ग्रामीण क्षेत्रों और शहरों में रसोई गैस (LPG) सिलेंडर की बुकिंग के नियमों में हालिया बदलाव और कथित किल्लत को लेकर कई खबरें और भ्रांतियां फैल रही हैं। सरकार और तेल कंपनियों (OMCs) का मुख्य उद्देश्य जमाखोरी (Hoarding) को रोकना और वास्तविक उपभोक्ताओं तक समय पर गैस पहुँचाना है।
बुकिंग के नए नियम – क्या वाकई 45 दिन का अंतर है?
सोशल मीडिया और कुछ स्थानीय खबरों में यह दावा किया जा रहा है कि ग्रामीण क्षेत्रों में अब 45 दिन से पहले सिलेंडर बुक नहीं होगा। हालांकि आधिकारिक स्थिति को समझना जरूरी है
- सॉफ्टवेयर ब्लॉक (Refill Gap) – आमतौर पर गैस कंपनियां एक सिलेंडर लेने के बाद अगले सिलेंडर की बुकिंग के लिए 15 दिन का अंतर (Gap) रखती हैं।
- ग्रामीण क्षेत्रों का मामला – कुछ राज्यों में वितरण प्रणाली को सुव्यवस्थित करने के लिए स्थानीय स्तर पर नियमों को सख्त किया गया है। यदि किसी क्षेत्र में भारी किल्लत है तो प्रशासन अस्थायी रूप से बुकिंग की अवधि बढ़ा देता है ताकि एक ही व्यक्ति बार-बार सिलेंडर लेकर उसे ब्लैक में न बेचे।
- सच्चाई – फिलहाल राष्ट्रीय स्तर पर सरकार ने सभी के लिए अनिवार्य “45 दिन का नियम” लागू नहीं किया है लेकिन राशनिंग (Rationing) के तहत यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि एक परिवार को साल में मिलने वाले 12 सब्सिडी वाले सिलेंडरों का वितरण समान अंतराल पर हो।
ऑनलाइन बुकिंग ठप होने का कारण
कई राज्यों में उपभोक्ताओं को ऑनलाइन बुकिंग (WhatsApp, App या वेबसाइट) में समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। इसके पीछे मुख्य कारण निम्नलिखित हैं
- KYC अपडेट – सरकार ने सभी एलपीजी उपभोक्ताओं के लिए e-KYC अनिवार्य कर दिया है। जिन लोगों का आधार प्रमाणीकरण पूरा नहीं है उनके अकाउंट अस्थायी रूप से ब्लॉक किए जा रहे हैं जिससे बुकिंग नहीं हो पा रही है।
- सर्वर पर दबाव – सब्सिडी ट्रांसफर और नए डेटाबेस अपडेट के कारण तेल कंपनियों के पोर्टल्स पर तकनीकी लोड बढ़ा है।
- जमाखोरी पर लगाम – संदिग्ध खातों (जहाँ एक ही पते पर कई कनेक्शन हैं) को सिस्टम खुद ही ऑनलाइन बुकिंग से रोक रहा है।
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शहरों में अब कितने दिन में मिलेगा सिलेंडर?
