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ईंधन निर्यात पर विंडफॉल टैक्स में बड़ी कटौती –  केंद्र सरकार ने पेट्रोल डीजल और एटीएफ पर विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क (SAED) की दरें घटाईं

ईंधन निर्यात पर विंडफॉल टैक्स में बड़ी कटौती -  केंद्र सरकार ने पेट्रोल डीजल और एटीएफ पर विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क (SAED) की दरें घटाईं
नवजोत कौर सिद्धू
On: मई 31, 2026 1:12 अपराह्न
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नई दिल्ली | वैश्विक ऊर्जा बाजारों में जारी उतार-चढ़ाव और कच्चे तेल की कीमतों की समीक्षा के बाद, केंद्र सरकार ने तेल कंपनियों को बड़ी राहत दी है। वित्त मंत्रालय द्वारा जारी आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार 1 जून 2026 से पेट्रोल, डीजल और विमान ईंधन (ATF – एविएशन टर्बाइन फ्यूल) के निर्यात पर लगने वाले विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क (SAED – Special Additional Excise Duty), जिसे आमतौर पर विंडफॉल प्रॉफिट टैक्स (Windfall Profit Tax) कहा जाता है में उल्लेखनीय कटौती की गई है।

​सरकार का यह फैसला हर पखवाड़े (15 दिनों में) होने वाली नियमित समीक्षा के तहत लिया गया है। यह नई दरें 1 जून 2026 से प्रभावी मानी जाएंगी। इस ताज़ा अपडेट, नए नियमों, और शुल्क दरों के साथ इसके आर्थिक प्रभाव को विस्तार से समझते हैं।

​नई शुल्क दरें और नियमों का विवरण

​वित्त मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार सरकार ने रिफाइनरियों द्वारा किए जाने वाले ईंधन निर्यात पर टैक्स को लगभग आधा या उससे भी कम कर दिया है। पेट्रोल और डीजल के निर्यात पर रोड एंड इंफ्रास्ट्रक्चर सेस (RIC) को पूरी तरह से शून्य (Nil) रखा गया है। 1 जून से प्रभावी होने वाली दरें इस प्रकार हैं –

ईंधन का प्रकारपुरानी दर (16 मई से प्रभावी)नई दर (1 जून से प्रभावी)प्रति लीटर शुद्ध कटौती
पेट्रोल (Petrol) निर्यात₹3.00 प्रति लीटर₹1.50 प्रति लीटर₹1.50 प्रति लीटर
डीजल (Diesel) निर्यात₹16.50 प्रति लीटर₹13.50 प्रति लीटर₹3.00 प्रति लीटर
विमान ईंधन (ATF) निर्यात₹16.00 प्रति लीटर₹9.50 प्रति लीटर₹6.50 प्रति लीटर

सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह कटौती केवल विदेशों में निर्यात किए जाने वाले ईंधन पर लागू होगी।

महत्वपूर्ण नोट –  घरेलू बाजार (Domestic Market) में बेचे जाने वाले पेट्रोल और डीजल पर लगने वाले मौजूदा केंद्रीय उत्पाद शुल्क (Excise Duty) की दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। इसका मतलब है कि देश के भीतर आम उपभोक्ताओं के लिए पेट्रोल-डीजल की खुदरा कीमतों पर इस कटौती का सीधा कोई असर नहीं पड़ेगा।

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​क्यों लगाया जाता है विंडफॉल टैक्स और क्या है इसका इतिहास?

​विंडफॉल प्रॉफिट टैक्स एक विशेष कर है जो उन उद्योगों या कंपनियों पर लगाया जाता है जिन्हें किसी बाहरी परिस्थिति या वैश्विक संकट के कारण अप्रत्याशित और असाधारण मुनाफा (Windfall Gains) होता है।

​भारत सरकार ने पहली बार जुलाई 2022 में स्थानीय रूप से उत्पादित कच्चे तेल और ईंधन निर्यात पर विंडफॉल टैक्स लगाने की शुरुआत की थी। इसके बाद हाल ही में पश्चिम एशिया में गहराए भू-राजनीतिक तनाव (विशेष रूप से अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच सैन्य संघर्ष) के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें अचानक उछलकर $100 प्रति बैरल के पार चली गईं।

