व्यापारभारतविदेशी समाचारखेलजीवन शैलीराजनीतिधर्मभौगोलिकसेलिब्रेटीज़शिक्षास्वास्थ्य

भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट- Middle East में जारी जंग के चलते के सेंसेक्स और निफ्टी भारी टूटा  निवेशकों का लाखों करोड़ों रुपये डूब 

Middle East में जारी जंग के चलते के सेंसेक्स और निफ्टी भारी टूटा  निवेशकों का लाखों करोड़ों रुपये डूब
नवजोत कौर सिद्धू
On: मार्च 23, 2026 7:24 अपराह्न
Follow Us:

भारतीय शेयर बाजार में आज यानी 23 मार्च 2026 को “ब्लैक मंडे” जैसी स्थिति देखने को मिली है। अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते युद्ध के तनाव ने वैश्विक अर्थव्यवस्था के साथ-साथ दलाल स्ट्रीट (Dalal Street) पर भी गहरा प्रहार किया है।

​सेंसेक्स और निफ्टी में आई यह ऐतिहासिक गिरावट निवेशकों के लिए किसी बुरे सपने से कम नहीं रही। 

​बाजार का हाल –  आंकड़ों की जुबानी

​सोमवार सुबह जैसे ही बाजार खुला चारों तरफ बिकवाली का माहौल था। शुरुआती कारोबार में ही सेंसेक्स और निफ्टी ने गोता लगाना शुरू कर दिया।

  • BSE सेंसेक्स –  30 शेयरों वाला प्रमुख सूचकांक 1,800 अंक से ज्यादा टूटकर 72,600 के स्तर के करीब बंद हुआ।
  • NSE निफ्टी 50 –  निफ्टी में भी भारी बिकवाली रही और यह 600 अंकों से अधिक की गिरावट के साथ 22,500 के महत्वपूर्ण मनोवैज्ञानिक स्तर के पास आ गया।
  • निवेशकों की संपत्ति –  इस एक दिन की गिरावट में निवेशकों के लगभग 11 लाख करोड़ रुपये से 15 लाख करोड़ रुपये स्वाहा हो गए।
  • बाजार की चौड़ाई (Market Breadth) –  बाजार का मिजाज इतना खराब था कि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर गिरने वाले शेयरों की संख्या बढ़ने वाले शेयरों के मुकाबले बहुत अधिक थी। करीब 2,300 से अधिक शेयर लाल निशान में बंद हुए।

​बाजार गिरने के 5 मुख्य कारण

​इस महा-गिरावट के पीछे केवल एक कारण नहीं, बल्कि कई भू-राजनीतिक और आर्थिक कारकों का “परफेक्ट स्टॉर्म” (Perfect Storm) था।

​अमेरिका-इजरायल बनाम ईरान युद्ध (Geopolitical Tension)

​पश्चिम एशिया (Middle East) में युद्ध अब अपने चौथे हफ्ते में प्रवेश कर चुका है। ताजा रिपोर्टों के अनुसार अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान को होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) खोलने के लिए 48 घंटे का अल्टीमेटम देने के बाद युद्ध और भड़क गया है। ईरान की जवाबी कार्रवाई की धमकियों ने वैश्विक निवेशकों को डरा दिया है जिससे वे ‘रिस्क-ऑफ’ (Risk-off) मोड में आ गए हैं और सुरक्षित निवेश जैसे सोने (Gold) की ओर भाग रहे हैं।

शेयर बाजार- सेंसेक्स और निफ्टी मे भारी अंको

​ कच्चे तेल की कीमतों में उछाल (Crude Oil Spike)

​भारत अपनी तेल जरूरतों का 80% से अधिक आयात करता है। होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने की आशंका से वैश्विक तेल आपूर्ति का 20% हिस्सा खतरे में है। इसके चलते ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) की कीमतें $109 प्रति बैरल के पार निकल गई हैं। तेल की बढ़ती कीमतें भारत के चालू खाता घाटे (CAD) को बढ़ाती हैं और महंगाई को जन्म देती हैं जो शेयर बाजार के लिए नकारात्मक है।

​भारतीय रुपये का ऐतिहासिक अवतरण (Rupee at Record Low)

​डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया आज अपने सबसे निचले स्तर 93.94 पर पहुंच गया। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) द्वारा लगातार की जा रही बिकवाली और कच्चे तेल के महंगे होने के कारण रुपये पर भारी दबाव है। कमजोर रुपया विदेशी निवेशकों के लिए भारतीय बाजार को कम आकर्षक बनाता है।

​विदेशी संस्थागत निवेशकों (FPIs) की भारी बिकवाली

​मार्च महीने में अब तक FPIs भारतीय बाजार से ₹1 लाख करोड़ से अधिक की निकासी कर चुके हैं। वैश्विक अनिश्चितता के दौर में विदेशी फंड मैनेजर उभरते बाजारों (Emerging Markets) से पैसा निकालकर अमेरिकी ट्रेजरी बांड्स में लगा रहे हैं।

​ मिडकैप और स्मॉलकैप में “बुलबुला” फूटने का डर

​लंबे समय से मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में बहुत अधिक तेजी देखी जा रही थी। आज की गिरावट में इन दोनों सूचकांकों में 4% तक की गिरावट दर्ज की गई। निवेशकों को डर है कि युद्ध के चलते इन कंपनियों की लागत बढ़ेगी और मार्जिन में कमी आएगी।

​क्षेत्रवार प्रभाव (Sectoral Impact)

सेक्टरप्रभावमुख्य कारण
एविएशन (Aviation)भारी गिरावटतेल की बढ़ती कीमतों से एयरलाइन कंपनियों का ईंधन खर्च (ATF) बढ़ जाएगा। इंडिगो और स्पाइसजेट के शेयरों में 7% तक की गिरावट देखी गई।
पेंट्स और टायरनकारात्मकइन उद्योगों में कच्चे तेल के डेरिवेटिव्स का उपयोग होता है। कच्चे माल की लागत बढ़ने की आशंका से एशियन पेंट्स जैसे शेयर टूटे।
बैंक (PSU & Private)बिकवाली का दबावबाजार में नकदी की कमी और संभावित ब्याज दर वृद्धि के डर से बैंकिंग इंडेक्स 3% से ज्यादा गिरा।
IT सेक्टरमिला-जुलाहालांकि रुपये की कमजोरी IT कंपनियों के लिए अच्छी होती है, लेकिन अमेरिका में मंदी की आहट ने इंफोसिस और टीसीएस जैसे दिग्गजों पर दबाव बनाए रखा।

विशेषज्ञों की राय और आगे की राह

​बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक युद्ध की स्थिति स्पष्ट नहीं होती तब तक उतार-चढ़ाव जारी रहेगा। डॉ. वी.के. विजयकुमार (Geojit Financial Services) के अनुसार

​”बाजार पूरी तरह से हेडलाइंस पर आधारित है। होर्मुज जलडमरूमध्य का मुद्दा केवल भारत ही नहीं बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए ‘सप्लाई शॉक’ पैदा कर सकता है। निवेशकों को अभी आक्रामक खरीदारी से बचना चाहिए।”

Read more:

​निवेशकों को क्या करना चाहिए?

  • पैनिक सेलिंग से बचें – यदि आपका पोर्टफोलियो अच्छी गुणवत्ता वाले शेयरों से बना है तो घबराकर उन्हें न बेचें। ऐतिहासिक रूप से बाजार युद्ध के झटकों से उबर जाते हैं।
  • नकद बचाकर रखें –  गिरावट के इस दौर में अच्छे शेयर आकर्षक कीमतों पर मिल रहे हैं। धीरे-धीरे निवेश (SIP मोड) करना बेहतर रणनीति होगी।
  • सुरक्षित एसेट पर ध्यान दें –  पोर्टफोलियो में सोने (Gold) की मौजूदगी जोखिम को कम करने में मदद करती है।

​भारतीय शेयर बाजार में आज का हाहाकार वैश्विक अस्थिरता का परिणाम है। 22,500 का निफ्टी स्तर अब एक मजबूत सपोर्ट के रूप में देखा जा रहा है। यदि तनाव और बढ़ता है तो बाजार और नीचे जा सकता है लेकिन लंबी अवधि के लिए भारत की विकास गाथा (Growth Story) अभी भी मजबूत बनी हुई है।

Dr Pankaj Sharma

fitness coach and writer mainly work on sports, fitness, Religious, foreign news, and technology

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now

और पढ़ें

Leave a Comment