ईरान की राजनीति बहुत बदल गई है। अयातुल्ला अली खामेनेई का उत्तराधिकारी मोजतबा खामेनेई देश का नया प्रधानमंत्री बन गया है। विशेषज्ञों का मत है कि यह फैसला सिर्फ नेतृत्व को बदलने का नहीं है; इससे ईरान की नीतियों और अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर भी गहरा असर हो सकता है। विभिन्न विश्लेषकों ने चेतावनी दी है कि इस कदम से मिडिल ईस्ट क्षेत्र में तनाव बढ़ सकता है और अमेरिका और इजरायल के साथ टकराव की संभावना बढ़ सकती है।
ईरान के प्रधानमंत्री की सबसे बड़ी शक्ति
ईरान की राजनीतिक व्यवस्था में सबसे शक्तिशाली पद सुप्रीम लीडर है। इसी पद को देश की विदेश नीति, रक्षा नीति और परमाणु कार्यक्रम जैसे महत्वपूर्ण निर्णय लेने का अधिकार है।
संसद और राष्ट्रपति भी सुप्रीम लीडर के मार्गदर्शन में काम करते हैं। इसलिए देश की दिशा और रणनीति इस पद पर बैठने से प्रभावित होती है।
मोजतबा खामेनेई का प्रधानमंत्री बनना भी महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि इससे ईरान की नीतियों में बदलाव की संभावना पर बहस शुरू हो गई है।
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अमेरिका को बड़ा धक्का
विशेषज्ञों का कहना है कि मोजतबा खामेनेई का प्रधानमंत्री बनना संयुक्त राज्य अमेरिका के लिए एक बड़ा झटका है। माना जाता था कि मोजतबा ने इतना बड़ा पद नहीं चाहा और पहले अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उन्हें कमजोर नेता बताया था।
लेकिन ईरान ने अपने निर्णय से दिखाया कि वह बाहरी दबाव को कम महत्व देगा और खुद अपनी राजनीतिक दिशा निर्धारित करेगा। इस फैसले से अमेरिका-ईरान संबंधों में और अधिक तनाव की आशंका है।
विरोधी नीति की आशंका
मिडिल ईस्ट मामलों के जानकारों का कहना है कि मोजतबा खामेनेई को चुनना भी एक राजनीतिक संदेश है। यह निर्णय तब किया गया है जब क्षेत्र में पहले से ही कई संघर्ष और तनाव मौजूद हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि मोजतबा एक ऐसा नेता है जो अमेरिका के साथ नरम नीति के बजाय अधिक कठोर हो सकता है। इसलिए कई लोगों को डर है कि ईरान की विदेश नीति भविष्य में अधिक कठोर हो सकती है।
ऐसा होता है तो मिडिल ईस्ट में राजनीतिक संतुलन बदल सकता है, न सिर्फ ईरान और अमेरिका पर।
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पिता के समय से प्रभाव
लंबे समय से, मोजतबा खामेनेई को ईरान की सरकार में सबसे प्रभावशाली व्यक्ति माना जाता है। बताया जाता है कि वह अपने पिता के कार्यकाल के दौरान भी कई महत्वपूर्ण निर्णयों पर प्रभाव रखते थे।
उन्हें हुज्जतुल इस्लाम की उपाधि दी गई है और वे ईरान के प्रमुख शिया धार्मिक केंद्र क़ोम में धार्मिक शिक्षा प्राप्त की है। सत्ता के अंदर उनका प्रभाव पहले से ही मजबूत था, और अब औपचारिक रूप से सुप्रीम लीडर बनने के बाद उनकी भूमिका और बढ़ जाएगी, ऐसा विश्लेषकों का मानना है।
अमेरिका ने पहले भी प्रतिबंध लगा चुका है
अमेरिका पहले से ही मोजतबा खामेनेई को घेर रहा है। 2019 में यूएस ने उन पर प्रतिबंध लगाया था। अमेरिका को आरोप लगाया गया था कि वह बिना किसी आधिकारिक सरकारी पद के भी सरकारी निर्णयों पर प्रभाव डालते हैं।
ईरान अभी भी कई आर्थिक और सामाजिक समस्याओं से जूझ रहा है। देश में महंगाई बढ़ रही है, मुद्रा कमजोर हो रही है और जनता असंतुष्ट है।
ऐसे परिस्थितियों में मोजतबा खामेनेई को दोहरी चुनौती मिलेगी। उन्हें एक तरफ देश की आंतरिक समस्याओं को हल करना होगा और दूसरी तरफ क्षेत्रीय संघर्षों और वैश्विक दबाव के बीच संतुलन बनाए रखना होगा। ईरान की राजनीति उनके नेतृत्व में आने वाले समय में और अधिक कठोर हो सकती है, कुछ विश्लेषकों का मत है।







