आयल लगातार ईंधन का काम करता है और भट्टी को चालू रखता है। आमतौर पर वर्कशॉप में मिलने वाला यह आयल बेहद सस्ते दामों पर उपलब्ध हो जाता है, जिससे इसकी लागत और भी कम हो जाती है। एक लीटर आयल से यह भट्टी करीब एक घंटे तक लगातार जल सकती है।

भट्टी की सबसे बड़ी खासियत इसकी तेज आंच है। इसमें इतनी गर्मी उत्पन्न होती है कि चाय-नाश्ता बनाने से लेकर होटल और ढाबों के बड़े काम भी आसानी से किए जा सकते हैं। यही कारण है कि छोटे होटल संचालक, चाय दुकानदार और स्ट्रीट फूड विक्रेता इस भट्टी को तेजी से अपना रहे हैं।

5 से 6 हजार रुपये का खर्च, सुरक्षित भी

निर्माण की बात करें तो इस भट्टी को बनाने में ज्यादा जटिल तकनीक का इस्तेमाल नहीं किया गया है। इसमें मुख्य रूप से एक बर्नर, लोहे के पाइप और आयल रखने के लिए एक डिब्बे का उपयोग होता है। आसिफ का दावा है कि यह भट्टी सुरक्षित है और इसमें धुआं भी न के बराबर निकलता है, जो इसे पारंपरिक ईंधन विकल्पों से अलग बनाता है।

वर्तमान में आसिफ खान इस भट्टी को 5 से 6 हजार रुपये में तैयार कर रहे हैं। उनकी बढ़ती मांग का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वह रोजाना 2 से 3 भट्टियां बेच रहे हैं। स्थानीय स्तर पर ही नहीं, बल्कि आसपास के इलाकों से भी लोग इस भट्टी को खरीदने के लिए संपर्क कर रहे हैं।

आत्मनिर्भरता और समाधान का नवाचार

आसिफ का यह जुगाड़ केवल एक तकनीकी नवाचार नहीं है, बल्कि यह आत्मनिर्भरता और स्थानीय समाधान का बेहतरीन उदाहरण भी है। जहां एक ओर लोग महंगे गैस सिलेंडर और ईंधन की कमी से जूझ रहे हैं, वहीं आसिफ की यह पहल उन्हें एक सस्ता और टिकाऊ विकल्प दे रही है।

इस नवाचार ने यह साबित कर दिया है कि अगर इच्छाशक्ति और सोच में नवीनता हो, तो सीमित संसाधनों में भी बड़े समाधान निकाले जा सकते हैं। खासकर छोटे कारोबारियों के लिए यह भट्टी उम्मीद की एक नई किरण बनकर सामने आई है, जो न केवल उनकी लागत कम कर रही है, बल्कि उनके व्यवसाय को भी स्थिर बनाए रखने में मदद कर रही है।

आसिफ खान का यह प्रयास निश्चित ही सराहनीय है और यह अन्य लोगों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन सकता है। आने वाले समय में यदि इस तरह के स्थानीय नवाचारों को प्रोत्साहन और समर्थन मिले, तो यह न केवल रोजगार के नए अवसर पैदा कर सकते हैं, बल्कि देश को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।

Dr Pankaj Sharma

fitness coach and writer mainly work on sports, fitness, Religious, foreign news, and technology

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