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जम्मू-कश्मीर ने इतिहास रचा — बंगाल को हराकर पहली बार रणजी ट्रॉफी फाइनल में जगह

जम्मू-कश्मीर ने इतिहास रचा — बंगाल को हराकर पहली बार रणजी ट्रॉफी फाइनल में जगह
नवजोत कौर सिद्धू
On: फ़रवरी 20, 2026 11:34 पूर्वाह्न
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भारतीय घरेलू क्रिकेट के सबसे प्रतिष्ठित टूर्नामेंट रणजी ट्रॉफी 2025-26 में एक ऐतिहासिक क्षण देखने को मिला, जब जम्मू-कश्मीर की टीम ने सेमीफाइनल में मजबूत और अनुभवी बंगाल को छह विकेट से हराकर पहली बार फाइनल में प्रवेश कर लिया। कल्याणी स्थित बंगाल क्रिकेट अकादमी मैदान पर खेला गया यह मुकाबला रोमांच, संघर्ष और धैर्य की मिसाल बन गया।

दशकों तक घरेलू क्रिकेट में संघर्ष करती रही जम्मू-कश्मीर टीम ने इस जीत के साथ साबित कर दिया कि अब भारतीय क्रिकेट का भूगोल बदल रहा है और छोटे केंद्रों से भी बड़ी टीमें उभर रही हैं।

मैच का पूरा स्कोर

  • बंगाल – 328 और 99
  • जम्मू-कश्मीर – 302 और 126/4
  • परिणाम – जम्मू-कश्मीर 6 विकेट से विजयी
  • प्लेयर ऑफ द मैच – आकिब नबी

पहला दिन: बंगाल की मजबूत शुरुआत

सेमीफाइनल मुकाबले की शुरुआत बंगाल के आत्मविश्वास के साथ हुई। कप्तान अभिमन्यु ईश्वरन और शीर्ष क्रम के बल्लेबाजों ने संयमित बल्लेबाजी करते हुए टीम को मजबूत स्थिति में पहुंचाया।

सुदीप कुमार घरामी ने शानदार शतक जमाते हुए पारी की रीढ़ बने और बंगाल ने पहले दिन का खेल 249/5 के स्कोर पर समाप्त किया। उनकी धैर्यपूर्ण बल्लेबाजी ने शुरुआती दौर में मैच पर बंगाल की पकड़ मजबूत कर दी थी। 

हालांकि जम्मू-कश्मीर के गेंदबाज लगातार दबाव बनाए रहे और विकेटों के बीच रन गति नियंत्रित रखी, जिससे बंगाल विशाल स्कोर की ओर तेजी से नहीं बढ़ सका।

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बंगाल की पहली पारी — 328 रन

दूसरे दिन बंगाल की टीम 328 रन पर सिमट गई। बल्लेबाजों ने शुरुआत अच्छी की लेकिन मध्य और निचले क्रम में निरंतर विकेट गिरने से टीम अपेक्षित बड़े स्कोर तक नहीं पहुंच सकी।

जम्मू-कश्मीर की ओर से तेज गेंदबाजों और ऑलराउंडरों ने अनुशासित गेंदबाजी की। आकिब नबी डार ने महत्वपूर्ण विकेट लेकर मैच में निर्णायक भूमिका निभाई। 

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जम्मू-कश्मीर की पहली पारी: संघर्ष और वापसी

जम्मू-कश्मीर की शुरुआत आसान नहीं रही। टीम एक समय 231/8 के संकट में थी और बंगाल को बड़ी बढ़त मिलती दिख रही थी।

लेकिन आकिब नबी और युधवीर सिंह के बीच हुई नौवें विकेट के लिए 64 रन की साझेदारी ने टीम को सम्मानजनक स्कोर तक पहुंचाया। इस साझेदारी ने मैच में वापसी की नींव रखी। 