शहरों में भी वितरण की समयसीमा में बदलाव की खबरें हैं। वर्तमान स्थिति के अनुसार
| क्षेत्र | बुकिंग अंतराल (अनुमानित) | डिलीवरी का समय |
| शहरी क्षेत्र | 15 से 21 दिन | 24 – 48 घंटे |
| ग्रामीण क्षेत्र | 30 से 45 दिन (विशिष्ट परिस्थितियों में) | 3 – 7 दिन |
नोट – शहरों में यदि कोई उपभोक्ता 15 दिन से पहले बुकिंग की कोशिश करता है, तो उसे “Refill booking not allowed” का संदेश मिलता है।
एलपीजी की किल्लत के मुख्य कारण
लॉजिस्टिक्स और सप्लाई चेन
भारत अपनी एलपीजी जरूरत का लगभग 60% हिस्सा आयात करता है। वर्तमान किल्लत के पीछे गहरे भू-राजनीतिक और लॉजिस्टिक कारण हैं:
पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव (Strait of Hormuz)-
वर्तमान में (मार्च 2026) इज़राइल-हमास और अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) का मार्ग प्रभावित हुआ है। भारत के कुल एलपीजी आयात का लगभग 90% इसी संकरे समुद्री मार्ग से आता है। युद्ध की स्थिति के कारण जहाजों को लंबा रास्ता (अफ्रीका के नीचे से) लेना पड़ रहा है, जिससे
- जो सफर 4 दिन में पूरा होता था, उसे अब 20-25 दिन लग रहे हैं।
- शिपिंग इंश्योरेंस और माल ढुलाई की लागत (Freight cost) कई गुना बढ़ गई है।
भंडारण क्षमता की कमी (Strategic Storage) –
कच्चे तेल (Crude Oil) के विपरीत, भारत के पास एलपीजी का बहुत बड़ा ‘स्ट्रेटेजिक रिजर्व’ नहीं है। भारत में आमतौर पर केवल 15-20 दिनों का ही गैस स्टॉक रहता है। सप्लाई चेन में जरा सी भी देरी होते ही इसका असर सीधे रसोई तक पहुँचने लगता है।
घरेलू उत्पादन और बढ़ती मांग-
भारत में प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के बाद गैस कनेक्शनों की संख्या करोड़ों में पहुँच गई है, लेकिन घरेलू रिफाइनरियों में एलपीजी का उत्पादन उस गति से नहीं बढ़ा। मांग और आपूर्ति के बीच यह बड़ा अंतर आयात पर निर्भरता को और बढ़ा देता है।
डॉलर के मुकाबले गिरता रुपया और LPG पर असर
- महंगा आयात – अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल और गैस डॉलर में खरीदी जाती है। मार्च 2026 में रुपया अपने सर्वकालिक निचले स्तर (करीब ₹92.14 प्रति डॉलर) पर पहुँच गया है। जब रुपया गिरता है, तो तेल कंपनियों को उतनी ही गैस खरीदने के लिए अधिक रुपये खर्च करने पड़ते हैं।
LPG की किल्लत के मुख्य कारण (Crisis Factors) भारत में
बाजार में गैस की कमी या देरी के पीछे कई महत्वपूर्ण कारण हैं
- कमर्शियल उपयोग – घरेलू सिलेंडरों (14.2 किलो) का अवैध रूप से होटलों और ढाबों में इस्तेमाल होना। इससे घरेलू उपभोक्ताओं के लिए स्टॉक कम पड़ जाता है।
- सर्दियों में मांग में वृद्धि – ठंड के मौसम में गैस की खपत बढ़ जाती है, जिससे सप्लाई चेन पर दबाव पड़ता है।
- आयात और लॉजिस्टिक्स – भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है। अंतरराष्ट्रीय शिपिंग में देरी या बंदरगाहों पर जाम से वितरण प्रभावित होता है।
- पैनिक बुकिंग – जब भी नियम बदलने की खबर आती है लोग डर के मारे बुकिंग शुरू कर देते हैं जिससे कृत्रिम किल्लत पैदा हो जाती है।
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जमाखोरी रोकने के लिए सरकार के अन्य कदम
- Biometric Verification – अब डिलीवरी मैन घर आकर बायोमेट्रिक ले सकता है ताकि यह सुनिश्चित हो कि सिलेंडर सही व्यक्ति को मिला है।
- One Time Password (DAC) – बिना ओटीपी शेयर किए डिलीवरी पूरी नहीं होती जिससे रास्ते में सिलेंडर की चोरी रुकती है।
- कनेक्शन लिमिट – एक नाम पर एक से ज्यादा सक्रिय कनेक्शन होने पर उन्हें काटा जा रहा है।
सरकार का उद्देश्य आपको परेशान करना नहीं बल्कि गैस की कालाबाजारी रोकना है। यदि आपकी बुकिंग नहीं हो रही है तो सबसे पहले अपनी गैस एजेंसी जाकर e-KYC पूरा करवाएं। 45 दिन का नियम केवल उन क्षेत्रों या खातों पर लागू हो सकता है जहाँ अनियमितता पाई गई है।







