इस्लामाबाद/लाहौर। पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री और तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) प्रमुख इमरान खान को लेकर सोमवार देर रात सोशल मीडिया पर अचानक उनकी ‘मौत’ की अफवाह फैल गई। देखते ही देखते X (पूर्व ट्विटर), फेसबुक और व्हाट्सएप समूहों में यह खबर जंगल की आग की तरह फैलने लगी कि अटॉक जेल में बंद इमरान खान की तबीयत बिगड़ने के बाद उनका निधन हो गया।

पाकिस्तान सरकार की चुप्पी ने इन दावों को और हवा दे दी। लेकिन सबसे बड़ा सवाल तब उठा जब इमरान खान के बेटे क़ासिम खान की एक पोस्ट सामने आई— “मेरे पिता जिंदा हैं तो सरकार सबूत क्यों नहीं देती? हमें मिलने तक नहीं दिया जा रहा।” इस एक बयान ने पूरे पाकिस्तान में राजनीतिक हलचल और गहरी कर दी।
सरकारी चुप्पी बनी शक की सबसे बड़ी वजह
इमरान खान की गिरफ्तारी और जेल स्थानांतरण से लेकर अब तक सरकार और जेल प्रशासन द्वारा जारी किए गए बयान लगातार संदिग्ध रहे हैं। जहां उनकी कानूनी टीम और परिवार ने बार-बार यह दावा किया कि उन्हें मुलाकात की अनुमति नहीं दी जा रही, वहीं सरकार ने हमेशा यही कहा कि सुरक्षा कारणों से मुलाकात व प्रतिबंध “अस्थायी” है।
मगर रविवार देर रात जब अचानक सोशल मीडिया में “इमरान खान की मौत” की ख़बर वायरल होने लगी, तो सरकारी संस्थानों ने इसे खारिज करने में लगभग दस घंटे का समय लिया। इस बीच तमाम बड़े पाकिस्तानी पत्रकार, मानवाधिकार संगठनों और PTI नेताओं ने आशंका जताई कि कहीं कुछ बड़ा तो नहीं हुआ। अगली सुबह इमरान खान के बेटे क़ासिम की पोस्ट ने इन आशंकाओं को लगभग पुष्ट कर दिया। उन्होंने लिखा—
“हमारे परिवार को 17 दिन से मुलाकात की इजाज़त नहीं है। अगर मेरे पिता ठीक हैं, तो सरकार उनकी ताज़ा तस्वीर क्यों नहीं जारी कर रही? हमें केवल एक सबूत चाहिए कि वे सुरक्षित हैं।”क़ासिम की पोस्ट ने सोशल मीडिया को झकझोर दिया।
इमरान की बहनों ने भी उठाए गंभीर सवाल
इमरान खान की बहन अलेमा खान ने आरोप लगाया है कि पुलिस और जेल प्रशासन उनके साथ दुर्व्यवहार कर रहा है, और हर बार बहाने बनाकर मुलाकात टाल दी जाती है। उन्होंने कहा—“हमसे कहा जाता है कि इमरान व्यस्त हैं, डॉक्टर आए हैं, या सुरक्षा कारणों से मुलाकात संभव नहीं। अब हमें भी संदेह है कि सरकार कुछ छिपा रही है।” वही उनकी बहन उज्मा खान ने तो साफ-साफ पूछा—
“क्या इमरान हमारे बीच हैं भी या नहीं? अगर हाँ, तो किसी स्वतंत्र कैमरे के सामने उनका वीडियो जारी क्यों नहीं किया जा रहा?” उनकी यह टिप्पणी पाकिस्तान के राजनीतिक माहौल को और अस्थिर बना गई है।
PTI का दावा—अंदर कुछ बड़ा हुआ है
PTI के प्रवक्ता रऊफ हसन ने गंभीर आरोप लगाया—
“अटॉक जेल के भीतर पिछले 72 घंटे से असामान्य गतिविधि देखी गई है। कई बैरकों को खाली कराया गया है। मोबाइल सिग्नल जाम किए गए। बाहर से पुलिस की अतिरिक्त कंपनियाँ तैनात की गई हैं। यह साधारण व्यवस्था नहीं लगती।” उन्होंने कहा कि पार्टी को भी किसी प्रकार की आधिकारिक जानकारी नहीं दी जा रही।
“इमरान खान पाकिस्तान की सबसे बड़ी राजनीतिक शख्सियत हैं। अगर सरकार यह भी नहीं बता पा रही कि वे सुरक्षित हैं, तो यह राष्ट्रीय संकट है।”
क्या अफवाहों के पीछे कोई ‘डिजिटल युद्ध’ चल रहा है?
कुछ विश्लेषकों का मानना है कि इमरान खान के आसपास हमेशा प्रचार युद्ध चलता रहा है। उनकी पार्टी सोशल मीडिया पर बेहद प्रभावशाली है। विरोधी दलों पर अक्सर यह आरोप लगता है कि वे उनके खिलाफ फर्जी सूचनाएँ फैलाते हैं।
लेकिन इस बार अफवाहों की प्रकृति और समय बेहद असामान्य है—अफवाहें आधी रात अचानक शुरू हुईं
कुछ ‘ब्लू टिक’ वाले खातों ने भी इन्हें पोस्ट किया
कुछ खातों की लोकेशन पाकिस्तान से नहीं, विदेश से ट्रेस हुई। कई साइबर विशेषज्ञों का मानना है कि यह “सूचना युद्ध” का हिस्सा हो सकता है, जहाँ किसी राजनीतिक नेता की स्थिति को लेकर भ्रम पैदा किया जाता है ताकि जनता में अस्थिरता फैले।
सरकार पर बढ़ता दबाव—मगर आधिकारिक बयान अस्पष्ट
अफवाहों के 12 घंटे बाद पाकिस्तान सरकार के सूचना मंत्रालय ने एक छोटा-सा बयान जारी कर कहा—“इमरान खान सुरक्षित हैं। उनकी तबीयत स्थिर है। सोशल मीडिया पर फैलाई जा रही खबरें पूरी तरह बेबुनियाद हैं।”
लेकिन यहां भी कोई तस्वीर, वीडियो या मेडिकल रिपोर्ट नहीं जारी की गई। सरकारी बयान में न तो तारीख थी, न समय। यही बात लोगों के मन में और भी संदेह पैदा कर रही है।
अटॉक जेल—जहाँ इमरान बंद हैं—पर पहले भी उठे थे सवाल…?
