तमिलनाडु बीजेपी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष के. अन्नामलाई ने बीजेपी से अपना दामन छुड़ा लिया है। उन्होंने बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन से मुलाकात कर अपना इस्तीफा उनको सौंप दिया है। साथ ही उन्होंने केंद्रीय ग्रह मंत्री अमित शाह से मुलाकात कर इस्तीफा देने का कारण भी बताया। IPS की नौकरी छोड़ राजनीति में आए के. अन्नामलाई तमिलनाडु में BJP के लिए एकमात्र ऐसा चेहरा थे जिन्हें तमिलनाडु की जनता पसंद करती थी। पिछले कुछ दिनों से के. अन्नामलाई बीजेपी की नीतियों से खफा चल रहे थे।
के. अन्नामलाई ने बीजेपी के थ्री लेंग्वेज पॉलिसी का समर्थन नहीं किया। साथ ही वह चुनाव के समय से ही AIDMK साथ गठबंधन के लिए भी राजी नहीं थे। के अन्नामलाई ने तमिलनाडु में बीजेपी के लिए जो मेहनत की वह सालों से वहां का कोई नेता नहीं कर पाया। तमिलनाडु में दक्षिणी क्षेत्रीय दलों का राज चलता है। अभी तमिलनाडु में हुए विधानसभा चुनावों में 2 साल बनी TVK को लोगों ने 107 सीट देकर विजय को अपने मुख्यमंत्री के रूप में चुना। तमिलनाडु में बीजेपी को केवल 1 ही सीट मिल पाई। के. अन्नामलाई को तमिलनाडु के प्रदेश अध्यक्ष पद से भी हटा दिया गया था और इस बार विधानसभा चुनावों में उन्हें टिकट भी नहीं दिया गया था।
अन्नामलाई की लोकप्रियता
तमिलनाडु में अन्नामलाई की लोकप्रियता काफी ज्यादा है। IPS officer की नौकरी छोड़कर बीजेपी में जुड़कर उनके राजनीतिक सफर का यह पहला पड़ाव था। बीजेपी में जुड़ने के बाद उन्होंने तमिलनाडु में काफी रोड शो और जनसंपर्क अभियान किए। राजनीति में आने के बाद के अन्नामलाई ने भ्रष्टाचार, सुशासन और विकास के मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। तमिलनाडु की जनता भी के अन्नामलाई को काफी पसंद करती है।
जब नरेंद्र मोदी तमिलनाडु ने चुनावी अभियान के दौरान सभा को संबोधित कर रहे थे तब के अन्नामलाई के प्रशंसकों ने यह दिखा दिया था कि के. अन्नामलाई बीजेपी के लिए तमिलनाडु में कितना बड़ा चेहरा है। इसके बाद भी बीजेपी ने के अन्नामलाई को टिकट न देकर के अन्नामलाई को खफा तो जरूर किया था और अब वही गुस्सा के अन्नामलाई के इस्तीफे के रूप में सामने आया है। बीजेपी देश की वर्तमान में सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी है और इसके बाद भी वह दक्षिण राज्यों में लगातार संघर्ष करती आ रही है। अगर BJP को दक्षिण राज्यों में अपनी स्थिति को बेहतर करना है तो के. अन्नामलाई जैसे नेताओं को छोड़ना उसके लिए सबसे बड़ी भूल होगी।
read more :
- बंगाल चुनाव के लिए BJP का ब्लूप्रिंट- ‘सोनार बांग्ला संकल्प पत्र’ जारी
- पश्चिम बंगाल चुनाव के लिए BJP ने जारी की स्टार प्रचारकों की सूची
नई पार्टी का करेंगे ऐलान…?
के. अन्नामलाई ने बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन से मुलाकात कर अपना इस्तीफा तो सौंप दिया है लेकिन बीजेपी अभी भी के. अन्नामलाई को मनाने में जुटी हुई है। अगर बीजेपी अन्नामलाई को मनाने में सफल रही तो उसके लिए यह तमिलनाडु के आगामी चुनावों में साकारात्मक संदेश होगा। इन सभी अटकलों के बीच एक यह भी अटकलें लगाई जा रही है कि अन्नामलाई खुद की एक अलग पार्टी बना सकते है। चूंकि के. अन्नामलाई की लोकप्रियता तमिलनाडु में काफी ज्यादा है तो वह इस stardom का फायदा खुद की पार्टी बनाकर उठा सकते है। अगर उन्होंने खुद की अलग पार्टी बनाई तो तमिलनाडु में अन्य दलों के लिए वह खतरे की घंटी साबित हो सकते है। अगर के. अन्नामलाई तमिलनाडु में खुद की अलग पार्टी बनाते है तो वह बीजेपी के लिए सबसे बड़ा खतरा साबित हो सकते है। वह खुद की पार्टी बनाकर कुछ विधानसभा क्षेत्रों का वोट बैंक अपनी ओर खींच सकते है जो बीजेपी के लिए एक बड़ा खतरा साबित होगा। विजय ने खुद TVK पार्टी को 2024 में बनाया था और मात्र 2 साल ने TVK ने तमिलनाडु में 107 सीट लाकर इतिहास रच दिया।
तीन भाषा नीति का विरोध
सीबीएसई के तीन भाषा नीति का के. अन्नामलाई ने पूरी तरीके से अभी तक समर्थन नहीं किया है। के. अन्नामलाई ने तमिलनाडु के छात्रों पर तीन भाषा नीति को अवसर नहीं बल्कि एक दवाब बताया है। अभी तमिलनाडु में दो भाषा चली आ रही है। एक तमिल और दूसरा अंग्रेजी। के. अन्नामलाई तीन भाषा नीति का विरोध नहीं कर रहे बल्कि वह बच्चों पर इस नीति का दवाब बता रहे है। तमिलनाडु में भाषा पर 1960 के दशक से ही काफी विवाद और आंदोलन होते आए है।
CBSI की तीन भाषा नीति से तमिलनाडु की जनता भी खुश नहीं है। के. अन्नामलाई को जननेता माना जाता है और जनता की परेशानी को राज्य और केंद्र तक पहुंचाना के. अन्नामलाई के लिए हमेशा से ही अहम रहता है। के. अन्नामलाई बीजेपी के प्रमुख चेहरों में से एक है। अगर वह खुद बीजेपी की इस 3 भाषा नीति का विरोध कर रहे है तो के. अन्नामलाई तमिलनाडु में भारतीय जनता पार्टी के विचारों से दूर जाते दिखाई दे रहे है। अगर भारतीय जनता पार्टी का शीर्ष नेतृत्व के. अन्नामलाई को अपने पार्टी में जोड़कर रखना चाहते है तो फिर उन्हें के. अन्नामलाई की शर्तो को मानना पड़ सकता है।







