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जानिए कब क्यों और कैसे मनाया जाता है माघ बिहू – एक प्रमुख फसल उत्सव 

जानिए कब क्यों और कैसे मनाया जाता है माघ बिहू - एक प्रमुख फसल उत्सव 
नवजोत कौर सिद्धू
On: जनवरी 13, 2026 2:50 अपराह्न
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माघ बिहू जिसे भोगली बिहू के नाम से भी जाना जाता है असम के सबसे महत्वपूर्ण और उल्लासपूर्ण त्योहारों में से एक है। यह केवल एक फसल उत्सव नहीं है बल्कि असमिया संस्कृति भाईचारे और प्रकृति के प्रति आभार व्यक्त करने का एक जीवंत प्रतीक है।

क्या है माघ बिहू 

माघ बिहू असमिया कैलेंडर के माघ महीने की संक्रांति (जनवरी के मध्य) को मनाया जाता है। बिहू शब्द दिमासा कछारी भाषा के शब्द बि (पूछना) और शु (शांति और समृद्धि) से निकला है। क्योंकि यह त्योहार फसल कटाई के बाद मनाया जाता है और घरों में अनाज भरा होता है इसलिए इसे भोगली बिहू (भोग या आनंद का बिहू) भी कहते हैं।

कब मनाया जाता है माघ बिहू 

यह प्रतिवर्ष 14 या 15 जनवरी को मनाया जाता है। यह मकर संक्रांति के समय के साथ मेल खाता है, जब सूर्य धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करता है। त्योहार की मुख्य गतिविधियाँ उरुका (बिहू से एक दिन पहले की शाम) से शुरू होती हैं।

क्यों मनाया जाता है माघ बिहू 

  • फसल की कटाई –  यह मुख्य रूप से एक कृषि उत्सव है। किसान अपनी मेहनत से उपजी फसल के घर आने की खुशी मनाते हैं।
  • प्रकृति का आभार – यह अग्नि देवता और प्रकृति को धन्यवाद देने का समय है जिन्होंने अच्छी फसल और समृद्धि प्रदान की।
  • सामुदायिक बंधन –  यह त्यौहार लोगों को एक साथ आने सामूहिक रूप से भोजन करने और आपसी मतभेदों को भुलाने का अवसर देता है।

माघ बिहू कैसे मनाया जाता है? 

माघ बिहू के उत्सव के मुख्य आकर्षण निम्नलिखित हैं-

  • उरुका (Uruka)-बिहू के एक दिन पहले की रात को उरुका कहते हैं। इस रात लोग खेतों में बांस, सूखी घास और लकड़ी से भेलघर (अस्थायी झोपड़ी) और मेजी (एक ऊंचा ढांचा) बनाते हैं। लोग पूरी रात जागते हैं अलाव जलाते हैं और सामूहिक रूप से दावत (Grand Feast) करते हैं।
  • मेजी जलाना (Burning of Meji)-बिहू की सुबह लोग जल्दी उठकर स्नान करते हैं और फिर मेजी को आग लगाते हैं। यह इस त्यौहार का सबसे पवित्र क्षण होता है। जलती हुई मेजी के चारों ओर लोग इकट्ठा होते हैं और अग्नि देवता से आशीर्वाद मांगते हैं।

माघ बिहू पारंपरिक भोजन (Traditional Food)

इस दौरान विशेष पकवान बनाए जाते हैं

  • लारू (Laru) –  नारियल या तिल के लड्डू।
  • पीठा (Pitha) – चावल के आटे से बनी विभिन्न प्रकार की मिठाइयां (जैसे तिल पीठा, घिला पीठा)।
  • जलपान (Jolpan) –  दही, गुड़ और चिड़वा का मिश्रण।

किसकी और कैसे पूजा की जाती है? 

  • अग्नि पूजा –  माघ बिहू में मुख्य रूप से अग्नि देवता की पूजा की जाती है। मेजी में आग लगाना एक धार्मिक अनुष्ठान माना जाता है।
  • विधि – लोग मेजी में तिल, चावल और पीठा अर्पित करते हैं। वे अग्नि के सामने झुककर प्रार्थना करते हैं कि पुरानी बुराइयाँ और आलस्य अग्नि में जल जाएं और नया साल समृद्धि लेकर आए।

पारंपरिक खेल और मनोरंजन

माघ बिहू के दौरान कई पारंपरिक खेल आयोजित किए जाते हैं जैसे

  • मोश-जुझ (Buffalo Fight) – हालांकि अब इस पर कड़े नियम हैं।
  • कॉक फाइट (Bulbul Fight) –  पक्षियों की लड़ाई।
  • अंडा लड़ाई –  लोग अंडों को आपस में टकराते हैं जिसका अंडा नहीं टूटता वह जीतता है।

यह क्यों मुख्य है?

असम में तीन बिहू मनाए जाते हैं रंगाली, कंगाली और भोगली लेकिन माघ बिहू प्रचुरता का प्रतीक है। यह सर्दियों के अंत और फसल की सुरक्षा का जश्न है। यह असमिया पहचान का एक अभिन्न अंग है जो शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों को एक सूत्र में पिरोता है।

Swati Pandey

A versatile writer mainly works on trending news, daily updates from politics, business, crime, current affairs and entertainment.

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