व्यापारभारतविदेशी समाचारखेलजीवन शैलीराजनीतिधर्मभौगोलिकसेलिब्रेटीज़शिक्षास्वास्थ्य

विधानसभा चुनाव से पहले केरल की राजनीति में बड़ा बदलाव 

विधानसभा चुनाव से पहले केरल की राजनीति में बड़ा बदलाव 
नवजोत कौर सिद्धू
On: जनवरी 23, 2026 5:41 अपराह्न
Follow Us:

केरल की राजनीति में 23 जनवरी 2026 को एक ऐतिहासिक मोड़ आया है। राज्य की राजनीति में ‘तीसरे विकल्प’ के रूप में उभरी और कॉरपोरेट गवर्नेंस मॉडल के लिए जानी जाने वाली किटेक्स ट्वेंटी20 (KITEX Twenty20) पार्टी अब आधिकारिक तौर पर भाजपा नीत एनडीए (NDA) का हिस्सा बन गई है।

यह गठबंधन केरल के पारंपरिक राजनीतिक समीकरणों (LDF और UDF) को चुनौती देने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। 

ट्वेंटी20 (Twenty20) पार्टी –  एक परिचय

ट्वेंटी20 केरल की एक अनूठी राजनीतिक पार्टी है, जिसे मुख्य रूप से ‘कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी’ (CSR) के माध्यम से राजनीति में प्रवेश के लिए जाना जाता है।

  • संस्थापक –  इसके मुख्य सूत्रधार साबू एम. जैकब (Sabu M. Jacob) हैं, जो विश्व प्रसिद्ध गारमेंट निर्यातक कंपनी ‘किटेक्स गारमेंट्स’ (Kitex Garments) के प्रबंध निदेशक (MD) हैं।
  • स्थापना –  इसकी शुरुआत 2015 में एक चैरिटेबल संस्था के रूप में हुई थी, जिसने बाद में राजनीतिक दल का रूप ले लिया।
  • मुख्यालय –  इसका केंद्र एर्नाकुलम जिले का किझाकम्बलम (Kizhakkambalam) गांव है।
  • उद्देश्य – पार्टी का दावा है कि वे पारंपरिक राजनीति के भ्रष्टाचार और भाई-भतीजावाद से दूर, कॉरपोरेट कुशलता के साथ विकास (Development-oriented model) करना चाहते हैं।

क्यों अहम है यह गठबंधन भाजपा-एनडीए के लिए 

भाजपा लंबे समय से केरल में अपनी जड़ें जमाने की कोशिश कर रही है। ट्वेंटी20 के साथ आने से भाजपा को कई रणनीतिक लाभ होंगे

1. मध्यम वर्ग और शिक्षित मतदाताओं में पैठ

ट्वेंटी20 का आधार मुख्य रूप से वह शिक्षित मध्यम वर्ग है, जो केरल की पारंपरिक गठबंधन राजनीति (LDF-UDF) से ऊब चुका है। भाजपा को इस गठबंधन के जरिए एक ‘विकासवादी’ चेहरा मिलेगा।

2. एर्नाकुलम बेल्ट में मजबूती

एर्नाकुलम जिला केरल की आर्थिक राजधानी (कोच्चि) का केंद्र है। यहाँ ट्वेंटी20 का अच्छा खासा प्रभाव है। 2021 के विधानसभा चुनाव में, अकेले लड़ते हुए भी इस पार्टी ने कुछ सीटों पर 15% से अधिक वोट हासिल किए थे। अब यह वोट बैंक सीधे एनडीए के खाते में जुड़ सकता है।

3. ईसाई समुदाय तक पहुंच

साबू एम. जैकब ईसाई समुदाय से आते हैं। केरल में भाजपा के लिए ईसाई मतदाताओं का समर्थन जुटाना हमेशा से एक चुनौती रहा है। ट्वेंटी20 के जरिए भाजपा इस समुदाय के बीच अपनी स्वीकार्यता बढ़ा सकती है।

