कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी द्वारा हाल ही में दावोस (वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम 2026) में दिया गया भाषण वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था में एक बड़े बदलाव का संकेत है। उन्होंने न केवल अमेरिकी नेतृत्व वाली “नियम-आधारित व्यवस्था” (Rules-based order) पर प्रहार किया, बल्कि इसे एक ‘सुखद भ्रम’ करार देते हुए यह स्पष्ट कर दिया कि पुराना दौर अब कभी लौटकर नहीं आएगा।
पुराने विश्व व्यवस्था का अंत – “एक सुखद भ्रम की विदाई”
प्रधानमंत्री कार्नी ने अपने भाषण में सीधे तौर पर कहा कि जिस Rules-based International Order की दुहाई पिछले 80 वर्षों (द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से) से दी जा रही थी, वह वास्तव में एक “आंशिक झूठ” या “कल्पना” (Fiction) थी।
- समानता का अभाव – कार्नी के अनुसार, यह व्यवस्था कभी भी सबके लिए समान नहीं थी। शक्तिशाली देशों (विशेषकर अमेरिका) ने हमेशा अपनी सुविधानुसार नियमों को तोड़ा या उनसे छूट ली।
- अमेरिकी वर्चस्व – उन्होंने स्वीकार किया कि अमेरिकी “हेजेमनी” (वर्चस्व) ने समुद्री रास्तों की सुरक्षा और वैश्विक वित्तीय स्थिरता जैसे कुछ सार्वजनिक लाभ जरूर दिए, लेकिन इसके बदले में दुनिया को अमेरिका की शर्तों पर चलना पड़ा।
अब बदलाव क्यों?
कार्नी ने कहा कि अब यह “सौदा” (Bargain) काम नहीं कर रहा है। हम किसी ‘बदलाव’ (Transition) से नहीं, बल्कि एक ‘विखंडन’ (Rupture) से गुजर रहे हैं।
टैरिफ और आर्थिक युद्ध पर कड़ा प्रहार
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा लगाए गए और प्रस्तावित टैरिफ (विशेषकर कनाडा के ऑटो सेक्टर और अन्य देशों पर) को लेकर कार्नी ने बेहद तीखी प्रतिक्रिया दी।
- हथियार के रूप में अर्थव्यवस्था – उन्होंने कहा कि महान शक्तियां अब आर्थिक एकीकरण को हथियार बना रही हैं।
- लेवरेज के रूप में टैरिफ – कार्नी ने स्पष्ट किया कि “टैरिफ का उपयोग अब व्यापार संतुलन के लिए नहीं, बल्कि दूसरे देशों को झुकाने के लिए ‘लेवरेज’ (दबाव) के रूप में किया जा रहा है।”
- आर्थिक जबरदस्ती – उन्होंने वित्तीय बुनियादी ढांचे को ‘जबरदस्ती का साधन’ और सप्लाई चेन को ‘शोषण की कमजोरी’ बताया। कार्नी का संदेश साफ था
“जब व्यापारिक एकीकरण आपकी अधीनता (Subordination) का कारण बन जाए, तो आप ‘पारस्परिक लाभ’ के झूठ में नहीं रह सकते।”
अमेरिकी FAA ने मेक्सिको के ऊपर उड़ान भरते समय सतर्क रहने की 60 दिनों तक दी चेतावनियां
“इफ यू आर नॉट एट द टेबल, यू आर ऑन द मेनू”
कार्नी ने दुनिया की “मध्यम शक्तियों” (Middle Powers) जैसे कनाडा, भारत, जर्मनी और अन्य देशों को एक चेतावनी और आह्वान दिया।
- रणनीतिक स्वायत्तता – उन्होंने कहा कि जो देश खुद का भोजन, ईंधन और सुरक्षा सुनिश्चित नहीं कर सकते, उनके पास भविष्य में बहुत कम विकल्प बचेंगे।
- सामूहिक शक्ति – उन्होंने प्रसिद्ध मुहावरा इस्तेमाल करते हुए कहा “Middle powers must act together, because if you’re not at the table, you’re on the menu.” (यदि आप चर्चा की मेज पर नहीं हैं, तो आप भोजन की थाली में होंगे)।
- तीसरा रास्ता – कार्नी ने सुझाव दिया कि मध्यम शक्तियों को किसी एक महाशक्ति (अमेरिका या चीन) के पीछे चलने के बजाय अपना एक साझा “तीसरा रास्ता” बनाना चाहिए।
भविष्य की रणनीति – “उदासी (Nostalgia) कोई रणनीति नहीं है”
कार्नी ने उन लोगों को फटकार लगाई जो अभी भी पुराने दिनों के वापस आने का इंतजार कर रहे हैं।
- पुराना दौर वापस नहीं आएगा – उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, “The old order is not coming back. We should not mourn it.” (पुराना दौर वापस नहीं आ रहा है, हमें इसका शोक नहीं मनाना चाहिए)।
- किलों की दुनिया (World of Fortresses) – उन्होंने चेतावनी दी कि दुनिया अब ‘किलों’ (संरक्षणवाद) में बंट रही है। हालांकि यह दुनिया को और गरीब और अस्थिर बनाएगा, लेकिन यही आज की कड़वी सच्चाई है।
- नया निर्माण – कार्नी का मानना है कि इस विखंडन के मलबे से हम एक ऐसी व्यवस्था बना सकते हैं जो अधिक न्यायपूर्ण हो और जिसमें नियम केवल कागजों पर न होकर वास्तव में लागू हों।
मुख्य निष्कर्ष और प्रभाव
| विषय | पुरानी व्यवस्था (Old Order) | कार्नी की नई वास्तविकता (New Reality) |
| अमेरिकी भूमिका | वैश्विक नेता और सुरक्षा प्रदाता | अपनी शक्तियों का उपयोग दबाव के लिए करने वाला |
| व्यापार (Trade) | मुक्त व्यापार और एकीकरण | टैरिफ और सप्लाई चेन को हथियार बनाना |
| नियम (Rules) | अंतरराष्ट्रीय कानून का पालन (दिखावा) | रणनीतिक स्वायत्तता और आत्म-रक्षा |
| मध्यम शक्तियां | महाशक्तियों के पीछे चलने वाले | सामूहिक गठबंधन बनाकर प्रभाव डालना |
कार्नी का यह भाषण कनाडा की विदेश नीति में एक ऐतिहासिक मोड़ माना जा रहा है। जहां पहले कनाडा अमेरिका का सबसे करीबी सहयोगी और उसकी नीतियों का समर्थक रहा है, वहीं अब वह खुलेआम अमेरिकी आर्थिक नीतियों और वर्चस्व को चुनौती दे रहा है।







