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न्यूजीलैंड सरकार ने की ‘वॉर’ की घोषणा, देश से ‘Stone Cold Killers’ का होगा सफाया; क्या है Predator Free 2050 कार्यक्रम?

Stone Cold Killers
नवजोत कौर सिद्धू
On: दिसम्बर 3, 2025 12:18 पूर्वाह्न
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जैव विविधता बचाने के लिए न्यूज़ीलैंड का बड़ा फैसला

न्यूज़ीलैंड अपनी प्राकृतिक सुंदरता, दुर्लभ जीव-जंतुओं और विशिष्ट पारिस्थितिक तंत्र के लिए दुनिया भर में जाना जाता है। लेकिन पिछले कुछ दशकों से देश पर एक गंभीर संकट मंडरा रहा है—आक्रामक शिकारी प्रजातियां, जिन्हें सरकार ने “Stone Cold Killers” कहा है।

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न्यूजीलैंड सरकार ने की 'वॉर' की घोषणा, देश से 'Stone Cold Killers' का होगा सफाया; क्या है Predator Free 2050 कार्यक्रम? 3

इन शिकारी जीवों ने स्थानीय पक्षियों, सरीसृपों और छोटे स्तनधारियों की आबादी को भयावह रूप से कम कर दिया है। इसी खतरे से निपटने के लिए न्यूज़ीलैंड ने एक ऐतिहासिक घोषणा की—

“Predator Free 2050” कार्यक्रम, जिसके तहत 2050 तक देश से सभी प्रमुख आक्रामक शिकारी प्रजातियों का सफाया कर दिया जाएगा।

कौन हैं ये ‘Stone Cold Killers’?


न्यूज़ीलैंड में ये शिकारी जीव बाहरी देशों से आए और धीरे-धीरे स्थानीय पारिस्थितिकी पर भारी पड़ने लगे। सरकार जिन तीन मुख्य शिकारी प्रजातियों को सबसे खतरनाक मानती है, वे हैं—

  1. पॉसेम (Possum) – यह ऑस्ट्रेलिया से आया और न्यूज़ीलैंड में तेजी से फैला। यह अंडों, छोटे पक्षियों, पत्तियों और पेड़ों को भारी नुकसान पहुंचाता है।
  2. स्टॉट (Stoat) – यह एक शिकारी नेवला है, जो उड़ने में कमजोर पक्षियों को आसानी से मार देता है।
  3. चूहे (Rats) – ये पक्षियों के घोंसलों को नष्ट करते हैं, अंडे खाते हैं और अनेक छोटे जीवों के लिए बड़ा खतरा हैं।

इन प्रजातियों के कारण कीवी, काकापो, टाका ही, रॉक रेन और कई अन्य दुर्लभ पक्षी अस्तित्व के संकट में आ गए हैं।

न्यूज़ीलैंड के पक्षी इतने असुरक्षित क्यों?

Stone Cold Killers न्यूज़ीलैंड की एक अनोखी भौगोलिक कहानी है। हजारों साल तक यह द्वीप बिना किसी बड़े शिकारी जीव के रहा। नतीजा यह हुआ कि यहां के कई पक्षियों ने उड़ने की क्षमता खो दी, या बेहद कमजोर उड़ान विकसित की।
उदाहरण: कीवी, काकापो और वेका—ये उड़ नहीं सकते।
जब बाहरी शिकारी आए, तो ये पक्षी मुकाबला नहीं कर पाए और बड़ी संख्या में खत्म होते गए।


सरकार के अनुसार, अगर समय रहते कठोर कदम न उठाए गए, तो आने वाले दशकों में कई प्रजातियां हमेशा के लिए गायब हो सकती हैं।

Predator Free 2050—अब तक का सबसे बड़ा पारिस्थितिक मिशन


साल 2016 में घोषित यह योजना वैश्विक स्तर पर किसी भी देश द्वारा चलाया जा रहा सबसे महत्वाकांक्षी पर्यावरण कार्यक्रम है। इसका लक्ष्य है—
“2050 तक न्यूज़ीलैंड की भूमि को पॉसेम, स्टॉट और चूहों से पूरी तरह मुक्त करना।”
सरकार का मानना है कि इसके बाद देश का पारिस्थितिक संतुलन स्वाभाविक रूप से सुधरेगा, और दुर्लभ प्रजातियाँ एक बार फिर सुरक्षित वातावरण में बढ़ेंगी।

