व्यापारभारतविदेशी समाचारखेलजीवन शैलीराजनीतिधर्मभौगोलिकसेलिब्रेटीज़शिक्षास्वास्थ्य

इंडोनेशिया में  नए साल का ना ही मनाया जायेगा जश्न और न ही फोड़े जाएंगे पटाखे

इंडोनेशिया में नए साल का ना ही मनाया जायेगा जश्न और न ही फोड़े जाएंगे पटाखे
नवजोत कौर सिद्धू
On: दिसम्बर 30, 2025 11:21 पूर्वाह्न
Follow Us:

इंडोनेशिया| जो दुनिया का सबसे बड़ी मुस्लिम आबादी वाला देश है इस समय एक गहरे शोक और संकट के दौर से गुजर रहा है। यही कारण है कि वहां की सरकार और स्थानीय प्रशासन ने वर्ष 2025 के अंत और 2026 के स्वागत के लिए होने वाले नए साल के जश्न और आतिशबाजी (Firecrackers) पर पूरी तरह से रोक लगा दी है।

​इस निर्णय के पीछे का मुख्य कारण सुमात्रा द्वीप (Sumatra) में आई भीषण बाढ़ और भूस्खलन , जिसने देश को हिलाकर रख दिया है।

​इंडोनेशिया में जश्न पर रोक के मुख्य कारण

​इंडोनेशिया में नए साल का जश्न न मनाने के पीछे कोई धार्मिक प्रतिबंध नहीं बल्कि एक मानवीय और राष्ट्रीय आपदा है। इसके प्रमुख पहलुओं को नीचे विस्तार से समझाया गया है-

  • सुमात्रा की विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन-दिसंबर 2025 में इंडोनेशिया के सुमात्रा द्वीप के कई प्रांतों जैसे उत्तर सुमात्रा पश्चिम सुमात्रा और आचे में मूसलाधार बारिश के कारण भीषण बाढ़ और भूस्खलन Landslides आए। इस आपदा ने जो तबाही मचाई है उसके आंकड़े डराने वाले हैं|
  • ​हताहतों की संख्या-इस आपदा में अब तक 1,100 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है।
  • विस्थापन-लगभग 4,00,000 लोग बेघर हो गए हैं और राहत शिविरों में रहने को मजबूर हैं।

​गांवों का अस्तित्व खत्म

गृह मंत्री टीटो कारनवाियन के अनुसार-  बाढ़ के पानी में 20 से अधिक गांव पूरी तरह बह गए हैं, जिनका अब नक्शे पर कोई नामोनिशान नहीं बचा है।

​ राष्ट्रीय एकजुटता और सहानुभूति (Empathy and Solidarity)

​इंडोनेशियाई राष्ट्रपति प्राबोवो सुबियांतो के कार्यालय ने स्पष्ट किया है कि जब देश का एक बड़ा हिस्सा शोक में डूबा हो तो राजधानी जकार्ता या पर्यटन स्थल बाली में आतिशबाजी करना अनुचित है।

सरकार का मानना है कि ​यह समय उत्सव का नहीं बल्कि आपदा पीड़ितों के प्रति सहानुभूति दिखाने का है। ​पूरा देश एक परिवार की तरह उन लोगों के साथ खड़ा है जिन्होंने अपने परिजनों और घरों को खो दिया है। ​आतिशबाजी और शोर-शराबे वाले जश्न को पीड़ितों के जख्मों पर नमक छिड़कने जैसा माना जा रहा है।

Latest news:

प्रमुख शहरों में प्रतिबंध

​इंडोनेशिया के सबसे बड़े शहरों और पर्यटन केंद्रों ने इस प्रतिबंध को सख्ती से लागू किया है-

  • ​जकार्ता-गवर्नर ने स्पष्ट आदेश दिए हैं कि 10 मिलियन की आबादी वाले इस शहर में कोई आधिकारिक आतिशबाजी नहीं होगी।
  • ​बाली-दुनिया भर के पर्यटकों के पसंदीदा केंद्र बाली विशेषकर देनपसार में भी पटाखों और बड़े म्यूजिक कंसर्ट पर रोक लगा दी गई है।
  • मेदान (Medan) उत्तर सुमात्रा -यह शहर बाढ़ से सीधे प्रभावित है यहाँ के निवासियों ने स्वयं भव्य आयोजनों का विरोध किया और प्रशासन को उत्सव रद्द करने पर मजबूर किया।

आपदा का आर्थिक और सामाजिक प्रभाव

​यह केवल जश्न रोकने की बात नहीं है बल्कि इंडोनेशिया इस समय एक गंभीर आर्थिक चुनौती से भी जूझ रहा है-

  • ​पुनर्निर्माण की लागत – आपदा के बाद बुनियादी ढांचे पुलों और घरों के पुनर्निर्माण के लिए कम से कम 3.11 बिलियन डॉलर की आवश्यकता है।
  • ​आर्थिक संसाधनों का डाइवर्जन – सरकार ने उत्सवों पर खर्च होने वाले बजट को राहत कार्यों और स्वास्थ्य सेवाओं की ओर मोड़ दिया है।
  • ​मानसिक स्वास्थ्य –  लाखों लोग अपने परिवार के सदस्यों के खोने के सदमे में हैं ऐसे में सामूहिक प्रार्थनाओं (Mass Prayers) को प्राथमिकता दी जा रही है।

​जश्न की जगह अब क्या होगा

​इंडोनेशियाई सरकार और स्थानीय निकायों ने जश्न को  चिंतन में बदल दिया है। नए साल की पूर्व संध्या पर अब ये गतिविधियां होंगी|

  • ​सामूहिक प्रार्थना (Mass Prayers)-मस्जिदों और सार्वजनिक स्थानों पर आपदा पीड़ितों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थनाएं की जाएंगी।
  • ​फंड जुटाना (Fundraising)-उत्सव के बजाय लोग पीड़ितों की मदद के लिए दान और सहायता राशि एकत्र करेंगे।
  • ​मौन और चिंतन (Reflection)-रात के समय आतिशबाजी के बजाय आपदा के वीडियो और पर्यावरण जागरूकता से जुड़े संदेश दिखाए जाएंगे ताकि भविष्य में ऐसी आपदाओं से बचा जा सके।

​संक्षिप्त कार्यक्रम

जकार्ता जैसे शहरों में कार्यक्रम रात 8:30 बजे तक ही समाप्त कर दिए जाएंगे। ​इंडोनेशिया का यह कदम दुनिया को एक संदेश देता है कि मानवीय मूल्य और राष्ट्रीय एकजुटता किसी भी उत्सव से ऊपर है। 1,100 से अधिक मौतों और लाखों लोगों के विस्थापन के बीच पटाखों की गूंज के बजाय मौन को चुनना वहां के समाज की परिपक्वता को दर्शाता है। यह विपदा प्राकृतिक तो है ही लेकिन इसने पूरे देश को एक सूत्र में बांध दिया है।

Pradeep Pandey

A versatile writer mainly works on politics, business, crime, current affairs and entertainment

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now

Leave a Comment