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मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष के कारण सोने चांदी में भारी गिरावट और कीमती धातुओं के बाजार में उथल-पुथल 

मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष के कारण सोने चांदी में भारी गिरावट और कीमती धातुओं के बाजार में उथल-पुथल 
नवजोत कौर सिद्धू
On: मार्च 19, 2026 6:23 अपराह्न
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​मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) हमेशा से वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए एक संवेदनशील केंद्र रहा है। जब भी इस क्षेत्र में भू-राजनीतिक तनाव (Geopolitical Tension) बढ़ता है तो उसका सीधा असर कच्चे तेल और कीमती धातुओं —सोना और चांदी —पर पड़ता है। हालिया संघर्षों ने निवेशकों के बीच अनिश्चितता पैदा कर दी है जिससे कीमतों में अप्रत्याशित उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है।

​सुरक्षित निवेश (Safe Haven) के रूप में सोने का महत्व

​इतिहास गवाह है कि जब भी युद्ध या आर्थिक मंदी की आहट होती है निवेशक शेयर बाजार और करेंसी से पैसा निकालकर सोने में लगाते हैं। इसे ‘Safe Haven Asset’ कहा जाता है।

  • लिक्विडिटी – सोने को दुनिया में कहीं भी आसानी से कैश कराया जा सकता है।
  • स्थिरता – मुद्रा की वैल्यू गिर सकती है लेकिन सोने की अपनी एक इंट्रिंसिक वैल्यू होती है।

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​कीमतों में गिरावट के पीछे के संभावित कारण

​आमतौर पर युद्ध के समय सोना महंगा होता है लेकिन अगर कीमतों में भारी गिरावट आती है तो इसके पीछे निम्नलिखित आर्थिक सिद्धांत काम करते हैं

  • ​ प्रॉफिट बुकिंग (Profit Booking) – ​जब कीमतें अपने उच्चतम स्तर (All-time High) पर पहुँच जाती हैं, तो बड़े निवेशक और सेंट्रल बैंक अपना मुनाफा वसूलने के लिए सोना बेचना शुरू कर देते हैं। इससे बाजार में सप्लाई बढ़ती है और कीमतें नीचे आती हैं।
  • ​अमेरिकी डॉलर की मजबूती – ​अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने का व्यापार डॉलर में होता है। यदि अमेरिकी फेडरल रिजर्व ब्याज दरों में कटौती नहीं करता या डॉलर इंडेक्स मजबूत होता है, तो सोना अन्य देशों की करेंसी के लिए महंगा हो जाता है, जिससे मांग घटती है और कीमतें गिरती हैं।
  • ​मार्जिन कॉल्स (Margin Calls)- शेयर बाजार में भारी गिरावट के समय, निवेशकों को अपने घाटे की भरपाई के लिए फंड की जरूरत होती है। ऐसे में वे अपने सोने के स्टॉक को बेचकर नकदी जुटाते हैं, जो कीमतों को नीचे धकेलता है।

​ चांदी – औद्योगिक मांग बनाम निवेश

​चांदी की प्रकृति सोने से थोड़ी भिन्न है। यह केवल एक कीमती धातु नहीं बल्कि एक इंडस्ट्रियल कमोडिटी भी है।

  • इलेक्ट्रिक वाहन (EV) और सोलर पैनल –  चांदी का उपयोग क्लीन एनर्जी में बड़े पैमाने पर होता है।
  • अस्थिरता (Volatility) –  चांदी का बाजार सोने की तुलना में छोटा है, इसलिए इसमें गिरावट या उछाल बहुत तीव्र (Aggressive) होता है। यदि मिडिल ईस्ट संकट के कारण वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग धीमी होती है, तो औद्योगिक मांग घटने के डर से चांदी में सोने से कहीं ज्यादा बड़ी गिरावट देखी जाती है।

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​ भारतीय बाजार पर प्रभाव (MCX और डोमेस्टिक रेट्स)

​भारत दुनिया में सोने का दूसरा सबसे बड़ा उपभोक्ता है। भारतीय कीमतों पर तीन चीजों का असर पड़ता है

  • अंतरराष्ट्रीय भाव (COMEX)
  • रुपया-डॉलर एक्सचेंज रेट
  • इंपोर्ट ड्यूटी (आयात शुल्क)

​यदि सरकार आयात शुल्क में कोई बदलाव करती है तो घरेलू बाजार में कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार के मुकाबले काफी ज्यादा गिर या बढ़ सकती हैं।

​भविष्य का रुझान –  क्या अभी खरीदने का सही समय है?

​विशेषज्ञों का मानना है कि मिडिल ईस्ट में तनाव लंबा खिंचने पर लंबी अवधि में सोना और चांदी ‘बुलिश’ (तेजी की ओर) ही रहेंगे। लघु अवधि (Short-term) में आई गिरावट को निवेशक ‘Buy on Dip’ यानी गिरावट पर खरीदारी के अवसर के रूप में देख सकते हैं।

आज का भाव और गिरावट (19 मार्च 2026)

​आज सोने और चांदी की कीमतों में कल के मुकाबले अच्छी गिरावट देखी गई है।

धातुआज का भाव (प्रति 10 ग्राम/किग्रा)कल के मुकाबले गिरावट
24 कैरेट सोना₹1,54,640 (प्रति 10 ग्राम)-₹2,780 ↓
22 कैरेट सोना₹1,41,750 (प्रति 10 ग्राम)-₹2,550 ↓
चांदी₹2,60,000 (प्रति किग्रा)

नोट –  ये भाव सांकेतिक हैं और इनमें GST, टीसीएस या मेकिंग चार्ज शामिल नहीं हैं। अलग-अलग शहरों में भाव थोड़े भिन्न हो सकते हैं।

​पिछले 5 दिनों का प्रभाव (ट्रेंड चार्ट)

​पिछले 5 दिनों में सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव रहा है लेकिन कुल मिलाकर रुझान नीचे की ओर (Bearish) है।

  • 15 मार्च –  ₹1,59,660 (स्थिर रहा)
  • 16 मार्च –  ₹1,57,420 (-₹2,240 की गिरावट)
  • 17 मार्च –  ₹1,58,080 (+₹660 की हल्की रिकवरी)
  • 18 मार्च – ₹1,57,420 (-₹660 की गिरावट)
  • 19 मार्च (आज) –  ₹1,54,640 (-₹2,780 की भारी गिरावट)

कुल प्रभाव – पिछले 5 दिनों में 24 कैरेट सोना लगभग ₹5,000 प्रति 10 ग्राम तक सस्ता हुआ है।

​निवेश के लिए ध्यान रखने योग्य बातें

  • ​विविधीकरण (Diversification) – अपना पूरा पैसा एक साथ सोने में न लगाएं।
  • ​डिजिटल गोल्ड और SGB –  फिजिकल गोल्ड के बजाय सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) या गोल्ड ETF पर विचार करें जहाँ मेकिंग चार्ज का झंझट नहीं होता।

Swati Pandey

A versatile writer mainly works on trending news, daily updates from politics, business, crime, current affairs and entertainment.

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