2027 में भारत में नये एविएशन युग की शुरुआत हो रही है, और आनें वाले वर्षों में भारत इस दिशा में ऐतिहासिक बदलाव की तैयारी में है। इस तैयारी से जहां सैन्य ताकत बढेगी वहीं एक नये युग की भी शुरुआत होगी। दरअसल एयरोस्पेस कंपनी एयरबस नें हेलीकाप्टर निर्माण कि दिशा में अहम कदम उठाया है और स्वदेशी हेलीकाप्टर बनानें की बात कही है। इस कंपनी नें अपनी जो योजना तैयार की है उससे जानकारी सामनें आई है कि भारत में स्थापित नई प्रोडक्शन और असेंबली लाइन से पहला हेलीकाप्टर वर्ष 2027 की शुरुआत तक तैयार हो जाये। इसी परियोजना से भारत अब आत्मनिर्भर रक्षा नीति और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी मिशन के लिये एक अहम भूमिका की ओर अग्रसर नजर आ रहा है।
वहीं ऐसा माना जा रहा है कि एयरबस कंपनी का यह बड़ा कदम औद्योगिक निवेश तक सीमित नहीं होगा बल्कि विश्व स्तर हेलीकाप्टर निर्माण हब बनानें की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इस कदम के साथ ही रोजगार के तमाम अवसर खुलेंगे वहीं निर्यात के भी रास्ते बनेंगे, आपको बता दें कि कंपनी Tata Group के साथ मिलकर हेलीकाप्टर निर्माण करेगी।
भारत में हेलिकॉप्टर निर्माण से एक अध्याय की शुरुआत
एयरबस हेलिकॉप्टर्स के CEO ब्रूनो इवेन नें एक इंटरव्यू ते दौरान जानकारी साझा करते हुये बताया कि भारत की नई असेंबली लाइन से पहली बार 2027 में हैलीकॉप्टर तैयार कर लिये जानें की उम्मीद है और यह पहला मौका होगा जब भारत में ही पूरी तरह कोई हेलिकॉप्टर एसेंबल होगा।
इस परियोजना के बाद जहां भारत में एक नये युग की शुरुआत होगी वहीं Make In India और आत्मनिर्भर भारत जैसे राष्ट्रीय महलों को भी बल मिलेगा। जाननें वाली बात यह भी है कि भारत अब तक हेलीकॉप्टरों का बड़ा आयातक देश रहा है, लेकिन इस निर्माण के बाद भारत में हेलीकॉप्टर निर्माण के साथ निर्यात के भी मार्ग खुलेंगें।
वहीं विशेषज्ञ बताते हैं कि भारत में हेलिकॉप्टर निर्माण शुरू होने से एक तरफ इसकी लागत कम होगी वहीं डिलीवरी का भी समय घटेगा इसके साथ ही भारतीय ऑपरेटरों को स्थानीय सपोर्ट भी बेहतर तरीके से मिल सकेगा।
टाटा-एयरबस साझेदारी से बढ़ेगी तकनीकी क्षमता
जाननें वाली बात यह भी है कि टाटा एडवांस सिस्टम लिमिटेड के साथ मिलकर एयरबस इस प्रोजेक्ट को आगे बढ़ा रही है। दोनों कंपनियों के बीच यह सहयोग भारत में हाई-टेक एयरोस्पेस मैन्युफैक्चरिंग को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
गौरतलब है कि इस नई असेंबली लाइन का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों द्वारा वर्चुअल माध्यम से किया गया था। यह कार्यक्रम भारत-फ्रांस रणनीतिक साझेदारी को भी नई ऊंचाई देने वाला माना गया।
आपको बता दें कि इस परियोजना में एयरबस लगभग 1,000 करोड़ रुपये का निवेश कर रही है। इस निवेश से स्थानीय सप्लाई चेन विकसित होगी और भारतीय कंपनियों को वैश्विक एविएशन नेटवर्क से जुड़ने का अवसर मिलेगा।
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सिविल एविएशन में दिख रहा विशाल बाजार
एयरबस का मानना है कि भारत आने वाले वर्षों में हेलिकॉप्टरों का सबसे बड़ा बाजार बन सकता है। कंपनी के अनुसार, सिर्फ क्षेत्रीय कनेक्टिविटी और नागरिक उपयोग के लिए ही भारत में 1,000 से अधिक हेलिकॉप्टरों की मांग पैदा हो सकती है।
भारत जैसे विशाल और भौगोलिक रूप से विविध देश में हेलिकॉप्टर सेवाओं की जरूरत लगातार बढ़ रही है। पहाड़ी क्षेत्रों, दूरदराज गांवों, मेडिकल इमरजेंसी, पर्यटन, आपदा राहत और वीआईपी ट्रांसपोर्ट जैसे कई क्षेत्रों में हेलिकॉप्टरों की उपयोगिता तेजी से बढ़ रही है।
सरकार द्वारा क्षेत्रीय हवाई संपर्क योजनाओं को बढ़ावा देने से छोटे शहरों और दुर्गम इलाकों तक हवाई पहुंच आसान बनाने का लक्ष्य रखा गया है। ऐसे में हेलिकॉप्टर सेवाएं महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
