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कैसे मनाया जाता है पोंगल का त्योहार- जानिए क्या होता है इसमें खास 

कैसे मनाया जाता है पोंगल का त्योहार- जानिए क्या होता है इसमें खास 
नवजोत कौर सिद्धू
On: जनवरी 13, 2026 2:30 अपराह्न
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पोंगल दक्षिण भारत विशेष रूप से तमिलनाडु का सबसे महत्वपूर्ण और उल्लासपूर्ण कृषि उत्सव है। यह त्यौहार प्रकृति सूर्य देव और पशुधन के प्रति आभार व्यक्त करने का पर्व है।

पोंगल क्या है और यह कहाँ मनाया जाता है?

पोंगल एक फसल उत्सव (Harvest Festival) है। “पोंगल” शब्द का तमिल में अर्थ होता है “उबालना” या “उफान” यह नए चावल को दूध में उबालकर गुड़ के साथ पकाकर सूर्य देव को अर्पित करने की परंपरा को दर्शाता है।

मुख्य क्षेत्र –  यह मुख्य रूप से तमिलनाडु का सबसे बड़ा त्यौहार है। इसके अलावा इसे पुडुचेरी, श्रीलंका और दुनिया भर में बसे तमिल समुदायों द्वारा मनाया जाता है।

समय –  यह तमिल महीने ‘थाई’ की पहली तारीख को शुरू होता है जो अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार अमूमन 14 या 15 जनवरी को पड़ता है।

यह कितने दिनों का होता है? (4 दिनों का कार्यक्रम)

पोंगल का उत्सव कुल चार दिनों तक चलता है। हर दिन का अपना एक विशेष महत्व और अनुष्ठान होता है|

प्रथम दिन – भोगी पोंगल (Bhogi Pongal)

यह दिन देवराज इंद्र को समर्पित है। लोग अपने घरों की सफाई करते हैं और पुरानी बेकार वस्तुओं को जलाते हैं। यह बुराई के अंत और नए जीवन की शुरुआत का प्रतीक है।

द्वितीय दिन – सूर्य पोंगल (Surya Pongal)

यह मुख्य पोंगल है। इस दिन भगवान सूर्य की पूजा की जाती है। घर के आंगन में मिट्टी के बर्तन में नए चावल, दूध और गुड़ से ‘पोंगल’ (प्रसाद) पकाया जाता है। जब बर्तन से दूध उफनकर बाहर गिरता है, तो लोग “पोंगालो पोंगल” का उद्घोष करते हैं, जो समृद्धि का संकेत है।

तृतीय दिन –  मट्टू पोंगल (Mattu Pongal)

यह दिन पशुधन (विशेषकर गाय और बैल) की पूजा के लिए है। बैलों को नहलाया जाता है उनके सींगों को रंगा जाता है और उन्हें माला पहनाई जाती है। इसी दिन तमिलनाडु का प्रसिद्ध साहसिक खेल जल्लीकट्टू भी आयोजित किया जाता है।

चतुर्थ दिन –  कन्नम पोंगल (Kaanum Pongal)

यह मेल-मिलाप का दिन है। लोग अपने रिश्तेदारों और दोस्तों से मिलते हैं। परिवार के साथ बाहर घूमने जाते हैं और बड़े-बुजुर्गों का आशीर्वाद लेते हैं। महिलाएं पक्षियों को भोजन खिलाकर अपने भाइयों की सुख-समृद्धि की कामना करती हैं।

किसकी पूजा की जाती है और क्यों?

इस त्यौहार में मुख्य रूप से तीन शक्तियों की पूजा होती है|

  • सूर्य देव –  फसल के पकने और जीवन के लिए ऊर्जा देने के लिए सूर्य को धन्यवाद दिया जाता है।
  • इंद्र देव –  अच्छी वर्षा और कृषि की संपन्नता के लिए वर्षा के देवता की पूजा होती है।
  • पशुधन (गाय/बैल) –  किसान अपनी खेती में मदद करने वाले मवेशियों के प्रति कृतज्ञता प्रकट करते हैं।

पोंगल की विशेषताएं और परंपराएं

कोलम (Rangoli) –  महिलाएं घर के प्रवेश द्वार पर चावल के आटे से सुंदर रंगोलियां बनाती हैं जिन्हें ‘कोलम’ कहा जाता है।

गन्ना – इस त्यौहार में गन्ने का विशेष महत्व है। गन्ने को घर के द्वार पर रखा जाता है और प्रसाद के रूप में खाया जाता है।

नए कपड़े –  परिवार के सभी सदस्य नए वस्त्र पहनते हैं और खुशी साझा करते हैं।

त्योहार के पीछे कारण 

भारत एक कृषि प्रधान देश है। फसल कटने के बाद किसान अपनी मेहनत का फल प्राप्त करता है और उन प्राकृतिक शक्तियों का आभार मानता है जिनकी मदद से फसल सफल हुई।

इसमें सबसे ज्यादा पूजा कौन सा वर्ग करता है?

पोंगल किसान वर्ग (कृषक समुदाय) का मुख्य त्यौहार है। चूँकि यह फसल की कटाई से जुड़ा है इसलिए ग्रामीण इलाकों में इसे बेहद भव्य तरीके से मनाया जाता है। हालांकि आज के समय में यह जाति और वर्ग से ऊपर उठकर हर तमिल परिवार की पहचान बन चुका है।

Dr Pankaj Sharma

fitness coach and writer mainly work on sports, fitness, Religious, foreign news, and technology

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