राघव चड्डा को भारतीय जनता पार्टी ने एक नई जिम्मेदारी दी है। राघव चड्डा को बीजेपी ने राज्यसभा के याचिका समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया है। राघव चड्डा को बीजेपी की तरफ से मिली यह पहली जिम्मेदारी है। राघव चड्डा कुछ दिनों पहले ही आम आदमी पार्टी छोड़कर बीजेपी में शामिल हुए थे। तब उन्होंने बीजेपी की विचारधारा को राष्ट्रीय विचारधारा बताया था और इसी विचारधारा से प्रभावित होकर राघव चड्डा ने बीजेपी को ज्वाइन किया था। अब राघव चड्डा को बीजेपी ने पहली बड़ी जिम्मेदारी देते हुए याचिका समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया है। ज्ञात हो कि राघव चड्डा अपने 7 राज्यसभा सांसदों के साथ बीजेपी में जुड़े थे तब आम आदमी पार्टी और भारतीय जनता पार्टी के बीच जमकर बहस हुई थी।
आप सांसद संजय सिंह ने राघव चड्डा को बीजेपी से डरा हुआ नेता बताया था। पिछले कुछ महीनों से राघव चड्डा और आम आदमी पार्टी के बीच कुछ ठीक नहीं चल रहा था और कयास लगाए जा रहे थे कि राघव चड्डा बीजेपी में शामिल हो सकते है या कि दूसरी नई पार्टी बना सकते है। राघव चड्डा ने बीजेपी में जुड़ना ज्यादा उचित समझा और वो अपने साथी 7 राज्यसभा सांसदों के साथ बीजेपी में जुड़ गए।
याचिका समिति के कार्य
राज्यसभा की याचिका समिति में 10 सदस्य होते है जबकि लोकसभा में इसकी संख्या 15 है। राघव चड्डा को राज्यसभा में बीजेपी ने याचिका समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया है। अब राघव चड्डा के पास महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। याचिका समिति के अध्यक्ष होने के नाते राघव चड्डा को राज्यसभा में उन सभी याचिकाओं की जांच करनी होगी जो सदन में उठाने के लिए प्रस्तावित है। याचिका समिति के कार्य निम्नलिखित हैं –
- याचिकाओं की जांच करना – याचिका समिति का सबसे पहला काम होता है कि वह सभी याचिकाओं को ठीक से पढ़कर यह कन्फर्म करे कि याचिका नियमों के अनुरूप है या नहीं।
- शिकायतों का समाधान – याचिका समिति का एक महत्वपूर्ण कार्य शियाकतो का समाधान भी करना होता है। राज्यसभा में याचिका के विषय में शिकायत करने पर उसका त्वरित समाधान करना।
- पत्रों पर विचार – याचिका समिति के अध्यक्ष के पास यह अधिकार होता है कि विषय से हटकर पत्र या ज्ञापन को पढ़कर उस पत्र को स्वीकार करना या निरस्त करना।
- भविष्य के लिए सुझाव – याचिका समिति का अध्यक्ष राज्यसभा ने सभापति को भविष्य के लिए कुछ महत्वपूर्ण सुझाव भी दे सकता है जो कि सदन से संबंधित हो।
also read :
आम आदमी पार्टी का आरोप
आम आदमी पार्टी ने राघव चड्डा पर आरोप लगाते हुए कहा कि जब आम आदमी पार्टी की तरफ से राघव चड्डा राज्यसभा में बोलते थे तो वो गरीबों की आवाज थे और वो सरकार के विपक्ष में बोलते थे लेकिन अब बीजेपी में शामिल होने के बाद राघव चड्डा किसी भी सरकार विरोधी मुद्दों पर बात नहीं करते। आम आदमी पार्टी का राघव चड्डा पर लगाया आरोप लाजमी भी है। जब राघव चड्डा आम आदमी पार्टी में थे तब राघव चड्डा 10₹ के समोसे, मोबाइल रिचार्ज, ola uber जैसे मुद्दों पर बात करते थे जिससे आम जनता भी राघव चड्डा को अपना नेता मानने लगी थी।
देश के कई युवा संगठनों और राजनीतिक दलों ने NEET पेपर लीक मामले में सरकार को घेरा है लेकिन NEET पेपर लीक मामले में राघव चड्डा की ओर से अभी तक कोई बयान नहीं आया है। ऐसे में लोग सवाल उठा रहे है कि राघव चड्डा क्या केवल आम आदमी पार्टी में रहते गरीबों की आवाज उठाते थे? वर्तमान में पूरे देश ने पेट्रोल और डीजल के दाम आसमान पर है। NEET paper लीक मामले में कई लोगों को CBI गिरफ्तार कर रही है। CBSE का कॉपी स्कैन मामला। इन सारे विवादों में राघव चड्डा की ओर से अभी तक कोई बयान सामने नहीं आया है। राघव चड्डा के चाहने वाले लोग उम्मीद लगा कर बैठे है कि राघव चड्डा इन सभी मुद्दों पर बोलेंगे और उनके हित में लड़ाई लड़ेंगे।
राघव चड्डा के फॉलोअर्स में गिरावट
भले ही राघव चड्डा को बीजेपी ने राज्यसभा में याचिका समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया हो लेकिन सोशल मीडिया में राघव चड्डा के फॉलोअर्स रोज घट रहे है। इसका एक कारण यह भी हो सकता है कि जब राघव चड्डा सरकार के खिलाफ और गरीबों की आवाज सदन में उठाते थे तो पूरा देश उनके साथ खड़ा होता था लेकिन जब से वह बीजेपी में शामिल हुए तब से महत्वपूर्ण मुद्दों पर बोलना ही बंद कर दिया।
जब राघव चड्डा आम आदमी पार्टी में थे तब इंस्टाग्राम में राघव चड्डा के पास लगभग 15 मिलियन फॉलोअर्स थे लेकिन बीजेपी में शामिल होने के बाद राघव चड्डा के पास फॉलोअर्स घटकर 11.4 मिलियन ही फॉलोअर्स है। इसे जनता की निराशी या जनता का गुस्सा भी कह सकते है जो अचानक विश्वास से क्रोध में बदल गया। लोगो को उम्मीद अभी भी है कि राघव चड्डा अभी भी गरीबों की आवाज राज्यसभा में उठाएंगे लेकिन अब सरकार समर्थित पार्टी में शामिल होने के बाद इसकी संभावना कम ही दिखाई दे रही है।







