ईरान इस समय अपने आधुनिक इतिहास के सबसे गंभीर आंतरिक संकट से गुजर रहा है। दिसंबर 2025 के अंत से शुरू हुआ यह जनाक्रोश जनवरी 2026 में एक व्यापक विद्रोह में बदल चुका है। गिरती अर्थव्यवस्था मुद्रा का ऐतिहासिक पतन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर सरकारी पाबंदियों ने जनता को सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर कर दिया है।
संकट की पृष्ठभूमि – चिंगारी कहाँ से भड़की
विरोध प्रदर्शनों की शुरुआत 28 दिसंबर 2025 को हुई। इसका तात्कालिक कारण ईरानी रियाल (Rial) का अप्रत्याशित रूप से गिरना था। वर्तमान में 1 अमेरिकी डॉलर की कीमत 1.46 मिलियन रियाल (14.6 लाख) तक पहुँच गई है।
- महंगाई की मार – खाद्य वस्तुओं की कीमतों में 80% तक की वृद्धि हुई है।
- बेरोजगारी – युवाओं में बढ़ती बेरोजगारी ने असंतोष को हवा दी।
- बुनियादी ढांचे की कमी – सूखे के कारण नदियां सूखने और बिजली कटौती ने ग्रामीण आबादी को भी सरकार के खिलाफ खड़ा कर दिया।
हिंसक झड़पें और सरकारी दमन
प्रदर्शन शुरू में आर्थिक मुद्दों पर केंद्रित थे लेकिन जल्द ही इनमें तानाशाह को मौत (Death to the Dictator) जैसे राजनीतिक नारे गूंजने लगे।
प्रमुख घटनाएँ (जनवरी 2026)
- खूनी रविवार (11 जनवरी 2026) – रिपोर्ट्स के अनुसार तेहरान के पुनक (Punak) जिले और मशहद जैसे शहरों में सुरक्षा बलों ने प्रदर्शनकारियों पर सीधी गोलीबारी की।
- हताहतों की संख्या – मानवाधिकार संगठनों (जैसे HRNA और Iran International) का अनुमान है कि अब तक 538 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं जिनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं। हालांकि अपुष्ट खबरें यह संख्या 2,000 के पार बता रही हैं।
- सुरक्षा बलों को नुकसान – सरकार समर्थक ‘बसीज’ (Basij) अर्धसैनिक बल और IRGC के लगभग 114 सदस्य भी इन झड़पों में मारे गए हैं।
- डिजिटल सेंसरशिप – ईरान सरकार ने पूरे देश में इंटरनेट ब्लैकआउट लागू कर दिया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और स्टारलिंक (Starlink) जैसे सैटेलाइट इंटरनेट पर भी कड़ी नजर रखी जा रही है ताकि दुनिया को अंदरूनी हिंसा की खबरें न मिल सकें।
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वैश्विक मंच पर गूँज और प्रतिक्रियाएँ
ईरान का यह आंतरिक संकट अब एक वैश्विक कूटनीतिक युद्ध में बदल गया है।
| पक्ष | प्रतिक्रिया / रुख |
| संयुक्त राष्ट्र (UN) | यूएन फैक्ट-फाइंडिंग मिशन ने ईरान से तुरंत इंटरनेट बहाल करने और “घातक बल” का प्रयोग बंद करने का आग्रह किया है। |
| संयुक्त राज्य अमेरिका | राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर प्रदर्शनकारियों का खुला समर्थन किया है और कहा कि “अमेरिका मदद के लिए तैयार है।” उन्होंने सीधे सैन्य हस्तक्षेप या साइबर हमलों की चेतावनी भी दी है। |
| इजरायल | प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ईरानी जनता की बहादुरी की सराहना की है। इजरायल इस समय हाई-अलर्ट पर है। |
| यूरोपीय संघ (EU) | यूरोपीय देशों ने मानवाधिकारों के उल्लंघन पर गहरी चिंता जताई है और नए प्रतिबंध लगाने की चेतावनी दी है। |
भू-राजनीतिक निहितार्थ (Geopolitical Implications)
ईरान का संकट केवल उसके बॉर्डर तक सीमित नहीं है|
- इजरायल-ईरान तनाव – ईरान ने धमकी दी है कि यदि अमेरिका ने हस्तक्षेप किया तो वह इजरायल और क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों को “वैध लक्ष्य” बनाएगा।
- परमाणु कार्यक्रम – आंतरिक अस्थिरता के बीच ईरान के परमाणु केंद्रों जैसे नतान्ज़ की सुरक्षा और उन पर संभावित इजरायली हमलों की चर्चा फिर से तेज हो गई है।
- क्षेत्रीय प्रभाव – हमास और हिजबुल्ला जैसे समूहों को मिलने वाली ईरानी सहायता में कमी आ सकती है जिससे मध्य-पूर्व का शक्ति संतुलन बिगड़ सकता है।
भविष्य की राह – क्या यह तख्तापलट की शुरुआत है
विशेषज्ञों का मानना है कि 2026 के ये प्रदर्शन 2022 के ‘महिला-जीवन-स्वतंत्रता’ आंदोलन से भी बड़े और अधिक हिंसक हैं क्योंकि इसमें समाज के सभी वर्ग मजदूर, छात्र, और बाजार व्यापारी शामिल हैं।
महत्वपूर्ण तथ्य – यह पहली बार है जब ईरान के उन क्षेत्रों में भी विद्रोह देखा जा रहा है जिन्हें पारंपरिक रूप से सरकार का वफादार माना जाता था।
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