व्यापारभारतविदेशी समाचारखेलजीवन शैलीराजनीतिधर्मभौगोलिकसेलिब्रेटीज़शिक्षास्वास्थ्य

Kerala to Keralam – केरल अब ‘केरलम’ से जाना जायेगा राज्य का नाम बदलने के फैसले को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मंजूरी

केरल अब 'केरलम' से जाना जायेगा राज्य का नाम बदलने के फैसले को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मंजूरी
नवजोत कौर सिद्धू
On: फ़रवरी 24, 2026 8:12 अपराह्न
Follow Us:

केरल सरकार द्वारा राज्य का नाम बदलकर केरलम (Keralam) करने का प्रस्ताव वर्तमान में भारतीय राजनीति और प्रशासनिक गलियारों में चर्चा का एक प्रमुख विषय है। यह केवल एक भाषाई बदलाव नहीं है बल्कि यह केरल की सांस्कृतिक पहचान भाषाई गौरव और ऐतिहासिक जड़ों को पुनर्जीवित करने का एक गंभीर प्रयास है।

केरल से केरलम –  नाम बदलने की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक यात्रा

केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन (Chief Minister Pinarayi Vijayan) ने राज्य विधानसभा में सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित किया जिसमें केंद्र सरकार से संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल सभी भाषाओं में राज्य का नाम बदलकर केरलम (Keralam) करने का आग्रह किया गया है।

  • प्रस्ताव की तिथि –  केरल विधानसभा ने अगस्त 2023 और पुनः जून 2024 में इस प्रस्ताव को पारित किया।
  • अनुसूची –  संविधान की पहली अनुसूची राज्यों के नामों से संबंधित है।
  • भाषा –  केरल की आधिकारिक भाषा मलयालम (Malayalam) है और केरलम  (Keralam)  इसी भाषा का शुद्ध उच्चारण है।

केरलम नाम का मूल आधार

मलयालम भाषा (Malayalam Language) में राज्य को हमेशा से केरलम ही कहा जाता रहा है। केरल शब्द वास्तव में इस नाम का अंग्रेजी या संस्कृत संस्करण (version) माना जाता है।

  • भाषाई जड़ें –  मलयालम में केरा (Kera) का अर्थ नारियल का पेड़ होता है और अलम (Alam) का अर्थ भूमि होता है। इस प्रकार केरलम का अर्थ है नारियल के पेड़ों की भूमि।
  • ऐतिहासिक संदर्भ – प्राचीन शिलालेखों और अशोक के शिलालेखों (द्वितीय शिलालेख) में इस क्षेत्र को केरलपुत्र (Keralaputra) कहा गया है। स्थानीय लोगों के लिए केरलम (Keralam) शब्द उनकी अस्मिता और मातृभाषा से गहराई से जुड़ा हुआ है।

विधानसभा चुनाव से पहले केरल की राजनीति में बड़ा बदलाव

नाम बदलने की आवश्यकता क्यों पड़ी?

आजादी के बाद जब भाषाई आधार पर राज्यों का पुनर्गठन (Reorganization of states) हुआ तो 1 नवंबर 1956 को केरल राज्य अस्तित्व में आया। हालांकि संविधान की पहली अनुसूची में इसका नाम ‘केरल’ (Kerala) दर्ज किया गया है।

  • विसंगति दूर करना –  मुख्यमंत्री के अनुसार मलयालम (Malayalam) भाषी लोग अपनी भूमि को केरलम (Keralam) कहते हैं लेकिन आधिकारिक दस्तावेजों और अन्य भाषाओं में इसे केरल कहा जाता है। इस विसंगति को समाप्त करने के लिए यह कदम उठाया गया है।
  • सांस्कृतिक गौरव –  यह कदम क्षेत्रीय भाषा और पहचान को बढ़ावा देने के व्यापक प्रयास का हिस्सा है।

संवैधानिक प्रक्रिया – नाम कैसे बदला जाता है?