क्या बदलेंगे केरल के राजनीतिक समीकरण

केरल में दशकों से सत्ता ‘वामपंथी’ (LDF) और ‘कांग्रेस नीत’ (UDF) के बीच बारी-बारी से बदलती रही है। ट्वेंटी20 का एनडीए में शामिल होना निम्नलिखित बदलाव ला सकता है

  • त्रिकोणीय मुकाबला – अब तक भाजपा कुछ ही सीटों पर मुख्य मुकाबले में होती थी, लेकिन अब मध्य केरल की कई सीटों पर मुकाबला त्रिकोणीय हो जाएगा।
  • वोटों का ध्रुवीकरण –  ट्वेंटी20 के पास अपना एक समर्पित ‘कैडर’ है जो वैचारिक रूप से नहीं बल्कि ‘सुविधाओं और विकास’ के नाम पर जुड़ा है। यह कैडर भाजपा के सांगठनिक ढांचे के साथ मिलकर चुनावी गणित बिगाड़ सकता है।
  • LDF के खिलाफ मजबूत मोर्चा – साबू जैकब का मौजूदा वामपंथी सरकार (विशेषकर मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन) के साथ पुराना विवाद रहा है। उनके एनडीए में आने से सरकार विरोधी वोटों का बिखराव रुक सकता है।

क्यों घबराई हुई है कांग्रेस (UDF) 

कांग्रेस के लिए यह गठबंधन सबसे बड़ा सिरदर्द है, क्योंकि-

  • वोटों की कटौती –  ट्वेंटी20 ने पूर्व में सबसे ज्यादा नुकसान कांग्रेस के वोट बैंक को ही पहुँचाया है। एर्नाकुलम और आसपास के क्षेत्रों में कांग्रेस के पारंपरिक वोटर ट्वेंटी20 की ओर शिफ्ट हुए थे। अब वे वोट भाजपा-एनडीए की ओर जा सकते हैं।
  • अस्तित्व का संकट – अगर एनडीए एक मजबूत विकल्प के रूप में उभरता है, तो केरल की द्विदलीय राजनीति (Bipolar Politics) समाप्त हो जाएगी, जिससे कांग्रेस के लिए सत्ता में वापसी और कठिन हो जाएगी।

पार्टी का इतिहास और विवाद

ट्वेंटी20 का सफर सफलताओं और विवादों दोनों से भरा रहा है

  • किझाकम्बलम मॉडल –  2015 में इस पार्टी ने किझाकम्बलम पंचायत जीतकर पूरे देश का ध्यान खींचा। उन्होंने रियायती दरों पर ‘फूड सिक्योरिटी मार्केट’ चलाया और बुनियादी ढांचे में सुधार किया।
  • किटेक्स विवाद – 2021 में साबू जैकब ने आरोप लगाया कि केरल सरकार उनके व्यापार को बाधित कर रही है, जिसके बाद उन्होंने 3500 करोड़ रुपये का निवेश केरल से हटाकर तेलंगाना स्थानांतरित कर दिया था। इस घटना ने उन्हें राज्य सरकार के सबसे बड़े मुखर विरोधियों में खड़ा कर दिया।

किटेक्स ट्वेंटी20 का एनडीए का हिस्सा बनना केरल की राजनीति में एक ‘पैराडाइम शिफ्ट’ (बड़ा बदलाव) है। यह केवल दो पार्टियों का मिलन नहीं, बल्कि एक ‘कॉरपोरेट गवर्नेंस मॉडल’ और ‘राष्ट्रवादी विचारधारा’ का मेल है। आगामी विधानसभा चुनावों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या यह ‘डबल इंजन’ केरल के दशकों पुराने राजनीतिक दुर्ग को ढहा पाता है या नहीं।

Swati Pandey

A versatile writer mainly works on trending news, daily updates from politics, business, crime, current affairs and entertainment.

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now

Leave a Comment