रक्षा क्षेत्र में भी बड़ी उम्मीदें, कठिन क्षेत्र में क्षमता या परीक्षण
एयरबस सिर्फ नागरिक बाजार तक सीमित नहीं रहना चाहता। कंपनी को भारतीय सशस्त्र सेनाओं से भी बड़े ऑर्डर मिलने की उम्मीद है। भारतीय सेना पहले ही एच125 हेलिकॉप्टर को लीज पर उपयोग कर चुकी है और विशेष रूप से उत्तरी सीमाओं के कठिन इलाकों में इसकी क्षमता का परीक्षण किया जा चुका है।
उच्च ऊंचाई वाले क्षेत्रों में ऑपरेशन करने के लिए हल्के, शक्तिशाली और भरोसेमंद हेलिकॉप्टरों की आवश्यकता होती है। एयरबस का मानना है कि एच125 इस जरूरत को पूरी तरह पूरा करता है। यदि सेना इस प्लेटफॉर्म को अपनाती है, तो भविष्य में भारत से सैन्य हेलिकॉप्टरों का निर्यात भी संभव हो सकता है।
यह कदम भारत को रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने और विदेशी निर्भरता कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
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निर्यात के नए अवसर आयेंगे सामनें
एयरबस के सीईओ ने संकेत दिए हैं कि भारत में बनने वाले हेलिकॉप्टर सिर्फ घरेलू जरूरतों तक सीमित नहीं रहेंगे। भविष्य में इन्हें अन्य देशों को निर्यात करने की भी योजना है।
भारत की रणनीतिक लोकेशन, कम उत्पादन लागत और प्रशिक्षित इंजीनियरिंग प्रतिभा इसे वैश्विक निर्माण केंद्र बनने के लिए उपयुक्त बनाती है। यदि निर्यात शुरू होता है, तो भारत एशिया-प्रशांत क्षेत्र में हेलिकॉप्टर सप्लाई का प्रमुख केंद्र बन सकता है।
एच125 हेलिकॉप्टर,मल्टी-मिशन चॉपर, 7200 से अधिक यूनिट किये जा चुके हैं डिलीवर
एयरबस का एच125 हेलिकॉप्टर कंपनी की प्रसिद्ध एक्यूरेइल फैमिली का हिस्सा है। दुनिया के 137 देशों में इसके 7,200 से अधिक यूनिट डिलीवर किए जा चुके हैं और 2,600 से ज्यादा ऑपरेटर इसका उपयोग कर रहे हैं।
इस हेलिकॉप्टर की प्रमुख विशेषताओं में शामिल हैं-
- उच्च ऊंचाई पर बेहतरीन प्रदर्शन क्षमता
- शानदार मैनूवरेबिलिटी
- बेहतर विजिबिलिटी
- कम वाइब्रेशन वाला आरामदायक केबिन
- मल्टी-मिशन ऑपरेशन की क्षमता
इन्हीं खूबियों के कारण इसे पर्वतीय इलाकों, बचाव अभियानों, मेडिकल सेवाओं, निगरानी मिशनों और सैन्य उपयोग के लिए आदर्श माना जाता है।
रोजगार और स्थानीय उद्योग को मिलेगा बढ़ावा
भारत में हेलिकॉप्टर निर्माण शुरू होने से हजारों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार अवसर पैदा होने की संभावना है। एयरोस्पेस कंपोनेंट्स, इंजीनियरिंग सेवाओं, लॉजिस्टिक्स और मेंटेनेंस सेक्टर में भी नई कंपनियों को अवसर मिलेंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भारतीय एमएसएमई सेक्टर को भी फायदा होगा, क्योंकि सप्लाई चेन का बड़ा हिस्सा स्थानीय स्तर पर विकसित किया जाएगा।
आनें वाले समय में भारत बन सकता है वैश्विक एविएशन हब
भारत में हवाई यात्रा की बढ़ती मांग, तेजी से विकसित होता इंफ्रास्ट्रक्चर और सरकारी नीतियों का समर्थन देश को वैश्विक एविएशन उद्योग का प्रमुख केंद्र बना रहा है। एयरबस का निवेश इस विश्वास को और मजबूत करता है कि आने वाले वर्षों में भारत सिर्फ विमान उपभोक्ता नहीं, बल्कि निर्माता और निर्यातक भी बनेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि 2027 में जब पहला स्वदेशी एयरबस हेलिकॉप्टर भारतीय धरती से उड़ान भरेगा, तब यह सिर्फ एक तकनीकी उपलब्धि नहीं होगी, बल्कि भारत की औद्योगिक आत्मनिर्भरता और वैश्विक क्षमता का प्रतीक भी बनेगा।
ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि एयरबस और टाटा की साझेदारी भारत के एविएशन और रक्षा उद्योग के लिए मील का पत्थर साबित हो सकती है। सिविल एविएशन से लेकर सैन्य जरूरतों तक, हेलिकॉप्टर निर्माण की यह नई शुरुआत देश को तकनीकी रूप से सशक्त बनाने के साथ-साथ आर्थिक और रणनीतिक रूप से भी मजबूत करेगी। वर्ष 2027 का इंतजार अब सिर्फ एक नई मशीन के लिए नहीं, बल्कि भारत के एविएशन इतिहास के नए अध्याय के लिए किया जा रहा है।