​वैश्विक कीमतों में आई इस भारी तेजी का फायदा उठाने के लिए निजी रिफाइनरियां घरेलू बाजार में तेल बेचने के बजाय भारी मात्रा में विदेशों में निर्यात करने लगी थीं, जिससे देश के भीतर ईंधन की किल्लत होने का खतरा पैदा हो गया था। इसी को देखते हुए सरकार ने घरेलू उपलब्धता सुनिश्चित करने और घरेलू आपूर्ति को मजबूत बनाए रखने के लिए 27 मार्च 2026 को पेट्रोल, डीजल और एटीएफ के निर्यात पर नए सिरे से कड़े निर्यात शुल्क और विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क (SAED) लागू कर दिए थे।

​इस कटौती के पीछे के मुख्य कारण

​अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों की समीक्षा हर 15 दिन में की जाती है। इस बार करों में कटौती करने के मुख्य कारण निम्नलिखित हैं

  • रिफाइनिंग मार्जिन (क्रैक्स) में कमी – पिछले दो हफ्तों में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रिफाइंड ईंधन के दामों और कच्चे तेल की लागत के बीच का अंतर (जिसे रिफाइनिंग मार्जिन या ‘क्रैक्स’ कहा जाता है) थोड़ा कम हुआ है। जब तेल कंपनियों का मुनाफा मार्जिन घटता है, तो सरकार नियमानुसार टैक्स की दरों को भी कम कर देती है।
  • वैश्विक कीमतों में आंशिक स्थिरता – हालांकि पश्चिम एशिया संकट (जैसे स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के आसपास की बाधाएं) पूरी तरह शांत नहीं हुआ है, लेकिन वैश्विक तेल बाजारों में कीमतों में पिछले पखवाड़े के मुकाबले कुछ नरमी देखी गई है, जिससे सरकार को कर संरचना को थोड़ा उदार बनाने का अवसर मिला।
  • घरेलू स्टॉक की पर्याप्तता –  पिछले दो महीनों में लगाए गए कड़े निर्यात शुल्कों के कारण घरेलू बाजार में पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति और स्टॉक अब संतोषजनक स्थिति में आ चुका है।

​भारतीय अर्थव्यवस्था और तेल कंपनियों पर इसका प्रभाव

​सरकार के इस कदम का भारतीय कॉर्पोरेट जगत और ऊर्जा क्षेत्र पर व्यापक प्रभाव पड़ेगा

  • तेल उत्पादक और रिफाइनिंग कंपनियों को बड़ी राहत – इस कर कटौती का सबसे सीधा और बड़ा फायदा रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) जैसी निजी क्षेत्र की दिग्गज रिफाइनरियों और ओएनजीसी (ONGC) व ऑयल इंडिया जैसी सरकारी तेल उत्पादक कंपनियों को मिलेगा। निर्यात शुल्क आधा होने से इन कंपनियों के शुद्ध मुनाफे (Net Margins) में सुधार होगा, जो पिछले कुछ समय से भारी टैक्स के कारण दबाव में था।
  • शेयर बाजार पर सकारात्मक असर – रिफाइनिंग कंपनियों के टैक्स बोझ में कमी आने से आगामी कारोबारी सत्रों में ऊर्जा क्षेत्र (Energy Sector) के शेयरों में मजबूती देखने को मिल सकती है। निवेशकों के बीच तेल कंपनियों के वित्तीय स्वास्थ्य को लेकर भरोसा बढ़ेगा।
  • विदेशी मुद्रा की आमद – कर की दरें तार्किक होने से भारतीय रिफाइनरियां वैश्विक बाजार में अपनी बची हुई क्षमता का निर्यात प्रतिस्पर्धी कीमतों पर कर सकेंगी, जिससे देश में विदेशी मुद्रा का प्रवाह सुचारू बना रहेगा।

केंद्र सरकार द्वारा 1 जून से लागू की जा रही यह कटौती तेल क्षेत्र में नीतिगत संतुलन को दर्शाती है। जहां एक तरफ सरकार ‘विंडफॉल टैक्स’ के जरिए यह सुनिश्चित करती है कि देश में ईंधन की कमी न हो, वहीं दूसरी तरफ अंतरराष्ट्रीय कीमतों के नरम पड़ते ही टैक्स घटाकर कंपनियों को व्यापार करने की जरूरी ढील भी देती है। हालांकि आम जनता को घरेलू मोर्चे पर राहत के लिए अभी थोड़ा और इंतजार करना होगा।

Swati Pandey

A versatile writer mainly works on trending news, daily updates from politics, business, crime, current affairs and entertainment.

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