अटॉक जेल पाकिस्तान की हाई-सिक्योरिटी जेलों में गिनी जाती है।लेकिन कैदियों को लंबे समय तक अलग-थलग रखा जाता है| मेडिकल सुविधाएँ कमज़ोर हैं। राजनीतिक बंदियों के साथ अक्सर शक्ति का दुरुपयोग होता रहा है। पिछले महीने ही इमरान खान की वकील टीम ने दावा किया था कि—उन्हें डॉक्टर से मिलने नहीं दिया जा रहा उनके सेल में कैमरे लगाए गए हैं ,उन्हें मानसिक रूप से कमजोर करने की कोशिश हो रही है। इन बातों से भी यह अफवाह और मजबूत हुई कि शायद जेल के भीतर कुछ हुआ है।
अंतरराष्ट्रीय जगत भी चिंतित
ब्रिटिश सांसदों ने इमरान खान के “मानवाधिकार और स्वास्थ्य की स्थिति” पर तत्काल विवरण मांगा है। अमेरिकी विदेश विभाग ने कहा “हम पाकिस्तान को पारदर्शिता दिखाने का आग्रह करते हैं।” कई अंतरराष्ट्रीय मीडिया संगठनों ने भी यह सवाल उठाया कि पाकिस्तान सरकार एक पूर्व प्रधानमंत्री की स्थिति पर स्पष्ट बयान क्यों नहीं दे पा रही।
क्या अफवाहें किसी बड़े राजनीतिक मोड़ की ओर इशारा करती हैं? विश्लेषक कहते हैं कि यह केवल एक अफवाह नहीं, बल्कि पाकिस्तान की सत्तारूढ़ राजनीति का सेना और न्यायपालिका की शक्ति का PTI और सरकार के बीच चल रहे तनाव का एक बहुत बड़ा संकेत है।
इमरान खान का राजनीतिक कद ऐसा है कि उनकी रिहाई या मृत्यु—दोनों पाकिस्तान को हिलाकर रख सकते हैं। इसलिए कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार इतना बड़ा जोखिम नहीं उठा सकती। लेकिन परिवार से मुलाकात न करवाना, तस्वीर न जारी करना—ये सभी कदम बहुत सारे प्रश्न खड़े करते हैं। इमरान का बेटा क़ासिम—सबसे बड़ा सवाल छोड़ गया.?
बेटे की पोस्ट के बाद स्थिति और तनावपूर्ण हो गई है। उसने लिखा “मैं बस अपने पिता को देखना चाहता हूँ। उनका एक वीडियो, एक फोटो—कुछ तो दिखाएँ। क्या यह मांग गलत है?” इस पोस्ट के बाद पूरे पाकिस्तान में हैशटैग चल पड़ा #WhereIsImranKhan लाखों लोगों ने सरकार से जवाब मांगना शुरू कर दिया। सत्ता पर बैठे लोगों की रणनीति या वाकई कोई बड़ा खतरा?
कुछ सूत्र कहते हैं कि सरकार केवल अफवाहों को नजरअंदाज कर रही है ताकि वे खुद न बढ़ें। दूसरे कहते हैं कि इमरान को मानसिक दबाव में रखने के लिए सरकार जानबूझकर चुप है। लेकिन PTI का दावा है कि सरकार जानकारी छुपा रही है क्योंकि स्थिति “सामान्य नहीं” है। जवाब अभी भी अधूरासवाल और गहरे होते जा रहे हैं। पाकिस्तान की राजनीति में यह पहला मौका नहीं है जब एक बड़े नेता की सुरक्षा पर सवाल उठे हों।
लेकिन इमरान खान के मामले में परिवार से मुलाकात न होना आधिकारिक तस्वीर न आना,सोशल मीडिया पर अचानक अफवाहों का उभरना,जेल प्रशासन की चुप्पी पुलिस द्वारा बहनों के साथ कथित बदसलूकी इन सबने मिलकर यह मामला बेहद गंभीर बना दिया है।
क्या पाकिस्तान एक और राजनीतिक संकट की ओर बढ़ रहा?
विशेषज्ञ कहते हैं कि यदि सरकार स्थिति स्पष्ट नहीं करती, तो PTI समर्थक सड़कों पर उतर सकते हैं। देश में अस्थिरता बढ़ सकती है।सेना पर सवाल उठ सकते हैं अंतरराष्ट्रीय दबाव और बढ़ सकता है।क़ासिम खान का वह एक वाक्य पाकिस्तान की राजनीति पर भारी पड़ रहा है। “अगर वे जिंदा हैं, तो सबूत कहाँ है?” जब तक सरकार इसका जवाब नहीं देती, अफवाहें रुकने वाली नहीं,और शायद यह सवाल आने वाले कई दिनों तक पाकिस्तान की राजनीति का केंद्र बना रहेगा की इमरान अभी जिंदा है या नहीं…?






