जैसे जैसे बंगाल में चुनाव की तारीखें नजदीक आती जा रही है। वैसे वैसे एक से बढ़ कर एक राजनीतिक फेरबदल देखने को मिल रहे है। सुभाषचंद्र बोस के प्रपौत्र चंद्र कुमार बोस अब TMC का हाथ थाम लिया है। इसके पहले वो 2023 तक BJP के साथ जुड़े हुए थे। उन्होंने बंगाल की मुख्यमंत्री और टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी के खिलाफ भवानीपुर सीट से चुनाव भी लड़ा था।
चंद्र कुमार बोस TMC में शामिल हुए तो टीएमसी ने प्रेस कॉन्फ्रेंश कर उनका अभिवादन किया। टीएमसी में शामिल होते हुए ही चन्द्र कुमार बोस ने मीडिया से कहा कि बीजेपी सुभाष चंद्र बोस के विचारों पर काम नहीं कर रही। सुभाष चंद्र बोस के सिद्धांतों पर भी चल रही। ऐसी पार्टी में रहकर काम करने का क्या फायदा जब आपकी विचारधारा एक न हो। टीएमसी में चंद्र कुमार बोस शामिल हो तो गए है अब देखते है ममता बनर्जी उन्हें कितना पसंद करती है और उन्हें चुनाव में लड़ने के लिए टिकट देती है कि नहीं।
ब्रात्य बसु और कीर्ति आजाद की उपस्थिति में टीएमसी का हाथ थामा
तृणमूल भवन में मीडिया के सामने चंद्र बोस ने TMC का दामन पकड़ा। तृणमूल भवन में TMC के नेता ब्रात्य बसु और कीर्ति आजाद की उपस्थिति में चंद्र बोस ने TMC का हाथ पकड़ा। उन्होंने कहा कि मुझे विश्वास है कि टीएमसी नेताजी के सिद्धांतों और विचारों पर काम करेगी। उन्होंने कहा कि भाजपा में शामिल होकर मैने बहुत बड़ी गलती की थीं। उस गलती को सुधारने के लिए मै TMC में शामिल हुआ। उम्मीद है कि यह गलती अब सुधरेगी। 2016 में चंद्र बोस ने ममता बनर्जी के खिलाफ चुनाव लड़ा था हालांकि उन्हें भावनीपुर सीट से हार झेलनी पड़ी थी।
भाजपा करती है सांप्रदायिकता का दोहन
मीडिया से बात करते हुए चंद्र बोस ने आगे कहा कि भाजपा एकता, संप्रुभता का लगातार दोहन कर रही है। वह जनता को समाज के विभिन्न वर्गों में बांट रही है। ऐसे में किसी भी नेता का भाजपा में काम करना चुनौतीपूर्ण होता है। नेताजी हमेशा से अपने विचारों पर अडिग रहे और देशभक्ति वाली सोच से अपने व्यक्तित्व पर सदा अडिग रहे। उन्होंने कभी भी अपनी विचारधारा से मोलभाव नहीं किया। TMC एक ऐसे पार्टी है जो जनता की आवाज तो सुनती है साथ ही साथ क्रांतिकारियों का सम्मान करती है।
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भाजपा में रहते हुए दो बार चुनाव लड़ा था
सुभाष चंद्र बोस के प्रपौत्र चंद्र कुमार बोस ने भाजपा में रहते हुए 2016 और 2019 में पश्चिम बंगाल में चुनाव लड़ा था। 2016 में जहां उन्होंने भवानीपुर सीट पर ममता बनर्जी के खिलाफ चुनाव लड़ा था तो वही साल 2019 में दक्षिण कोलकाता की सीट पर उन्होंने चुनाव लड़ा था। इन दिनों सीट पर वह जीत तो नहीं सके लेकिन अच्छा खासा प्रभाव छोड़ने में सफल जरूर रहे।
आगे चंद्र कुमार बोस की दूरियां भाजपा से बढ़ती गई और साल 2023 में उन्होंने बीजेपी से इस्तीफा दे दिया। अब 3 वर्षों के अंतराल के बाद उन्होंने एक नई पार्टी TMC को चुना है। देखना होगा कि सुभाष चंद्र बोस के विचारों और सिद्धांतों को वह TMC में रहते हुए कितना लोगों तक पहुंचा पाते है।







