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Chaitra Navratri 2026 – चैत्र नवरात्रि में कन्या भोज कब और कैसे करें? जानिए संपूर्ण जानकारी

Chaitra Navratri 2026 - चैत्र नवरात्रि में कन्या भोज कब और कैसे करें? जानिए संपूर्ण जानकारी
नवजोत कौर सिद्धू
On: मार्च 24, 2026 12:55 अपराह्न
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चैत्र नवरात्रि में कन्या पूजन (Kanya Pujan) या कंजिका पूजन का विशेष महत्व है। इसे देवी दुर्गा की आराधना का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार नौ कन्याओं को नौ देवियों का स्वरूप मानकर उनका पूजन करने से ही नवरात्रि का व्रत और साधना पूर्ण होती है।

​चैत्र नवरात्रि 2026 –  कन्या पूजन और भोज का संपूर्ण विधान

कन्या पूजन (Kanya Pujan) का आध्यात्मिक महत्व

​सनातन धर्म में ‘यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता:’ के सिद्धांत को सर्वोपरि माना गया है। 

नवरात्रि के दौरान 2 वर्ष से लेकर 10 वर्ष तक की कन्याओं के पूजन का विधान है। माना जाता है कि इस आयु की कन्याएं साक्षात माँ दुर्गा का स्वरूप होती हैं।

कन्या भोज  (Kanya Bhoj) कराने से भक्त के सभी कष्ट दूर होते हैं दरिद्रता का नाश होता है और घर में सुख-समृद्धि का वास होता है।

​चैत्र नवरात्रि 2026 –  मुख्य तिथियां और शुभ मुहूर्त

​चैत्र नवरात्रि (Chaitra Navratri) में कन्या पूजन मुख्य रूप से अष्टमी और नवमी तिथि को किया जाता है।

  • महाष्टमी (अष्टमी) – इस दिन माँ महागौरी की पूजा होती है। बहुत से लोग कुल परंपरा के अनुसार अष्टमी को कन्या खिलाते हैं।
  • महानवमी (नवमी) –  इस दिन माँ सिद्धिदात्री की पूजा होती है। यह नवरात्रि का अंतिम दिन होता है।

वर्ष 2026 के लिए संभावित तिथियां

  • अष्टमी तिथि –  26 मार्च 2026
  • नवमी तिथि –  27 मार्च 2026

नोट –  सूर्योदय व्यापिनी तिथि और स्थानीय पंचांग के अनुसार मुहूर्त में कुछ मिनटों का अंतर हो सकता है। पूजा हमेशा दोपहर से पहले ‘अभिजीत मुहूर्त’ में करना अत्यंत फलदायी माना जाता है।

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​कन्या पूजन की संपूर्ण विधि (Step-by-Step)

​कन्या भोज (Kanya Bhoj) केवल भोजन कराना नहीं बल्कि एक अनुष्ठान है। इसकी प्रक्रिया इस प्रकार होनी चाहिए

  • आमंत्रण और स्वागत – कन्या भोज से एक दिन पहले कन्याओं को आदरपूर्वक आमंत्रित करना चाहिए। जब कन्याएं घर आएं तो पूरे परिवार को उनके स्वागत में खड़े होना चाहिए और “जय माता दी” के जयकारों से उनका स्वागत करना चाहिए।
  • चरण प्रक्षालन (पैर धोना) – सबसे पहले एक स्वच्छ परात में कन्याओं को बैठाकर उनके पैर दूध या स्वच्छ जल से धोने चाहिए। इसके बाद उनके पैर पोंछकर उन्हें आसन पर बैठाना चाहिए।
  • तिलक और पूजन – सभी कन्याओं के माथे पर कुमकुम और अक्षत का तिलक लगाएं। उनके हाथ में कलावा (मौली) बांधें। इसके बाद उनकी आरती उतारें और उन्हें पुष्प अर्पित करें।
  • भोजन अर्पण – ​कन्याओं को सात्विक भोजन परोसें। भोजन में मुख्य रूप से निम्नलिखित चीजें शामिल होनी चाहिए-
  • ​सूजी का हलवा
  • ​काले चने (बिना लहसुन-प्याज के)
  • ​पूरी
  • खीर या कोई मिठाई
  • ​मौसमी फल

