न्यूजीलैंड, जो अपनी सांस्कृतिक विविधता और समावेशिता के लिए दुनिया भर में जाना जाता है, हाल के दिनों में कुछ सामाजिक तनावों का केंद्र रहा है। विशेष रूप से दक्षिण ऑकलैंड में आयोजित होने वाले ‘नगर कीर्तन’ सिखों का धार्मिक जुलूस को लेकर स्थानीय समुदायों के बीच मतभेद और विरोध की खबरें सामने आई हैं।
नगर कीर्तन क्या है और क्या है इसका महत्व
नगर कीर्तन सिख धर्म की एक अत्यंत महत्वपूर्ण और पवित्र परंपरा है। नगर का अर्थ है शहर या इलाका और कीर्तन का अर्थ है ईश्वरीय स्तुति का गायन।
- उद्देश्य – इसका मुख्य उद्देश्य गुरु ग्रंथ साहिब के संदेश को जन-जन तक पहुँचाना और मानवता शांति तथा प्रेम का प्रसार करना होता है।
- प्रक्रिया – इसमें पंज प्यारे पांच प्यारे जुलूस का नेतृत्व करते हैं जिनके पीछे गुरु ग्रंथ साहिब को एक सुसज्जित पालकी में ले जाया जाता है। श्रद्धालु सड़कों पर सफाई करते हैं और सेवा लंगर करते हैं।
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दक्षिण ऑकलैंड में विरोध के मुख्य कारण
दक्षिण ऑकलैंड में विरोध किसी एक कारण से नहीं बल्कि कई कारकों के मिश्रण का परिणाम है। यहाँ मुख्य विवादित बिंदु दिए गए हैं|
यातायात और सार्वजनिक व्यवधान
नगर कीर्तन में हजारों की संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं। इसके कारण दक्षिण ऑकलैंड की मुख्य सड़कें कई घंटों तक बंद रहती हैं। स्थानीय निवासियों का तर्क है कि इससे आपातकालीन सेवाओं एम्बुलेंस, पुलिस में बाधा आती है। दैनिक कामकाज पर जाने वाले लोगों को अत्यधिक देरी का सामना करना पड़ता है। स्थानीय व्यापारियों के व्यापार पर असर पड़ता है क्योंकि ग्राहक दुकानों तक नहीं पहुँच पाते।
- ध्वनि प्रदूषण और शोर-जुलूस के दौरान लाउडस्पीकर पर कीर्तन और धार्मिक नारों का उच्चारण किया जाता है। कुछ स्थानीय लोगों का कहना है कि रिहायशी इलाकों में ध्वनि का स्तर निर्धारित सीमा से अधिक होता है जिससे बुजुर्गों बीमारों और बच्चों को असुविधा होती है।
- राजनीतिक और वैचारिक मतभेद-हाल के वर्षों में विदेशों में होने वाले नगर कीर्तनों में खालिस्तान से संबंधित बैनर और नारों की मौजूदगी भी देखी गई है। हालांकि यह धार्मिक जुलूस का हिस्सा नहीं होता लेकिन कुछ गुटों द्वारा अपनी राजनीतिक मांगें रखने के कारण स्थानीय भारतीय समुदाय और अन्य समूहों के बीच तनाव पैदा हो गया है।
- कचरा प्रबंधन और स्वच्छता-जुलूस के मार्ग पर बड़ी मात्रा में भोजन लंगर वितरित किया जाता है। स्थानीय लोगों की शिकायत रही है कि आयोजन के बाद सड़कों पर प्लास्टिक कप प्लेट और बचा हुआ भोजन बिखरा रहता है जिससे इलाके की स्वच्छता प्रभावित होती है।
- विरोध प्रदर्शन का तरीका-दक्षिण ऑकलैंड में विरोध प्रदर्शन का तरीका मुख्य रूप से सांकेतिक और प्रशासनिक रहा है लेकिन कभी-कभी यह आमने-सामने की बहस में भी बदल गया है
- याचिकाएं और परिषद को शिकायत – स्थानीय निवासियों ने ऑकलैंड काउंसिल को औपचारिक शिकायतें भेजी हैं कि भविष्य में ऐसे बड़े आयोजनों के लिए अनुमति न दी जाए।
- मौन प्रदर्शन – कुछ समूह जुलूस के मार्ग पर तख्तियां लेकर खड़े होते हैं, जिन पर शांति और स्थानीय नियमों के पालन की अपील लिखी होती है।
- सोशल मीडिया अभियान – फेसबुक और अन्य प्लेटफार्मों पर स्थानीय निवासियों द्वारा एकजुट होकर इस मुद्दे पर अपनी नाराजगी व्यक्त की जा रही है।
- प्रशासन और पुलिस की भूमिका
- न्यूजीलैंड पुलिस और ऑकलैंड काउंसिल का रुख हमेशा संतुलन बनाने का रहा है।
- अधिकार बनाम जिम्मेदारी – पुलिस का कहना है कि न्यूजीलैंड के कानून के तहत हर समुदाय को अपनी धार्मिक स्वतंत्रता का पालन करने का अधिकार है बशर्ते वह शांतिपूर्ण हो।
- परमिट की शर्तें – परिषद अब आयोजकों पर कड़ी शर्तें लगा रही है, जिसमें ट्रैफिक मैनेजमेंट प्लान, कचरा उठाने की जिम्मेदारी और ध्वनि स्तर का ध्यान रखना अनिवार्य है।
समाधान की दिशा में कदम-इस संघर्ष को सुलझाने के लिए निम्नलिखित प्रयास किए जा सकते हैं|
- मार्ग में बदलाव – मुख्य सड़कों के बजाय ऐसे मार्गों का चयन करना जहाँ यातायात कम प्रभावित हो।
- स्वयंसेवक दल – गुरुद्वारा समितियों द्वारा अतिरिक्त स्वयंसेवक तैनात करना जो जुलूस के तुरंत बाद सड़कों की सफाई सुनिश्चित करें।
- संवाद – स्थानीय सामुदायिक नेताओं और सिख समुदाय के बीच नियमित बैठकें आयोजित करना ताकि गलतफहमियों को दूर किया जा सके।
दक्षिण ऑकलैंड में नगर कीर्तन का विरोध धर्म के विरुद्ध कम और शहरी प्रबंधन तथा सार्वजनिक व्यवस्था के विरुद्ध अधिक जान पड़ता है। हालांकि इसमें राजनीतिक पुट आ जाने से मामला संवेदनशील हो गया है। एक बहुसांस्कृतिक समाज में आपसी सम्मान और संवाद ही इस प्रकार के विवादों का एकमात्र स्थायी समाधान है।