भारत के किसी भी राज्य का नाम बदलना एक लंबी और औपचारिक संवैधानिक प्रक्रिया (formal constitutional process) है। इसमें केवल राज्य सरकार की इच्छा काफी नहीं होती बल्कि केंद्र सरकार और संसद की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 3 की भूमिका

संविधान का अनुच्छेद 3 (Article 3) संसद को यह शक्ति देता है कि वह किसी भी राज्य का नाम बदल सके। इसकी प्रक्रिया निम्नलिखित चरणों में होती है- 

  • राज्य विधानसभा का प्रस्ताव – सबसे पहले संबंधित राज्य की विधानसभा एक प्रस्ताव पारित करती है। केरल विधानसभा (Kerala Assembly) ने यह प्रस्ताव सर्वसम्मति (proposal consensus) से पारित कर केंद्र को भेजा है।
  • केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी – राज्य के प्रस्ताव पर केंद्रीय गृह मंत्रालय (Union Home Ministry) विचार करता है और फिर इसे केंद्रीय मंत्रिमंडल (Cabinet) के पास भेजा जाता है।
  • राष्ट्रपति की सिफारिश – नाम बदलने का विधेयक (Bill) पेश करने से पहले राष्ट्रपति की सिफारिश (President’s recommendation) अनिवार्य है।
  • संसद में मतदान –  संसद के दोनों सदनों (Lok Sabha and Rajya Sabha) में इस विधेयक को साधारण बहुमत से पारित करना होता है।
  • संविधान संशोधन – नाम बदलने के बाद संविधान की पहली और चौथी अनुसूची (Amendments to the First and Fourth Schedules) में संशोधन किया जाता है ताकि राज्य का नया नाम आधिकारिक रूप से दर्ज हो सके।

नाम बदलने के क्षेत्र प्रभाव और महत्व

  • प्रशासनिक  – सभी लेटरहेड, सरकारी दस्तावेजों (government documents), डिजिटल पोर्टल्स और सील (stamp) पर नाम अपडेट करना होगा। 
  • अंतरराष्ट्रीय  –  अंतरराष्ट्रीय (international) स्तर पर राज्य की ब्रांडिंग Kerala के बजाय Keralam के रूप में की जाएगी। 
  • शिक्षा  –  स्कूली पाठ्यपुस्तकों (books) और मानचित्रों में बदलाव की आवश्यकता होगी। 
  • पहचान  –  यह भाषाई विविधता (linguistic diversity) और क्षेत्रीय स्वायत्तता (regional autonomy) के सम्मान का प्रतीक है। 

Read also:

क्या पहले भी राज्यों के नाम बदले गए हैं?

हाँ, भारत में राज्यों और शहरों (states and cities) के नाम बदलने का एक लंबा इतिहास रहा है। यह प्रक्रिया अक्सर औपनिवेशिक विरासत (colonial legacy) को हटाकर स्थानीय पहचान (local identity) को अपनाने के लिए की जाती है।

  • 1956- त्रावणकोर-कोचीन से केरल (Travancore-Cochin to Kerala) 
  • 1969- मद्रास से तमिलनाडु (Madras to Tamil Nadu)
  • 1973 – मैसूर से कर्नाटक (Mysore to Karnataka)
  • 2007- उत्तरांचल से उत्तराखंड (Uttaranchal to Uttarakhand)
  • 2011- उड़ीसा से ओडिशा (Orissa to Odisha)

केरल से केरलम (Kerala to Keralam) बनने की प्रक्रिया केवल अक्षरों का फेरबदल नहीं है, बल्कि यह उस सांस्कृतिक विरासत (cultural heritage) का सम्मान है जिसे वहां के लोग सदियों से संजोए हुए हैं। यदि केंद्र सरकार और संसद (Central Government and Parliament) इस पर अंतिम मुहर लगा देते हैं तो यह भारतीय संघवाद (Indian Federalism) के भीतर भाषाई पहचान की एक बड़ी जीत होगी।

Dr Pankaj Sharma

fitness coach and writer mainly work on sports, fitness, Religious, foreign news, and technology

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now

Leave a Comment