पूरी टीम 302 रन बनाकर आउट हुई और बंगाल को केवल 26 रन की मामूली बढ़त मिली।

दूसरी पारी: जम्मू-कश्मीर गेंदबाजों का दबदबा

दूसरी पारी में मैच पूरी तरह पलट गया। जम्मू-कश्मीर के गेंदबाजों ने अनुशासित लाइन-लेंथ के साथ बंगाल बल्लेबाजी को झकझोर दिया। बंगाल की टीम मात्र 99 रन पर ढेर हो गई।

टॉप ऑर्डर दबाव में टूट गया और कोई बल्लेबाज बड़ी पारी नहीं खेल सका।

आकिब नबी डार की शानदार गेंदबाजी ने मैच को निर्णायक दिशा दी और इसी प्रदर्शन के कारण उन्हें ‘प्लेयर ऑफ द मैच’ चुना गया।

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लक्ष्य 126 रन — लेकिन दबाव बरकरार

जम्मू-कश्मीर को जीत के लिए 126 रन का लक्ष्य मिला। दिखने में आसान यह लक्ष्य सेमीफाइनल के दबाव में चुनौतीपूर्ण बन गया।

शुरुआती विकेट जल्दी गिरने से स्कोर 70 के आसपास चार विकेट पर पहुंच गया और बंगाल की वापसी की उम्मीद जगी।

लेकिन इसके बाद: वंशज शर्मा (नाबाद 43 )और अब्दुल समद (नाबाद 30) के बीच 55 रन की अविजित साझेदारी ने टीम को ऐतिहासिक जीत दिलाई। विजयी छक्का लगते ही मैदान पर जश्न का माहौल बन गया।

दशकों का इंतजार खत्म

जम्मू-कश्मीर की रणजी यात्रा आसान नहीं रही है। 1950 के दशक के अंत में टूर्नामेंट में शामिल होने के बाद टीम लंबे समय तक शुरुआती दौर से आगे नहीं बढ़ पाती थी।

300 से ज्यादा रणजी मैच खेलने के बाद,कई साल निचले पायदान पर संघर्ष करने और

सीमित संसाधन और कठिन परिस्थितियों के बावजूद टीम ने धीरे-धीरे अपनी पहचान बनाई और अब पहली बार फाइनल तक पहुंच गई है। यह उपलब्धि राज्य के क्रिकेट इतिहास की सबसे बड़ी सफलता मानी जा रही है।

कप्तान पारस डोगरा का सपना साकार

अनुभवी खिलाड़ी पारस डोगरा के लिए यह जीत भावनात्मक रही। लगभग ढाई दशक लंबे घरेलू करियर के बाद उन्होंने टीम को ऐतिहासिक मुकाम तक पहुंचाया।

उन्होंने मैच के बाद कहा कि टीम की सफलता का मंत्र “जिद और धैर्य” रहा। 

क्रिकेट जगत की प्रतिक्रियाएं

जम्मू-कश्मीर की जीत के बाद क्रिकेट जगत से बधाइयों की झड़ी लग गई। विशेषज्ञों ने इसे भारतीय घरेलू क्रिकेट की सबसे प्रेरणादायक कहानियों में से एक बताया।

यह पहली बार है जब हिमालयी क्षेत्र की कोई टीम रणजी ट्रॉफी फाइनल तक पहुंची है। 

राज्य के मुख्यमंत्री ने भी टीम की उपलब्धि को प्रदेश के लिए गौरवपूर्ण क्षण बताया और खिलाड़ियों की मेहनत की सराहना की। 

फाइनल का इंतजार

अब जम्मू-कश्मीर की टीम फाइनल में कर्नाटक और उत्तराखंड के बीच खेले गए दूसरे सेमीफाइनल के विजेता से भिड़ेगी। 

टीम का आत्मविश्वास चरम पर है और यदि गेंदबाज इसी लय में रहे तो खिताब जीतने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता।

Swati Pandey

A versatile writer mainly works on trending news, daily updates from politics, business, crime, current affairs and entertainment.

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