दक्षिण कोरिया के राजनीतिक इतिहास में 21 जनवरी 2026 का दिन एक ऐतिहासिक और बड़े बदलाव वाला दिन साबित हुआ है। सियोल सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट कोर्ट ने देश के पूर्व प्रधानमंत्री हान डक-सू (Han Duck-soo) को 23 साल की कठोर कारावास की सजा सुनाई है।
यह सजा दिसंबर 2024 में पूर्व राष्ट्रपति यून सुक येओल द्वारा लगाए गए विवादित ‘मार्शल लॉ’ (सैन्य शासन) और उसके बाद पैदा हुए ‘विद्रोह’ (Insurrection) में उनकी भूमिका के लिए दी गई है।
कौन थे पूर्व प्रधानमंत्री हान डक-सू
हान डक-सू दक्षिण कोरिया के एक अनुभवी नौकरशाह, राजनयिक और राजनीतिज्ञ रहे हैं। वे देश के उन गिने-चुने नेताओं में से एक थे जिन्होंने दक्षिणपंथी (कंजर्वेटिव) और उदारवादी (लिबरल) दोनों ही तरह की सरकारों के साथ काम किया।
- पूरा नाम – हान डक-सू (Han Duck-soo)
- जन्म – 18 जून 1949
- शिक्षा – सियोल नेशनल यूनिवर्सिटी (अर्थशास्त्र) और हार्वर्ड यूनिवर्सिटी (पीएचडी)।
- प्रधानमंत्री कार्यकाल (दो बार)
- प्रथम कार्यकाल – 2007 से 2008 (राष्ट्रपति रोह मू-ह्यून के तहत)।
- दूसरा कार्यकाल – 2022 से 2025 (राष्ट्रपति यून सुक येओल के तहत)।
- अन्य महत्वपूर्ण पद – वे अमेरिका में दक्षिण कोरिया के राजदूत (2009-2012) और वित्त मंत्री जैसे पदों पर भी रहे।
23 साल की सजा के मुख्य कारण
कोर्ट ने हान डक-सू को विद्रोह (Insurrection) का दोषी पाया है। सजा के पीछे के प्राथमिक कारण निम्नलिखित हैं:
- मार्शल लॉ में भागीदारी – 3 दिसंबर 2024 को तत्कालीन राष्ट्रपति यून सुक येओल ने अचानक देश में मार्शल लॉ की घोषणा कर दी थी। कोर्ट ने माना कि हान डक-सू ने इसे लागू करवाने के लिए कैबिनेट की बैठक बुलाकर इसे ‘प्रक्रियात्मक वैधता’ देने का प्रयास किया, जबकि यह असंवैधानिक था।
- संवैधानिक कर्तव्य का उल्लंघन -” जज ली जिन-क्वान ने कहा कि प्रधानमंत्री के रूप में उनका कर्तव्य संविधान की रक्षा करना था, लेकिन उन्होंने राष्ट्रपति के “स्व-तख्तापलट” (Self-Coup) का साथ दिया।
- साक्ष्यों को नष्ट करना – उन पर आरोप है कि उन्होंने मार्शल लॉ से जुड़े दस्तावेजों को नष्ट करने के आदेश दिए और बाद में जांच के दौरान झूठी गवाही (Perjury) दी।
- कोर्ट की टिप्पणी – अदालत ने कहा कि हान के कार्यों के कारण दक्षिण कोरिया एक बार फिर तानाशाही के उस काले दौर में वापस जा सकता था जहाँ नागरिक अधिकारों को कुचल दिया जाता था।
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उनके शासनकाल में दक्षिण कोरिया की स्थिति
हान डक-सू जब दूसरी बार (2022-2025) प्रधानमंत्री बने, तब दक्षिण कोरिया कई मोर्चों पर संघर्ष कर रहा था
- राजनीतिक अस्थिरता – उनकी सरकार को संसद में बहुमत वाली विपक्षी पार्टी (डेमोक्रेटिक पार्टी) से भारी विरोध का सामना करना पड़ा। सरकार और विपक्ष के बीच तनाव इतना बढ़ गया था कि प्रशासनिक कार्य ठप होने लगे थे।
- आर्थिक चुनौतियां – उनके कार्यकाल के दौरान बढ़ती महंगाई, आवास संकट और उत्तर कोरिया के साथ बढ़ते सैन्य तनाव ने दक्षिण कोरियाई समाज को काफी परेशान किया।
- लोकतंत्र पर संकट – 2024 के अंत तक आते-आते राष्ट्रपति यून और प्रधानमंत्री हान की सरकार पर सत्ता के दुरुपयोग और लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने के आरोप लगने लगे थे, जिसका चरम ‘मार्शल लॉ’ के रूप में सामने आया।
कार्यकाल के मुख्य कार्य (उपलब्धियां और चुनौतियां)
अपने लंबे राजनीतिक जीवन में हान डक-सू ने कई महत्वपूर्ण कार्य किए –
- मुक्त व्यापार समझौते (FTA) – उन्होंने अमेरिका के साथ दक्षिण कोरिया के मुक्त व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने में प्रमुख भूमिका निभाई, जिससे कोरियाई अर्थव्यवस्था को वैश्विक बाजार में मजबूती मिली।
- आर्थिक सुधार – 2005 में वित्त मंत्री रहते हुए उन्होंने देश की बैंकिंग प्रणाली और विदेशी निवेश के नियमों में बड़े बदलाव किए थे।
- राजनयिक संबंध – राजदूत के रूप में उन्होंने अमेरिका और दक्षिण कोरिया के बीच सैन्य और आर्थिक संबंधों को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया।
- मार्शल लॉ के बाद का संकट – 2025 में राष्ट्रपति यून के महाभियोग के बाद, हान ने कुछ समय के लिए कार्यवाहक राष्ट्रपति (Acting President) की भूमिका भी निभाई थी, हालांकि बाद में उन्हें भी कानूनी कार्रवाई का सामना करना किया।
अदालत का यह फैसला दक्षिण कोरियाई लोकतंत्र की मजबूती का प्रमाण माना जा रहा है। 23 साल की सजा अभियोजन पक्ष द्वारा मांगी गई 15 साल की सजा से भी अधिक है, जो यह दर्शाता है कि अदालत ने इस अपराध को कितना गंभीर माना है।
हान डक-सू अब जेल में हैं और यह फैसला पूर्व राष्ट्रपति यून सुक येओल के खिलाफ चल रहे आगामी मुकदमों के लिए भी एक मिसाल बन गया है। दक्षिण कोरिया की जनता इस फैसले को देश के संविधान की जीत के रूप में देख रही है।