ध्यान रहे कि भोजन पूरी तरह शुद्ध और बिना लहसुन-प्याज का बना हो।

  • दान और दक्षिणा – भोजन के बाद कन्याओं को अपनी सामर्थ्य अनुसार दक्षिणा (पैसे), वस्त्र, श्रृंगार सामग्री या खिलौने भेंट करें। उपहार देते समय मन में यह भाव रखें कि आप साक्षात देवी को भेंट दे रहे हैं।
  • चरण स्पर्श और विदाई – अंत में सभी कन्याओं के चरण स्पर्श कर उनका आशीर्वाद लें और उन्हें सम्मानपूर्वक द्वार तक छोड़कर आएं।

​कन्या पूजन के अनिवार्य नियम (Do’s and Don’ts)

  • आयु का ध्यान –  कन्याओं की आयु 2 से 10 वर्ष के बीच होनी चाहिए।
  • बटुकेश्वर (लांगुरिया) – कन्याओं के साथ कम से कम एक बालक को जरूर भोजन कराएं। उन्हें ‘बटुकेश्वर’ या ‘हनुमान जी’ का रूप माना जाता है जिनके बिना माँ की पूजा अधूरी मानी जाती है।
  • संख्या – वैसे तो 9 कन्याओं का विधान है, लेकिन यदि संभव न हो तो 2, 5 या 7 कन्याओं का भी पूजन किया जा सकता है।
  • शुद्धता –  भोजन बनाने वाले व्यक्ति को स्नान करके पूरी शुद्धता के साथ रसोई में प्रवेश करना चाहिए।
  • जबरदस्ती न करें –  कन्याओं को भोजन के लिए मजबूर न करें। वे जितना प्रेम से खाएं उतना ही खिलाएं।

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​किस आयु की कन्या के पूजन से क्या फल मिलता है?

​शास्त्रों के अनुसार अलग-अलग आयु की कन्या का महत्व अलग है

  • 2 वर्ष (कुमारी) –  इनकी पूजा से दरिद्रता दूर होती है।
  • 3 वर्ष (त्रिमूर्ति) –  धन-धान्य और सुख की प्राप्ति होती है।
  • 4 वर्ष (कल्याणी) –  परिवार का कल्याण और उन्नति होती है।
  • 5 वर्ष (रोहिणी) –  आरोग्य (अच्छे स्वास्थ्य) की प्राप्ति होती है।
  • 6 वर्ष (कालिका) –  विद्या और विजय मिलती है।
  • 7 वर्ष (चंडिका) –  ऐश्वर्य और सौभाग्य की वृद्धि होती है।
  • 8 वर्ष (शांभवी) – वाद-विवाद और कष्टों से मुक्ति मिलती है।
  • 9 वर्ष (दुर्गा) –  शत्रुओं का नाश और कठिन कार्यों में सफलता मिलती है।
  • 10 वर्ष (सुभद्रा) – मोक्ष और सभी मनोकामनाओं की पूर्ति होती है।

​सारांश और निष्कर्ष

​चैत्र नवरात्रि (Chaitra Navratri) का यह पावन पर्व प्रकृति और शक्ति के मिलन का उत्सव है। कन्या पूजन के माध्यम से हम समाज में नारी शक्ति के महत्व को रेखांकित करते हैं। यदि आप श्रद्धा और शुद्ध मन से कन्याओं की सेवा करते हैं तो माँ दुर्गा का आशीर्वाद सदैव आप पर बना रहता है।

​याद रखें कन्या पूजन (Kanya Pujan) केवल एक दिन का कर्मकांड नहीं बल्कि बालिकाओं के प्रति सम्मान का संकल्प है।

Dr Pankaj Sharma

fitness coach and writer mainly work on sports, fitness, Religious, foreign news, and technology

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