कैसे चलेगा यह ‘युद्ध’?—मुख्य रणनीतियां

  1. विशाल पैमाने पर ट्रैपिंग अभियान
    देश भर में लाखों ट्रैप लगाए जा रहे हैं, ताकि इन शिकारी जीवों की संख्या को नियंत्रित किया जा सके।
  • फंदे स्वचालित, सेंसर-आधारित और दूर से नियंत्रित होने की क्षमता रखते हैं।
  • ट्रैकिंग टेक्नोलॉजी से पता लगाया जाता है कि किस इलाके में शिकारी सक्रिय हैं।
  1. जहरीले चारे का इस्तेमाल
    कुछ क्षेत्रों में 1080 नामक विशेष बायोडिग्रेडेबल जहर का प्रयोग किया जा रहा है।
    यह जहर इंसानों और बड़े जानवरों के लिए कम खतरनाक होता है, लेकिन पॉसेम और चूहों के लिए घातक है।
  2. जीनोमिक और प्रजनन नियंत्रण तकनीकें
    न्यूज़ीलैंड वैज्ञानिकों के साथ मिलकर नई जैविक तकनीकों पर काम कर रहा है—
  • Gene drive तकनीक
  • बांझपन फैलाने वाली जैविक रणनीतियाँ
    इनसे शिकारी प्रजातियों की आबादी बिना हिंसक तरीकों के तेजी से कम की जा सकती है।
  1. सामुदायिक भागीदारी—घरों से लेकर जंगल तक
    इस अभियान की खासियत यह है कि इसमें नागरिक भी सक्रिय रूप से शामिल हैं।
    गांव, शहर और समुदाय अपने-अपने क्षेत्रों में फंदे लगाते हैं और रिपोर्ट सिस्टम के माध्यम से डेटा शेयर करते हैं।
  2. वन पुनर्स्थापन कार्यक्रमळ
    जिन इलाकों में शिकारी खत्म किए जा रहे हैं, वहां पेड़-पौधों और पक्षियों के प्राकृतिक आवास को फिर से विकसित किया जा रहा है।

क्यों जरूरी है यह अभियान?

  1. दुर्लभ पक्षियों की रक्षा
    कई पक्षी प्रजातियाँ सिर्फ न्यूज़ीलैंड में पाई जाती हैं, और उनका खो जाना वैश्विक biodiversity के लिए बहुत बड़ा नुकसान होगा।
  2. पारिस्थितिक संतुलन बहाल करना
    शिकारी प्रजातियों ने food chain को बिगाड़ दिया है। यह मिशन उस संतुलन को दोबारा स्थापित करेगा।
  3. आर्थिक महत्व
    न्यूज़ीलैंड की अर्थव्यवस्था का एक बड़ा हिस्सा पर्यटन पर आधारित है।
    प्राकृतिक सौंदर्य, पक्षियों और वन्यजीव पर्यटन से देश को अरबों डॉलर की आय होती है।
  4. सांस्कृतिक पहचान
    न्यूज़ीलैंड की आदिवासी माओरी संस्कृति की कई कहानियाँ और परंपराएं कीवी जैसे पक्षियों से जुड़ी हैं।
    इनका संरक्षण राष्ट्रीय गौरव का विषय है।

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चुनौतियाँ भी कम नहीं

  1. भौगोलिक कठिनाइयाँ
    न्यूज़ीलैंड की पर्वतीय संरचना और घने जंगल कई इलाकों तक पहुंचना मुश्किल बनाते हैं।
  2. आलोचनाएं और नैतिक सवाल
    पशु अधिकार समूहों द्वारा 1080 जहर के इस्तेमाल और बड़े पैमाने पर वध अभियानों पर सवाल उठाए जाते हैं।
  3. तकनीकी अनिश्चितताएँ
    Gene drive जैसी तकनीकें नई हैं। इनके पर्यावरणीय प्रभावों का दीर्घकालिक अध्ययन अभी अधूरा है।
  4. लागत

यह प्रोजेक्ट अरबों डॉलर का है। लगातार फंडिंग बनाए रखना चुनौती है।
अब तक मिली सफलता—2050 से पहले ही कई क्षेत्र ‘प्रिडेटर फ्री’

  • न्यूजीलैंड के कई छोटे द्वीप अब पूरी तरह सुरक्षित घोषित किए जा चुके हैं।
  • काकापो जैसी प्रजातियों की संख्या में धीरे-धीरे वृद्धि देखी गई है।
  • कई ग्रामीण समुदायों ने अपने क्षेत्र से चूहों को लगभग समाप्त कर दिया है।
    सरकार का कहना है कि यदि इसी गति से काम जारी रहा, तो 2050 का लक्ष्य समय से पहले भी हासिल किया जा सकता है।

क्या दुनिया इससे सीख सकती है?


न्यूज़ीलैंड का यह अभियान न केवल स्थानीय, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी उदाहरण बन सकता है।कई देशों में बाहरी प्रजातियों के कारण पारिस्थितिक संकट पैदा हुआ है—ऑस्ट्रेलिया में खरगोश, अमेरिका में बर्मीज़ पाइथन, हवाई में चूहे आदि। यदि न्यूज़ीलैंड सफलता पाता है, तो यह मॉडल दुनिया के लिए ‘बायोडायवर्सिटी रेस्क्यू प्लान’ बन सकता है।

प्रकृति की सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा युद्ध

न्यूज़ीलैंड सरकार द्वारा घोषित यह ‘वॉर’ किसी देश या समुदाय के खिलाफ नहीं, बल्कि प्रकृति को नुकसान पहुंचाने वाली आक्रामक प्रजातियों के खिलाफ है।
यह Stone Cold Killers मिशन केवल एक पर्यावरणीय परियोजना नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए पृथ्वी की विरासत को सुरक्षित रखने का संकल्प है।

Predator Free 2050 न्यूज़ीलैंड की यह घोषणा बताती है कि—
अगर राजनीतिक इच्छा, वैज्ञानिक रणनीति और जनभागीदारी साथ हो, तो प्रकृति की रक्षा के लिए किसी भी चुनौती से लड़ा जा सकता है।

Pradeep Pandey

A versatile writer mainly works on politics, business, crime, current affairs and entertainment.

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