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ईरान और रूस के तेल पर छूट खत्म अमरीका का सख्त रुख -वैश्विक ऊर्जा बाजार पर बढ़ेगा दबाव

ईरान और रूस के तेल पर छूट खत्म अमरीका का सख्त रुख -वैश्विक ऊर्जा बाजार पर बढ़ेगा दबाव
नवजोत कौर सिद्धू
On: अप्रैल 25, 2026 2:14 अपराह्न
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पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच अमेरिका ने एक अहम निर्णय लेते हुए ईरान और रूस के तेल पर दी जा रही अस्थायी छूट (waiver) को आगे नहीं बढ़ाने का ऐलान किया है। अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट के इस फैसले ने अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार, ऊर्जा सुरक्षा और कई देशों की अर्थव्यवस्था पर गहरा प्रभाव डालने की आशंका पैदा कर दी है। यह कदम ऐसे समय में आया है जब स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में संकट के कारण पहले ही तेल आपूर्ति बाधित हो रही है।अमरीका के इस फैसले ने विश्व बाजार में खलबली मचा दी है।

पहले दी थी राहत

अगर हम पीछे मुड़कर देखें, तो दुनिया के हालात अलग थे। मिडिल ईस्ट यानी मध्य पूर्व के देशों में तनाव अपने चरम पर था। खासकर समुद्र का वह हिस्सा जिसे ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ कहा जाता है, वहां युद्ध जैसे हालात थे। दुनिया का एक बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से तेल मंगाता है। उस समय डर था कि अगर सप्लाई रुक गई तो पेट्रोल-डीजल के दाम दोगुने हो सकते हैं।ऐसे नाजुक समय में अमेरिका ने समझदारी दिखाते हुए कुछ देशों को रूस और ईरान से तेल मंगाने की इजाजत दी थी। इस फैसले का मकसद केवल इतना था कि बाजार संतुलित रहे और आम लोगों को अचानक से महंगी कीमतों का बोझ न सहना पड़े। लेकिन अब अमेरिका कह रहा है कि वह समय बीत चुका है और अब सख्ती जरूरी है।

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क्यों बदला गया फैसला ?

अमेरिका के इस यू-टर्न के पीछे कई बड़े कारण हैं। पहला कारण तो यह है कि अमेरिका अब रूस की आर्थिक कमर पूरी तरह तोड़ना चाहता है ताकि वह यूक्रेन युद्ध को आगे न बढ़ा सके। रूस की सबसे बड़ी ताकत उसका तेल और गैस है। अगर उसका तेल बिकना बंद हो जाएगा, तो उसके पास युद्ध के लिए पैसे कम पड़ जाएंगे।दूसरा कारण ईरान है। अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु कार्यक्रम को लेकर लंबे समय से खींचतान चल रही है। अमेरिका चाहता है कि ईरान पर इतना आर्थिक दबाव बनाया जाए कि वह उसकी शर्तों को मानने के लिए मजबूर हो जाए। इसके अलावा, अमेरिका को लगता है कि अब बाजार में तेल की कोई कमी नहीं है, क्योंकि अमेरिका खुद और कुछ अन्य देश अब पहले से कहीं ज्यादा तेल का उत्पादन कर रहे हैं।

आम आदमी पर असर तय

जब भी कच्चे तेल की सप्लाई कम होती है, तो उसका सीधा असर उसकी कीमतों पर पड़ता है। इस फैसले के बाद आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम बढ़ सकते हैं। अगर कच्चा तेल महंगा होता है, तो पूरी दुनिया में तेल रिफाइन करने वाली कंपनियों की लागत बढ़ जाएगी। इसका नतीजा यह होगा कि पेट्रोल पंपों पर तेल महंगा मिलेगा।दुनिया पहले ही कई तरह की आर्थिक चुनौतियों से गुजर रही है। कहीं बेरोजगारी है तो कहीं खाने-पीने की चीजों के दाम आसमान छू रहे हैं। ऐसे में तेल का महंगा होना आग में घी डालने जैसा काम करेगा। जब डीजल महंगा होता है, तो ट्रक और जहाजों का किराया बढ़ जाता है, जिससे अनाज, सब्जियां और जरूरत का हर सामान महंगा हो जाता है।

भारत के लिए बड़ी चुनौती

भारत के नजरिए से देखें तो यह खबर काफी चिंताजनक है। भारत अपनी जरूरत का लगभग 85 प्रतिशत तेल दूसरे देशों से खरीदता है। पिछले एक-डेढ़ साल में भारत ने रूस से काफी सस्ता तेल खरीदा है, जिससे हमारे देश में पेट्रोल-डीजल की कीमतें एक हद तक स्थिर बनी रहीं। रूस से मिल रहे इस डिस्काउंट की वजह से सरकारी खजाने पर भी बोझ कम पड़ा था।लेकिन अब अगर अमेरिका की सख्ती बढ़ती है, तो भारत के लिए रूस से तेल मंगाना कठिन हो जाएगा। अगर भारत को रूस की जगह दूसरे देशों से महंगे दाम पर तेल खरीदना पड़ा, तो देश में महंगाई फिर से बढ़ सकती है। सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह होगी कि वह कैसे अंतरराष्ट्रीय बाजार की इन बढ़ी हुई कीमतों का बोझ आम जनता तक पहुंचने से रोके।

अमरीका का राजनैतिक संदेश देने की कोशिश 

अमेरिका का यह फैसला केवल व्यापार से जुड़ा नहीं है, बल्कि इसमें गहरी राजनीति भी छिपी है। अमेरिका दुनिया को यह संदेश देना चाहता है कि वह अपनी नीतियों को लेकर बहुत सख्त है। वह यह भी दिखाना चाहता है कि वैश्विक बाजार में अभी भी उसकी पकड़ सबसे मजबूत है। लेकिन दूसरी तरफ, रूस और चीन जैसे देश भी चुप नहीं बैठने वाले। वे भी अमेरिका के इन प्रतिबंधों को बेअसर करने के लिए नए-नए रास्ते तलाश रहे हैं।

सावधान रहने की जरूरत

कुल मिलाकर देखा जाए तो अमेरिका का यह फैसला पूरी दुनिया के लिए एक बड़ी परीक्षा की घड़ी है। आने वाले कुछ हफ्ते बहुत महत्वपूर्ण होंगे। अगर कच्चे तेल की कीमतें बहुत ज्यादा बढ़ती हैं, तो इसका असर दुनिया के हर देश की जीडीपी और आम आदमी की बचत पर पड़ेगा।अब देखना यह होगा कि भारत सरकार और दुनिया के अन्य बड़े देश इस स्थिति से निपटने के लिए क्या कदम उठाते हैं। फिलहाल, बाजार में हलचल तेज है और हर किसी की नजर तेल की बढ़ती कीमतों पर टिकी है।

Pradeep Pandey

A versatile writer mainly works on politics, business, crime, current affairs and entertainment

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