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दक्षिणी लेबनान पर फिर बरसे इजरायली बम पीएम सलाम बोले- यह ‘जलती धरती’ की नीति

दक्षिणी लेबनान पर फिर बरसे इजरायली बम पीएम सलाम बोले- यह ‘जलती धरती’ की नीति
नवजोत कौर सिद्धू
On: मई 31, 2026 2:11 अपराह्न
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बेरूत। दक्षिणी लेबनान एक बार फिर इजरायली बारूद से दहल उठा है। शनिवार को हुए ताबड़तोड़ हवाई हमलों के बाद लेबनान के प्रधानमंत्री नवाफ सलाम का गुस्सा फूट पड़ा। उन्होंने इजरायल पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि वह दक्षिणी इलाकों में “जलती धरती” (स्कॉर्च्ड अर्थ) की खतरनाक नीति पर काम कर रहा है। पीएम सलाम ने कहा कि इजरायली बमबारी अब केवल सैन्य ठिकानों तक महदूद नहीं रह गई है, बल्कि इसकी सीधी जद में आम नागरिक और रिहायशी इलाके आ रहे हैं।ताजा हमलों के बाद पूरे दक्षिणी लेबनान में हालात बेहद नाजुक और तनावपूर्ण बने हुए हैं। स्थानीय प्रशासन से मिली शुरुआती जानकारी के मुताबिक, इस गोलाबारी में कई लोगों की मौत हो चुकी है और दर्जनों घायल हैं। मलबे के बीच राहत और बचाव दल मुस्तैदी से जुटे हैं। धमाकों की गूंज के बीच दहशतजदा परिवार अपनी जान बचाने के लिए घर-बार छोड़कर सुरक्षित ठिकानों की ओर भागने को मजबूर हैं।

अंतरराष्ट्रीय बिरादरी से दखल की गुहार

प्रधानमंत्री नवाफ सलाम ने दोटूक कहा कि इजरायल की यह मनमानी पूरे क्षेत्र को तबाही की ओर धकेल रही है। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र और वैश्विक ताकतों से तुरंत दखल देने की मांग करते हुए कहा कि अब सिर्फ बयानों से काम नहीं चलेगा, मासूमों की जान बचाने के लिए जमीन पर कड़े कदम उठाने होंगे।सलाम ने जमीनी हकीकत बयां करते हुए कहा कि दक्षिणी लेबनान के गांवों में रहने वाले लोग हर पल मौत के साये में जी रहे हैं। लगातार हो रहे हमलों ने पटरी पर लौट रही जिंदगी को पूरी तरह तहस-नहस कर दिया है। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि अगर इस बारूद को तुरंत नहीं रोका गया, तो यह चिंगारी पूरे मिडिल ईस्ट को एक बड़े और भीषण युद्ध की आग में झोंक सकती है।

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इजरायल का दावा- हिजबुल्लाह के हथियार डिपो उड़ाए

दूसरी तरफ, इजरायली डिफेंस फोर्सेज ने इन हमलों पर अपनी सफाई दी है। इजरायल का दावा है कि उनके लड़ाकू विमानों ने केवल हिजबुल्लाह के ठिकानों, बंकरों और उनके हथियार डिपो को निशाना बनाया है। इजरायल का कहना है कि उत्तरी सीमा पर रहने वाले अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए यह कार्रवाई जरूरी थी, क्योंकि पिछले कुछ दिनों में हिजबुल्लाह की संदिग्ध गतिविधियों में अचानक तेजी देखी गई थी।हालांकि, लेबनान के जमीनी अधिकारियों ने इजरायल के इन दावों को खारिज किया है। उनका कहना है कि बम सीधे उन इमारतों और सड़कों पर गिरे हैं जहां आम परिवार रहते थे। कई रिहायशी सोसायटियों और पब्लिक प्रॉपर्टी को इन हमलों में भारी नुकसान पहुंचा है।

युद्धविराम सिर्फ नाम का, कूटनीति फेल?

हैरानी की बात यह है कि यह खूनी खेल तब हो रहा है जब कुछ समय पहले ही दोनों पक्षों के बीच तनाव कम करने के लिए एक युद्धविराम की सहमति बनी थी। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि यह समझौता महज कागजों तक सिमट कर रह गया है। इजरायल और हिजबुल्लाह, दोनों ही एक-दूसरे पर इस शांति समझौते की धज्जियां उड़ाने का ठीकरा फोड़ रहे हैं।रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों पक्षों के बीच अविश्वास की खाई इतनी चौड़ी हो चुकी है कि अब किसी छोटी सी उकसावे वाली कार्रवाई के बाद भी पूरी सीमा पर जंग छिड़ जाती है। यही वजह है कि तमाम अंतरराष्ट्रीय दबावों के बाद भी गोलियों और मिसाइलों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है।

मानवीय संकट: दाने-दाने को मोहताज लोग

इस पूरी जंग का सबसे दर्दनाक पहलू वह मानवीय संकट है जो अब दक्षिणी लेबनान में गहराने लगा है। गांवों से लोगों का पलायन लगातार जारी है, जिससे शरणार्थी शिविरों पर दबाव बढ़ गया है। स्कूल, कॉलेज और अस्पताल या तो मलबे में तब्दील हो चुके हैं या बंद पड़े हैं। राहत एजेंसियों ने हाथ खड़े करते हुए कहा है कि युद्ध प्रभावित इलाकों में दवाओं, साफ पानी और राशन की भारी किल्लत हो गई है।फिलहाल, अमेरिका सहित कई पश्चिमी देश परदे के पीछे से इस तनाव को शांत करने की कोशिशों में जुटे हैं, लेकिन फिलहाल दोनों ही पक्ष पीछे हटने को तैयार नहीं दिख रहे हैं। लेबनान जहां बिना शर्त पूरी तरह से बमबारी रोकने की जिद पर अड़ा है, वहीं इजरायल अपनी सुरक्षा चिंताओं को आगे रखकर पीछे हटने से साफ इनकार कर रहा है।

Pradeep Pandey

A versatile writer mainly works on politics, business, crime, current affairs and entertainment

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